अगर इन सरकारी या निजी बैंकों में है आपका खाता, तो जानिए कैसी है उसकी परफॉरमेंस!
सरकारी और निजी क्षेत्र के बैंकों ने वित्तीय वर्ष 2017-18 और 2018-19 के दौरान क्रमश: 267575 करोड़ रुपये और 278344 करोड़ रुपये का लाभ दर्ज किया। सरकार ने इन वर्षों में एनपीए व अन्य इमरजेंसी के लिए कई तरह के समग्र प्रावधान किए...
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देश के बैंकिंग सिस्टम में सरकारी क्षेत्र के बैंकों को प्राइवेट बैंकों से तगड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। पिछले तीन वर्षों का लेखा-जोखा देखें तो सरकारी बैंकों के मुकाबले प्राइवेट क्षेत्र के बैंकों का प्रदर्शन बेहतर स्थिति में रहा है। एसबीआई और पीएनबी जैसे बड़े बैंकों में थोड़ी सुस्ती देखने को मिली, लेकिन उन्होंने जल्द ही खुद को एक मजबूत स्थिति में खड़ा कर लिया। दूसरी तरफ एचडीएफसी, आईसीआईसीआई, फेडरल बैंक, इंडियन बैंक, इंडसइंड बैंक, कर्नाटक बैंक, करुर वैश्य बैंक और कोटक महिंद्रा आदि बैंकों का शुद्ध लाभ अधिक रहा है।
दूसरी ओर बैंकों की सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए), तुलनात्मक परिदृश्य के अंतर्गत चालू वित्त वर्ष के अंत तक बढ़ कर 12.5 फीसदी होने का अनुमान है। मार्च 2020 में एनपीए 8.5 फीसदी था। रिजर्व बैंक की वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट के मुताबिक, अगर अर्थव्यवस्था को गंभीर दबाव वाले परिदृश्य से गुजरना पड़ा, तो मार्च 2021 तक एनपीए 14.7 फीसदी तक पहुंच सकता है।
वैश्विक परिचालन के संबंध में आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, सरकारी क्षेत्र के बैंकों का सकल अग्रिम 31 मार्च 2008 को 2344919 करोड़ रुपये था। इसके बाद 31 मार्च 2014 को यह सकल अग्रिम बढ़कर 6576172 करोड़ रुपये हो गया। दबाव ग्रस्त संपत्तियों में अचानक वृद्धि के कारण आक्रामक उधार पद्धति, इरादतन चूक, ऋण में धोखाधड़ी, कुछ मामलों में भ्रष्टाचार और आर्थिक मंदी रहे हैं।
परिशुद्ध एवं प्रावधानिकृत तुलनात्मक पत्र के लिए वर्ष 2015 में संपत्ति गुणवत्ता समीक्षा के जरिए एनपीए संपत्तियों की वृद्धि का पता चला था। इसके बाद बैंकों ने संपत्ति गुणवत्ता समीक्षा रिपोर्ट पर काम करना शुरू किया। इसके अंतर्गत बैंकों ने अपने दबावग्रस्त ऋणों वाले खातों को दोबारा से वर्गीकृत किया। कई ऐसे लचीले प्रावधान देखने को मिले, जो पहले बैंकिंग सेक्टर में मौजूद नहीं रहे थे।
दबावग्रस्त ऋणों वाली पुनर्संरचना संबंधी ऐसी सभी योजनाओं को वापस ले लिया गया था। इसके परिणामस्वरुप, सरकारी और निजी क्षेत्र के बैंकों ने वित्तीय वर्ष 2017-18 और 2018-19 के दौरान क्रमश: 267575 करोड़ रुपये और 278344 करोड़ रुपये का लाभ दर्ज किया। सरकार ने इन वर्षों में गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) व अन्य इमरजेंसी के लिए कई तरह के समग्र प्रावधान किए। इसके परिणामस्वरुप 2017-18 में 43587 करोड़ रुपये और 2018 19 में 39015 करोड़ रुपये की हानि हुई।
वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले संसद सत्र के दौरान एक सवाल के जवाब में कहा था कि पुराने एनपीए की पहचान किए जाने, बैंकों की वित्तीय स्थिति में सुधार लाने के लिए समाधान करने, सुधार एवं पीएसबी के पुनर्पूंजीकरण के माध्यम से सरकार द्वारा किए गए व्यापक उपायों के परिणास्वरुप गत वित्तीय वर्ष के प्रथम 9 माह में सरकारी और निजी क्षेत्र के बैंकों ने 21673 करोड़ रुपये का समग्र लाभ कमाया है।
इसके अलावा सरकारी एवं निजी क्षेत्र के बैंकों का सकल एनपीए 31 मार्च 2018 को उच्चतम स्तर पर पहुंचने के बाद तथा उससे अगले वित्तीय वर्ष में 268012 करोड़ रुपये की रिकार्ड वसूली किए जाने के कारण 2018 के वित्तीय वर्ष की तीन तिमाही में दिसंबर 2019 तक एनपीए 89572 करोड़ रुपये कम हो गया।

इस तरह से होगा बैंकों की वित्तीय हालत में सुधार
वित्तमंत्री के अनुसार, ऋण के तौर तरीकों में बदलाव होने से ऋणदाता और कर्जदार के संबंधों में मौलिक बदलाव, चूककर्ता कंपनी के प्रवर्तकों और स्वामियों से कंपनी का नियंत्रण छीन लेना आदि कदम उठाए गए हैं। वित्तीय संपत्तियों से संबंधित छह नए डीआरटी स्थापित किए गए हैं। जोखिम की गणना के लिए प्रौद्योगिकी तथा डाटा संचालित प्रणाली सृजित की गई है।
ऋणों का जोखिम आधारित मूल्याकंन शुरू किया गया है। ऑनलाइन एकबारगी निपटान प्लेटफार्म तैयार करना और विशेष निगरानी एजेंसियों के जरिए बड़े मूल्यों वाले खातों की निगरानी कर पीएसबी में वसूली संबंधी प्रक्रिया में सुधार लाया गया। राष्ट्रीय वित्तीय प्राधिकरण की स्थापना स्वतंत्र विनियामक के रूप में की गई है।
बैंकिंग धोखाधड़ी रोकने के लिए किए गए उपाय
सरकार ने बैंकिंग धोखाधड़ी रोकने के लिए कई तरह के उपाय किए हैं। इनमें सरकार की तरफ से सभी पीएसबी को बड़े मूल्यों वाली बैंक धोखाधड़ी की पहचान समय पर करने, इसकी रिपोर्टिंग व जांच आदि के लिए ढांचा तैयार करना शामिल है। इसके अलावा भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम 2018 को अधिनियमित करना, 3.38 लाख नॉन ऑपरेटिंग कंपनियों के बैंक खातों के ऑपरेशन पर रोक लगाई गई है।
लुकआउट सर्कुलर जारी करने के लिए पीएसबी को शक्तियां प्रदान करना, केंद्रीय धोखाधड़ी रजिस्ट्री की स्थापना, 3515 मामलों में एफआईआर, 9967 मामलों में वसूली संबंधी मुकदमा दायर करना व 7895 मामलों में वित्तीय संपत्तियों का प्रतिभूतिकरण और पुनर्गठन तथा प्रतिभूति हित का प्रवर्तन अधिनियम 2002 के उपबंधों के अंतर्गत कार्रवाई करना शामिल है।