फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Business ›   Business Diary ›   RBI proposes raising loan limit against share pledge to Rs 1 crore

RBI का बड़ा फैसला: आरबीआई ने शेयर गिरवी पर ऋण सीमा बढ़ाकर एक करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव रखा

Wed, 01 Oct 2025 06:12 PM IST
रिया दुबे बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: रिया दुबे Updated Wed, 01 Oct 2025 06:12 PM IST
सार

देश की अर्थव्यवस्था में क्रेडिट के फ्लो को बढ़ावा देने के लिए आरबीआई कुछ ने बड़ा फैसला लिया है। अब आप अपने शेयर को बैंक में गिरवी रखाकर पहले की तुलना में ज्यादा पैसा उधार ले सकते हैं। पहले यह लिमिट 20 लाख रुपए थी, जिसे बढ़ाकर अब 1 करोड़ रुपए कर दिया गया है।

विज्ञापन
RBI proposes raising loan limit against share pledge to Rs 1 crore
भारतीय रिजर्व बैंक - फोटो : ANI

विस्तार

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवनर्र सजंय महल्होत्रा मौद्रिक नीमि समिति (एपीसी) की बैठक के बाद घोषणा की रेपो रेट को अपरिवर्तित रखा गया है। यानी यह 5.5 प्रतिशत पर स्थिर रहेगी। उन्होने कहा कि भविष्य में समय और महौल को देखते हुए रेपो रेट कटौती पर फैसला लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि अगस्त में मौद्रिक नीति के बाद विकास और मुद्रास्फीति की गतिशीलता बदल गई है। जीएसटी में सुधार से मुद्रास्फीति पर नियंत्रण होगा। जबकि उच्च टैरिफ से निर्यात विकास में मंदी आने की संभावना है।

विज्ञापन

क्रेडिट फ्लो को लेकर आरबीआई ने लिया बड़ा फैसला

देश की अर्थव्यवस्था में क्रेडिट के फ्लो को बढ़ावा देने के लिए आरबीआई कुछ ने बड़ा फैसला लिया है। अब आप अपने शेयर को बैंक में गिरवी रखाकर पहले की तुलना में ज्यादा पैसा उधार ले सकते हैं। पहले यह लिमिट 20 लाख रुपए थी, जिसे बढ़ाकर अब 1 करोड़ रुपए कर दिया गया है। इसी तरह अगर आप नए शेयर खरीदने के लिए लोन (आईपीओ फाइनेंसिंग) लेना चाहते हैं, तो पहले आपको ज्यादा से ज्यादा 10 लाख रुपए मिलते थे। इसे बढ़ाकर 25 लाख रुपए करने का प्रस्ताव है। आरबीआई गवर्नर ने टैरिफ से प्रभाव से बचने के लिए कई तरह प्रस्तावों की घोषणा भी की है।

विज्ञापन

आबीआई गवर्नर ने ऋण प्रवाह सुधार के लिए पांच उपायों की भी घोषणा की

इसमें सबसे पहला, उन्होंने बैंकों द्वारा पूंजी बाजार में ऋण के दायरे का विस्तार करने का प्रस्ताव रखा, जिसमें भारतीय बैंकों को भारतीय कॉपोरेट्स के जरिए अधिग्रहण के वित्तपोषण हेतु एक ढांचा उपलब्ध कराया जा सके।  आरबीआई ने उपभोक्ता संतृष्टि बढ़ाने के लिए तीन प्रस्ताव रखें है, जिसमें न्यूनतम शेष राशि पर शुल्क लगाए बिना बेसिक बचत बैंक जमा खाताधारकों को दी जाने वाली सेवाओं का विस्तार किया जाना प्रस्तावित है, जिमसें अन्य बातों के साथ डिजिटल बैंकिंग (मोबाइल और इंटरनेट) सेवाएं शामिल है। दूसरा, विनियमित संस्थाओं द्वारा शिकायत निवारण को प्रभावी बनाने और आंतरिक लोकपाल तंत्र को मजबूत करने का प्रस्ताव दिया है। तीसरा, शिकायत निवारण में सुधार के लिए आरबीआई लोकपाल योजना को भी संशोधित किया जा रहा है, चौथा, ग्रामीण सहकारी बैंकों को इस योजना के दायरे में शामिल किया जा रहा है। पांचवां , जोखिम -आधारित बीमा प्रीमियम शुरू करने का प्रस्ताव शामिल है।

