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आरबीआई एमपीसी की बैठक आज से: ब्याज दरें स्थिर रहने की उम्मीद, महंगाई और वृद्धि पर रहेगी पैनी नजर

Wed, 03 Jun 2026 10:51 AM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Wed, 03 Jun 2026 10:51 AM IST
सार

आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति की बैठक में ब्याज दरें स्थिर रहने की उम्मीद है। पश्चिम एशिया तनाव, कच्चे तेल की कीमतों और महंगाई के दबाव के बीच केंद्रीय बैंक के सतर्क रुख पर विशेषज्ञों की नजर है। आर्थिक वृद्धि और महंगाई के अनुमान भी चर्चा में रहेंगे।

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RBI MPC Meeting: Interest Rates Expected to Remain Stable, Focus on Inflation and Growth
भारतीय रिजर्व बैंक की एमपीसी बैठक। - फोटो : amarujala.com

विस्तार

भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की तीन दिवसीय बैठक बुधवार को शुरू हुई। इसके फैसलों का एलान भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा 5 जून को करेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण केंद्रीय बैंक इस बार ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा शुक्रवार को नीतिगत फैसलों की घोषणा करेंगे।

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यह समीक्षा पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच हो रही है। कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव से आर्थिक परिदृश्य जटिल हुआ है। अधिकांश अर्थशास्त्रियों को ब्याज दरें स्थिर रहने की उम्मीद है। हालांकि, वैश्विक चुनौतियों के कारण आरबीआई का बयान अधिक सतर्क हो सकता है।
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एचएसबीसी की प्रांजुल भंडारी के अनुसार, निकट भविष्य में दरें स्थिर रहेंगी, पर बाद में सख्ती संभव है। बाजार 2026 की चौथी तिमाही से दो बार दर कटौती की संभावना देख रहा है। भंडारी ने कहा कि आरबीआई के संशोधित आर्थिक अनुमानों पर विशेष ध्यान रहेगा। खासकर कच्चे तेल की औसत कीमत के अनुमान पर नजर रहेगी। एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज ने भी ब्याज दरों में यथास्थिति बनाए रखने का अनुमान जताया है। ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि ब्रेंट क्रूड की कीमतों में नरमी से आरबीआई को राहत मिली है।
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महंगाई का दबाव
केयरएज रेटिंग्स की रिपोर्ट बताती है कि कम मानसून और ईंधन की खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी से महंगाई बढ़ी है। थोक महंगाई का असर खुदरा महंगाई पर अपेक्षा से अधिक तेजी से पड़ सकता है। फिलहाल महंगाई आपूर्ति पक्ष के कारण बढ़ रही है, मांग बढ़ने से नहीं। यदि तेल की कीमतों का आधारभूत अनुमान बढ़ता है, तो महंगाई का अनुमान 4.6 प्रतिशत से बढ़कर करीब 5 प्रतिशत तक पहुंच सकता है।


आर्थिक वृद्धि के अनुमान
केयरएज रेटिंग्स ने वित्त वर्ष 2026-27 में सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर 6.7 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है। यह अनुमान 90 डॉलर प्रति बैरल कच्चे तेल की औसत कीमत पर आधारित है। यदि पश्चिम एशिया में संघर्ष बढ़ता है और तेल 110 डॉलर प्रति बैरल पहुंचता है, तो वृद्धि दर 6 प्रतिशत तक गिर सकती है। एसबीआई रिसर्च ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए वृद्धि दर 6.6 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 7.5 प्रतिशत रहने का अनुमान दिया है।

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