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2020-21 में नकारात्मक रह सकती है GDP वृद्धि दर, मुद्रास्फीति के अनुमान अनिश्चित: RBI गवर्नर
Fri, 22 May 2020 01:55 PM IST
डिंपल अलवधी
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: डिंपल अलवधी
Updated Fri, 22 May 2020 01:55 PM IST
सार
- आर्थिक गतिविधियां बाधित होने से भारत की जीडीपी वृद्धि वित्त वर्ष 2020-21 में नकारात्मक रहेगी।
- मुद्रास्फीति का दृष्टिकोण बेहद अनिश्चित है।
- कीमतों में नरमी लाने के लिए आयात शुल्क की समीक्षा करने की जरूरत है।
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अर्थव्यवस्था (फाइल फोटो)
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विस्तार
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को कहा कि कोरोना वायरस के प्रकोप के चलते आर्थिक गतिविधियां बाधित होने से भारत की जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) वृद्धि वित्त वर्ष 2020-21 में नकारात्मक रहेगी। साथ ही उन्होंने कहा कि मुद्रास्फीति का दृष्टिकोण बेहद अनिश्चित है और दालों की बढ़ी कीमतें चिंता का विषय है।
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आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था मंदी की ओर बढ़ रही है और मुद्रास्फीति के अनुमान बेहद अनिश्चित हैं। उन्होंने कहा, 'दो महीनों के लॉकडाउन से घरेलू आर्थिक गतिविधि बुरी तरह प्रभावित हुई है।' साथ ही उन्होंने जोड़ा कि शीर्ष छह औद्योगिक राज्य, जिनका भारत के औद्योगिक उत्पादन में 60 फीसदी योगदान है।
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मांग में गिरावट के संकेत
उन्होंने कहा कि मांग में गिरावट के संकेत मिल रहे हैं और बिजली तथा पेट्रोलियम उत्पादों की मांग घटी है। गवर्नर ने कहा कि सबसे अधिक झटका निजी खपत में लगा है, जिसकी घरेलू मांग में 60 फीसदी हिस्सेदारी है। दास ने कहा कि मांग में कमी और आपूर्ति में व्यवधान के चलते चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में आर्थिक गतिविधियां प्रभावित होंगी।
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2020-21 की दूसरी छमाही में सुधार की उम्मीद
उन्होंने कहा कि 2020-21 की दूसरी छमाही में आर्थिक गतिविधियों में कुछ सुधार की उम्मीद है। उन्होंने कहा, '2020-21 में जीडीपी वृद्धि के नकारात्मक रहने का अनुमान है, हालांकि 2020-21 की दूसरी छमाही में कुछ तेजी आएगी।'
आयात शुल्क की समीक्षा करने की जरूरत
कीमतों में नरमी लाने के लिए आयात शुल्क की समीक्षा करने की जरूरत है। उनके मुताबिक चालू वित्त वर्ष की तीसरी या चौथी तिमाही में मु्द्रास्फीति की दर चार फीसदी से नीचे आ सकती है। इसके अलावा दास ने कहा कि महामारी के बीच आर्थिक गतिविधियों के प्रभावित होने से सरकार का राजस्व बहुत अधिक प्रभावित हुआ है।