विज्ञापन
विज्ञापन


देश की अर्थव्यवस्था में क्रेडिट के फ्लो को बढ़ावा देने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया यानी आरबीआई ने बड़ा फैसला लिया है। अब आप अपने शेयर को बैंक में गिरवी रखाकर पहले की तुलना में ज्यादा पैसा उधार ले सकते हैं। पहले यह लिमिट 20 लाख रुपए थी, जिसे बढ़ाकर अब 1 करोड़ रुपए कर दिया गया है। इसी तरह अगर आप नए शेयर खरीदने के लिए लोन (आईपीओ फाइनेंसिंग) लेना चाहते हैं, तो पहले आपको ज्यादा से ज्यादा 10 लाख रुपए मिलते थे। इसे बढ़ाकर 25 लाख रुपए करने का प्रस्ताव है।

बैंकों को मर्जर और अधिग्रहण फाइनेंसिंग की मंजूरी

आरबीआई ने एक बड़ा फैसला लिया है जिससे भारतीय बैंक अब देश की कंपनियों के विलय और अधिग्रहण यानी मर्जर और एक्विजिशन को फाइनेंस कर सकेंगे। इसका मतलब है कि अब बैंक कंपनियों को इस तरह के बड़े कारोबार के लिए पैसा देंगे। इससे बैंकिंग सिस्टम मजबूत होगा और डील फाइनेंसिंग निजी सोर्स की जगह बैंकों से होने लगेगी। यह बैंकिंग सेक्टर के लिए एक बहुत बड़ा सहारा माना जा रहा है।

बैंकों के लिए आरबीआई 1 अप्रैल 2027 से ईसीएल फ्रेमवर्क लागू करेगा

भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर ने भारतीय बैंकिंग प्रणाली को लचीलेपन को और मजबूत बनाने के लिए प्रमुख उपायों का खुलासा किया , इसमें ईसीएल ढांचे को सभी अनुसूचित  वाणिज्यक बैंकों के लिए लागू किया जाएगा, जो 1 अप्रैल 2027 से प्रभावी होगा। संशोधित बेसल 3 मानदंडों को 1 अप्रैल, 2027 से प्रभावी बनाने के लिए प्रस्ताव बैंकों और वित्तीय संस्थानों के लिए पूंजी पर्याप्त को मजबूत करना है। बैंक और उसकी समूह संस्थाओं द्वारा कि जाने वले व्यवसायों में ओवरलैप पर प्रस्तावित विनियामक प्रतिबंधों को हटाया जा रहा है साथ ही बैंकों द्वारा पूंजी बाजार ऋण को दायरे का विस्तार करना है। आरबीआई ने कर्मशियल बैंकों (एसएफबी, पीबीएस, और आरबीआई को छोड़कर) के लिए संशोधित बेसल 3 पूंजी पर्याप्तता मानदंडों को 1 अप्रैल प्रभावी बनाने प्रस्ताव दिया है। इसके लिए ऋण जोखिम लिए मानकीकृत मसौदा जल्द ही तैयार किया जाएगा। संशोधन के बाद कुछ क्षेत्रों पर प्रस्तावित कम जोखिम भार से संपूर्ण पूंजी आवश्यकताओं में कमी आने की उम्मीद है, विशेष रूप से एमएसएमई और आवसीय संपित्त के लिए।

