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पीएम मुद्रा योजना: महिलाओं-पिछड़े वर्गों की बदली जिंदगी; 52 करोड़ खाते खुले, 27.5 लाख करोड़ बैंकों ने दिए कर्ज

Thu, 03 Apr 2025 06:13 AM IST
निर्मल कांत अजीत सिंह, नई दिल्ली।
अजीत सिंह, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Thu, 03 Apr 2025 06:13 AM IST
सार

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई) ने महिलाओं और पिछड़े वर्गों की जिंदगी बदली। अब तक 52 करोड़ खाते खुले और 27.5 लाख करोड़ रुपये का कर्ज वितरित हुआ। बिहार में सबसे अधिक 4.2 करोड़ महिलाओं के खाते खोले गए हैं।

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प्रधानमंत्री मुद्रा योजना - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सरकार की ओर से 2016 में शुरू किए गए प्रधानमंत्री मुद्रा योजना यानी पीएमएमवाई ने पिछले एक दशक में महिलाओं और पिछड़े वर्गों की जिंदगी बदल दी है। इसके तहत अब तक कुल 52 करोड़ से अधिक बैंक खाते खुले हैं। बैंकों ने इनको 27.5 लाख करोड़ रुपये का कर्ज दिया है।

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एसबीआई की बुधवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार, सूक्ष्म, छोटे और मझोले उद्योगों (एमएसएमई) में कृषि और उससे संबंधित गतिविधियों को छोड़कर मुद्रा के तहत कर्ज दिया जाता है। वित्त वर्ष 2014 में इस क्षेत्र को कुल 8.5 लाख करोड़ रुपये कर्ज दिया गया, जो 2023-24 में तीन गुना बढ़कर 27.5 लाख करोड़ को पार कर गया। 2024-25 में यह 30 लाख करोड़ को पार कर सकता है।
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रिपोर्ट के अनुसार, अब तक 52 करोड़ खाते खुले हैं। इसमें से 40 करोड़ यानी 78 फीसदी खाते शिशु कैटेगरी के हैं। 10 करोड़ यानी 20 फीसदी किशोर के और दो करोड़ यानी दो फीसदी तरुण के हैं। कुल खातों में शिशु का हिस्सा 2024-25 में कम होकर 51.7 फीसदी हो गया, जो 2025-26 में 93 फीसदी था। किशोर का हिस्सा 5.9 फीसदी से बढ़कर 44.7 फीसदी पर पहुंच गया है। इसका मतलब यह कि जिन लोगों ने शिशु के तहत कर्ज लिया वे अब किशोर की श्रेणी में आ गए हैं।
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कर्ज का औसत आकार 1.02 लाख रुपये
रिपोर्ट बताती है कि 2015-16 में कर्ज का औसत आकार 38,000 रुपये था। अब यह 1.02 लाख रुपये हो गया है। 51 करोड़ खातों में से आधे खाते सामान्य श्रेणी वालों के हैं। कुल खातों में महिला उद्यमी का हिस्सा 68 फीसदी है। 11 फीसदी अल्पसंख्यकों के हैं। वित्त वर्ष 2016 से अब तक के 9 वर्षों में प्रति महिलाओं को वितरित रकम सालाना 13 फीसदी चक्रवृद्धि दर से बढ़कर 62,679 रुपये हो गई है। इसी दौरान जमा की रकम 14 फीसदी बढ़कर 95,269 रुपये हो गई है।

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जमीनी स्तर पर महिलाओं को संबल
रिपोर्ट बताती है कि इन आंकड़ों का असर सीधे जमीनी स्तर पर महिलाओं को आर्थिक संबल देने में दिख रहा है। उदाहरण के तौर पर 2020 में शुरू किए गए उद्यम पोर्टल पर महिलाओं का हिस्सा कुल पंजीकृत एमएसएमई में 20.5 फीसदी हो गया है।


कुल खातों में ओबीसी का हिस्सा 28 फीसदी...
कुल खातों में 28 फीसदी हिस्सा ओबीसी यानी अन्य पिछड़ी जातियों का है। एसटी यानी अनुसूचित जनजाति का हिस्सा 6 फीसदी और एससी (अनुसूचित जाति) का हिस्सा 16 फीसदी है।

सबसे ज्यादा महिला खाता बिहार में...
बिहार में सबसे अधिक 4.2 करोड़ महिला खाते हैं। तमिलनाडु में चार करोड़, पश्चिम बंगाल में 3.7 करोड़, कर्नाटक में 3.4 करोड़, महाराष्ट्र में 3.3 करोड़ और उत्तर प्रदेस में तीन करोड़ खाते हैं।


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