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Railway: रेल पहिया की फैक्टरी स्थापित करने के लिए तीन कंपनियों ने लगाई बोली, हर साल 80 हजार पहिये बनेंगे
Wed, 15 Mar 2023 05:30 PM IST
कुमार विवेक
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कुमार विवेक
Updated Wed, 15 Mar 2023 05:30 PM IST
सार
Railway: वर्तमान में सेल 1,87,000 रुपये प्रति टन की औसत दर से पहियों की आपूर्ति करती है। सेल की मौजूदा घरेलू क्षमता 40,000 पहियों की है और वहीं आरआईएनएल की उत्पाद क्षमता 80,000 पहियों की है। हालांकि आरआईएनएल (रेल इस्पात निगम लिमिटेड) की ओर से अभी तक नियमित वाणिज्यिक उत्पादन शुरू नहीं किया गया है। इन दोनों को मिलाकर कुल उत्पादन क्षमता 1,20,000 पहियों का निर्माण हो रहा है।
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- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एसएआई) समेत तीन कंपनियों ने एक रेल पहिया विनिर्माण संयंत्र स्थापित करने के लिए बोली लगाई है। ये संयंत्र अगले 20 साल तक रेलवे को प्रतिवर्ष विभिन्न प्रकार के 80,000 पहियों की आपूर्ति करेगा।
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रेलवे ने बुधवार को जारी एक बयान में कहा कि इस सुविधा की स्थापना में रुचि दिखाने वाली दो अन्य कंपनियां पुणे की भारत फोर्ज और कोलकाता की रामकृष्ण फोर्जिंग हैं।
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भारतीय रेलवे ने आयात पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए देश में अगले 20 वर्षों के लिए हर साल 80,000 पहियों के वार्षिक उठाव की क्षमता वाले एक पहिया विनिर्माण संयंत्र स्थापित करने के लिए निविदा जारी कर बोलियां आमंत्रित की थीं।
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रेलवे ने अपनी इस कवायदत को एक महत्वपूर्ण मेक-इन-इंडिया पहल बताते हुए कहा, 'बोली प्रक्रिया बहुत पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी थी। निविदा 24 जनवरी, 2023 को खोली गई थी। इसमें रामकृष्ण फोर्जिंग सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी के रूप में उभरी है, उसके बाद भारत फोर्ज और सेल का स्थान है।'
वर्तमान में सेल 1,87,000 रुपये प्रति टन की औसत दर से पहियों की आपूर्ति करती है। सेल की मौजूदा घरेलू क्षमता 40,000 पहियों की है और वहीं आरआईएनएल की उत्पाद क्षमता 80,000 पहियों की है। हालांकि आरआईएनएल (रेल इस्पात निगम लिमिटेड) की ओर से अभी तक नियमित वाणिज्यिक उत्पादन शुरू नहीं किया गया है। इन दोनों को मिलाकर कुल उत्पादन क्षमता 1,20,000 पहियों का निर्माण हो रहा है।
रेलवे 1960 के दशक से ब्रिटेन, चेक गणराज्य, ब्राजील, रोमानिया, जापान, चीन, यूक्रेन और रूस से लोकोमोटिव और कोचिंग स्टॉक (एलएचबी) के लिए आवश्यक विभिन्न प्रकार के रेल पहियों का आयात कर रहा है।
इस साल (2022-23) में चीन और रूस से लगभग 520 करोड़ रुपये के 80,000 पहियों का आयात किया गया जबकि शेष 80,000 पहिलए सेल से लिए गए। रूस-यूक्रेन के बीच चल रहे संघर्ष के कारण पहियों की सभी आयात आवश्यकताओं को चीन से पूरा किया जा रहा है।
रेलवे में अधिक हाई स्पीड ट्रेनों के शामिल होने के कारण 2026 तक पहियों की आवश्यकता दो लाख लाख तक बढ़ने का अनुमान है।