भारतीय रुपये को अंतरराष्ट्रीयकरण के लिए तीन उपायों का प्रस्ताव

पहला व्यापारिक बैंकों को सीमा पार व्यापार लेनदेन के लिए भूटान, नेपाल और श्रीलंका के अनिवासियों को भारतीय रुपये में ऋण देने की अनुमति दी  जाए। दूसरा भारतीय रुपये पर आधारित लेनेदने को सुविधाजनक बनाने के लिए भारत के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों की मुद्राओं के लिए पारदर्शी संदर्भ दरे स्थापित करना, तीसरा एसआरवीए और कॉपोरेट बॉड और वाणिज्यक पत्रों में निवेश के लिए पात्र बनाकर इसके व्यापक उपयोग की अनुमति देना शामिल है।

 विदेशी मुद्रा प्रबंधन को सरल बनाने का प्रस्ताव

आरबीआई गवर्नर ने फेमा के तहत जारी ईसीबी नियमों में पात्र उधारकर्ताओं, मान्यता प्राप्त ऋणदाताओं, उधार सीमा, उधार लागत, अंतिम उपयोग और रिपोर्टिंग आदि से संबंधित प्रमुख प्रावधानों को युक्तिसंगत बनाने का प्रस्ताव दिया। गवर्नर ने भारत में अपनी कारोबारी उपस्थिति को स्थापित करने के वाले अनिवासी से संबंधित फेमा नियमों को भी युक्तिसंगत बनाने का प्रस्ताव रखा। भुटान, नेपाल और श्रीलंका में बसे अप्रवासियों के लिए नियमों को आसान बनाते है।

निर्यात क्षेत्रों को मजबूत करने के उपायोग का प्रस्ताव

आरबीआई गवर्नर ने वर्तमान समय में बदलते वैश्विक व्यापार माहौल में निर्यात क्षेत्र को मजबूत करने और व्यापार करने में आसानी बढ़ाने के लिए आरबीआई ने आईएफएससी में भारतीय निर्यातकों के विदेशी मुद्रा खाता में धन की वापसी की अवधि एक महीना बढ़ाकर तीन महीना करेगा। व्यापारिक लेद-देन के लिए विदेशी मुद्रा परिव्य की अवधि चार महीने से बढ़ाकर छह महीने करेंगे और संबंधित रिपोर्टिंग पोर्टल (ईडीपीएमएम और आईडीपीएमएस) में निर्यात और आयात से संबंधित बकाया प्रविष्टियों के समाधान की प्रक्रिया को सरल बनाने का प्रस्ताप दिया।

एनबीएफसी द्वारा बुनियादी ढांचे के वित्तपोषण की लागत को कम करने के उपाय

नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनियां (एनबीएफसी) के जरिए बुनियादी ढांचे के वित्तपोषण की लागत को कम करने के लिए आरबीआई ने परिचालन, उच्च गुणवत्ता वाली बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए एनबीएफसी के जरिए दिए ऋण पर लागू जोखिम भार को कम करने का प्रस्ताव दिया।

सूचीबद्ध ऋण प्रतिभूतियों पर प्रस्ताव

आरबीआई गवर्नर ने कहा कह सूचीबद्ध ऋण प्रतिभूतियों के खिलाफ ऋण देने पर नियामक सीमा हटाने और शेयरों के खिलाफ बैंकों द्वारा ऋण देने की सीमा को 20 लाख रुपये बढ़ाकर 1 करोड़ रुपये करने और आईपीओ वित्तपोषण के लिए प्रति व्यक्ति 10 लाख रुपये से 25 लाख रुपये करने का प्रस्ताव किया है।


विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें कारोबार समाचार और Union Budget से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। कारोबार जगत की अन्य खबरें जैसे पर्सनल फाइनेंस, लाइव प्रॉपर्टी न्यूज़, लेटेस्ट बैंकिंग बीमा इन हिंदी, ऑनलाइन मार्केट न्यूज़, लेटेस्ट कॉरपोरेट समाचार और बाज़ार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed