फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Business ›   Business Diary ›   India's Oil Import Strategy Shifts: Venezuela Becomes Fourth Largest Supplier Amidst Geopolitical Tensions

Oil Import: पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच भारत की नई तेल रणनीति, वेनेजुएला बना चौथा सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता

Thu, 20 Aug 2026 04:47 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Thu, 20 Aug 2026 04:47 PM IST
सार

भारत ने पश्चिम एशिया संघर्ष और होर्मुज संकट के बीच कच्चे तेल की आपूर्ति में विविधता बढ़ाई है। अगस्त में वेनेजुएला भारत का चौथा सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बन गया, जबकि रूस शीर्ष पर है। जानें भारत की नई ऊर्जा रणनीति और चुनौतियां।

विज्ञापन
India's Oil Import Strategy Shifts: Venezuela Becomes Fourth Largest Supplier Amidst Geopolitical Tensions
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : @अमर उजाला

विस्तार

पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य में संकट के कारण भारत ने कच्चे तेल की आपूर्ति में विविधता लानी शुरू कर दी है। अगस्त में वेनेजुएला से भारत का कच्चे तेल का आयात बढ़कर करीब 4.44 लाख बैरल प्रतिदिन हो गया। इसके साथ ही वेनेजुएला भारत का चौथा सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बन गया है। रूस अभी भी भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बना हुआ है।

विज्ञापन


अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका है। इस स्थिति से बचने के लिए भारत ने लैटिन अमेरिका से कच्चे तेल की खरीद बढ़ाई है। शिप-ट्रैकिंग फर्म केप्लर के अनुसार, अगस्त में वेनेजुएला से आयात में तेज उछाल देखा गया। इस दौरान वेनेजुएला से भारत को मिलने वाली आपूर्ति इराक और अमेरिका से भी अधिक रही। इराक से 118,000 बैरल प्रतिदिन और अमेरिका से 1,53,000 बैरल प्रतिदिन कच्चे तेल का आयात हुआ। भारत ने अप्रैल में वेनेजुएला से आयात दोबारा शुरू किया था। भारतीय रिफाइनरों ने वहां से खरीद में वृद्धि की है। वेनेजुएला के साथ ही भारत ने ब्राजील और अफ्रीका से भी कच्चे तेल की खरीद बढ़ाई है।
विज्ञापन


भारत कच्चे तेल की खरीद में विविधता क्यों ला रहा है?
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता देश है। इसकी अर्थव्यवस्था में कच्चे तेल की अहम भूमिका है। रिफाइनरियां कच्चे तेल को पेट्रोल और डीजल जैसे ईंधनों में बदलती हैं। किसी एक क्षेत्र या आपूर्तिकर्ता पर अत्यधिक निर्भरता ऊर्जा सुरक्षा के लिए जोखिम बढ़ा सकती है। इसलिए भारतीय रिफाइनर अब पश्चिम मध्य पूर्व, रूस और अटलांटिक बेसिन से आने वाले कच्चे तेल के बीच संतुलन बना रहे हैं। यह रणनीति आपूर्ति में संभावित व्यवधानों से बचाव प्रदान करती है।
विज्ञापन
विज्ञापन


तेल की जरूरत पूरी करने के लिए भारत क्या कर रहा है?
केप्लर के सीनियर मैनेजर (मॉडलिंग) सुमित रितौलिया ने बताया कि भारत कई दिशाओं में काम कर रहा है। इसमें देश में तेल का उत्पादन बढ़ाना शामिल है। भारत दूसरे देशों से भी तेल खरीद रहा है। तेल लाने के लिए नए रास्ते और साधन तैयार किए जा रहे हैं। तेल का भंडार बढ़ाना भी एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके अतिरिक्त, गैस, जैव ईंधन, इलेक्ट्रिक वाहन और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे विकल्पों को तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है।


क्या वेनेजुएला पर निर्भरता आसान है?
भारत के लिए आपूर्ति में विविधता लाना आवश्यक है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं कि वह पश्चिम एशिया के तेल से पूरी तरह दूरी बना सकता है। खाड़ी के देश भारत के काफी करीब हैं। इससे वहां से कच्चे तेल को लाने में समय और परिवहन लागत कम रहती है। वेनेजुएला, अमेरिका, पश्चिमी अफ्रीका और लैटिन अमेरिका से लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। लंबे समुद्री रास्तों से माल भाड़ा और बीमा लागत बढ़ सकती है। इसका असर भारत के कुल तेल आयात बिल पर पड़ सकता है।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें कारोबार समाचार और Union Budget से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। कारोबार जगत की अन्य खबरें जैसे पर्सनल फाइनेंस, लाइव प्रॉपर्टी न्यूज़, लेटेस्ट बैंकिंग बीमा इन हिंदी, ऑनलाइन मार्केट न्यूज़, लेटेस्ट कॉरपोरेट समाचार और बाज़ार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed