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RBI: क्या रिजर्व बैंक लगातार तीसरी बार ब्याज दरों में करेगा कटौती? वैश्विक चुनौतियों के बीच 6 जून को फैसला

Thu, 05 Jun 2025 08:21 PM IST
नविता स्वरूप बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: नविता स्वरूप Updated Thu, 05 Jun 2025 08:21 PM IST
सार

RBI: आरबीआई ने फरवरी में मौद्रिक ढील का चक्र शुरू किया और अप्रैल में एक और नीतिगत दर में कटौती की। वर्तमान में ब्याज दर 6 प्रतिशत है। अब बाजार के विशेषज्ञ और प्रतिभागी संभावित तीसरी दर कटौती की उम्मीद कर रहे हैं। 6 जून को इसपर फैसले का एलान होना है। जानकारों की क्या राय है, आइए जानते हैं। 

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RBI may cut interest rates for the third time on June 6 to boost India's growth amid global tensions
आरबीआई की एमपीसी बैठक - फोटो : amarujala.com

विस्तार

क्या भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई ) की ओर से 6 जून 2025 को रेपो रेट में एक और बड़ी कटौती की संभावना है? अगर ऐसा होता है तो इससे जहां आम लोगों को फायदा होगा वहीं लोन की मांग में भी तेजी आएगी। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय एमपीसी ने अप्रैल में अपने नीतिगत रुख को तटस्थ से बदलकर उदार करने का निर्णय लिया था। इससे बैंकों को भी कर्ज बांटने में मदद मिली और बैंकों ने भी होम लोन की ब्याज दरों में कटौती की कम ही सही पर घोषणाएं की। 

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वर्तमान में रेपो रेट 6 प्रतिशत पर

आरबीआई ने फरवरी में मौद्रिक ढील का चक्र शुरू किया था अप्रैल में एक और नीतिगत दर में कटौती की थी। वर्तमान में ब्याज दर 6 प्रतिशत है। अब बाजार के विशेषज्ञ और प्रतिभागी संभावित तीसरी दर कटौती की उम्मीद कर रहे हैं,  वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के बीच भारत के विकास को बढ़ाने के लिए आरबीआई 6 जून को तीसरी बार ब्याज दरों में कटौती कर सकता है।

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महंगाई में कमी के बीच हो रही मौद्रिक नीति समिति की बैठक

केयरएज रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री रजनी सिन्हा के अनुसार, जून में होने वाली मौद्रिक नीति की बैठक मुद्रास्फीति में उल्लेखनीय कमी के बीच हो रही है। हालांकि, वैश्विक परिस्थितियों की वजह से घरेलू विकास की संभावनाओं पर दबाव बना रहेगा। आरबीआई ने फरवरी 2025 से 50 आधार अंक की रेपो दर से कटौती की है। आरबीआई ने अपने आक्रामक तरलता सहज उपायों के माध्यम से प्रभावित रूप से 75 आधार अंक की कमी की है। हमें उम्मीद है कि एमपीसी इस विकास की गति में चल रही रिकवरी का समर्थन करने पर अपना ध्यान केंद्रित रखेगी। इसलिए जून की इस बैठक में रेपो दर में 25 आधार अंक की कटौती की उम्मीद है।

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प्रतिकूल वैश्विक परिस्थितियों के बीच विकास को प्राथमिकता मिलने की उम्मीद

उनका कहना है, मुद्रास्फीति में गिरावट आरबीआई को प्रतिकूल वैश्विक परिस्थितियों के बीच विकास को प्राथमिकता देने की सुविधा देगी। हालांकि विकास की गति सुधार हुआ है, लेकिन असमान उपभोक्ता मांग, निजी पूंजीगत व्यय में वृद्धि और धीमी विनिर्माण गति जैसी चुनौतियां भी आरबीआई के सामने बनी हुई हैं। हमें उम्मीद है कि आरबीआई वित्त वर्ष 2026 में नीतिगत दर में 50 आधार अंकों की कटौती करेगा (जून में 25 आधार अंक कटौती सहित) अगर विकास दर में गिरावट आती है तो दरों में कटौती का चक्र शुरू होने की संभावना है।

RBI may cut interest rates for the third time on June 6 to boost India's growth amid global tensions
भारतीय रिजर्व बैंक - फोटो : एएनआई (फाइल)

6 जून को रेपो रेट में 25 आधार अंकों की कटौती होने की उम्मीद

बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस कहते हैं, हमारा मानना है कि मुद्रास्फीति में कमी और आरबीआई के विभिन्न उपायों की वजह से तरलता की स्थिति को बहुत सजह बना दिया है। एमपीसी 6 जून को रेपो दर में 25 आधार अंक की कटौती करेगी। विकास और मुद्रास्फीति दोनों पर टिप्पणी महत्वपूर्ण होगी क्योंकि दोनों के मापदंडों के लिए उनके पूर्वानुमानों में संशोधन की उम्मीद है।

आरबीआई ने फरवरी में शुरू किया मौद्रिक नीति में ढील देने का सिलसिला

बजाज ब्रोकिंग के अनुमान के अनुसार, आरबीआई ने फरवरी में मौद्रिक नीति में ढील देने का चक्र शुरू किया और अप्रैल में नीतिगत दर में एक और कटौती की। वर्तमान में ब्याज दर 6 प्रतिशत है। अब बाजार के विशेषज्ञ और प्रतिभागी संभावित तीसरी दर कटौती की उम्मीद कर रहे हैं, क्योंकि वैश्विक स्तर पर आर्थिक स्थितियों के बिगड़ने के बीच घरेलू विकास को बढ़ावा देने के लिए आरबीआई के मौद्रिक समर्थन की उम्मीदें बढ़ रही है।  सीपीआई मुद्रास्फीति आरबीआई के मध्यम अवधिक के लक्ष्य से 4 प्रतिशत से लगातार नीचे बनी हुई है। वहीं दूसरी ओर हाल ही में अमेरिकी नीतिगत कदमों से व्यापार व्यवधान जैसे बाहरी झटकों की वजह से जीडीपी की वृद्धि में नरमी दिख रही है। कई रेटिंग एजेंसियों और वैश्विक संस्थाअनों ने वित्त वर्ष 2026 के लिए भारत के जीडीपी विकास अनुमानों को घटा दिया है। हालांकि आरबीआई ने अप्रैल में अपने 6.5 प्रतिशत के विकास अनुमान को बनाए रखा है।

महंगाई में नरमी आने से रेट में कटौती की उम्मीद बढ़ी

ब्रोकरेज फर्म का मानना है कि, एमपीसी ने स्पष्ट रूप से तटस्थ से उदार रुख अपनाया है, जो आरबीआई के तरलता को बैंकिंग प्रणाली में इंजेक्ट करने और विकास का समर्थन करने के इरादे को दर्शाता है। अप्रैल की सीपीआई मुद्रास्फीति के 3.2 प्रतिशत तक कम होने से यह बदलाव और मजबूत हुआ है, जो जुलाई 2019 के बाद से सबसे कम है और आरबीआई के कंफर्ट जोन के भीतर है। ब्रोकरेज फर्म के अनुसार मुद्रास्फीति स्थिर रहने, विकास की गति धीमी पड़ने की आशंका और वैश्विक अस्थितरता के बने रहने के डर की वजह से एक और दर कटौती की संभावना है। जबकि अंतिम फैसला वैश्विक परिस्थितियों, पर निर्भर करेगा। भारत के विकास को बनाए रखने में मदद करने के लिए तीसरी दर कटौती की संभावना के बारे में बाजार की आम सहमति काफी मजबूत हो रही है।

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