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Hindi News ›   Business ›   Business Diary ›   Petrol and diesel prices will again be on fire There is no chance of reduction in crude oil prices in the international market Latest Update

Petrol-Diesel Price: पेट्रोल-डीजल कीमतों में फिर लगेगी आग! अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल कीमतों में कमी के आसार नहीं

Sun, 22 May 2022 07:56 PM IST
अमित शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमित शर्मा Updated Sun, 22 May 2022 07:56 PM IST
सार

तेल कीमतों में अप्रत्याशित बढ़ोतरी का असर अमेरिका-यूरोप सहित पूरी दुनिया पर पड़ रहा है। क्रूड की कीमतों में भारी बढ़ोतरी के कारण पूरी दुनिया में महंगाई बढ़ रही है। इससे अमेरिका, यूरोप पर गंभीर असर पड़ रहा है तो अफ्रीकी-एशियाई देश भारी संकटों का सामना कर रहे हैं। यही कारण है कि क्रूड ऑयल की कीमतों में कमी लाने की चौतरफा कोशिशें हो रही हैं।

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Petrol and diesel prices will again be on fire There is no chance of reduction in crude oil prices in the international market Latest Update
कच्चा तेल - फोटो : pixabay

विस्तार

पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी घटाकर केंद्र सरकार ने इनकी कीमतों पर लगाम लगाने की कोशिश की है। इससे देश के कुछ हिस्सों को छोड़कर ज्यादार जगहों पर पेट्रोल-डीजल की कीमतें 100 रुपये प्रति लीटर से नीचे आ गई हैं, लेकिन यह राहत अस्थाई साबित हो सकती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल इस समय लगभग 113 डॉलर प्रति बैरल बिक रहा है। रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण इस कीमत में कमी आने की फिलहाल कोई संभावना भी दिखाई नहीं पड़ रही है और इन कीमतों में आगे भी बढ़ोतरी जारी रह सकती है। लिहाजा माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में दुबारा बढ़ोतरी हो सकती है। 

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तीन महीने से ज्यादा समय बीतने के बाद भी अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि रूस-यूक्रेन युद्ध आगे किस दिशा में जाएगा। यूक्रेन को पश्चिमी देशों की मदद से ताकत मिल रही है तो रूस ने अमेरिकी-यूरोपीय प्रतिबंधों का सामना करने में काफी हद तक सफलता पा ली है। चीन ने पेट्रोल-डीजल के मामले में रणनीतिक रिजर्व बनाए रखने के लिए रूस से भारी मात्रा में तेल आयात करने का निर्णय किया है। इससे रूस को न केवल राजनीतिक समर्थन मिला है, बल्कि उसे वित्तीय मजबूती मिलने की संभावना भी बढ़ गई है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इसका सीधा असर रूस-यूक्रेन युद्ध और इसके कारण क्रूड के दामों पर पड़ सकता है। 
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रूबल में लेनदेन को मजबूर हुए देश
रूस ने डॉलर कीमतों पर निर्भरता घटाने के लिए अपने तेल-गैस निर्यात के लिए रूबल में लेन-देन शुरू करने की बाध्यता यूरोपीय देशों और अन्य खरीदारों पर डाली थी। शुरूआती दौर में यूरोप रूस के इस दबाव के सामने झुकने को तैयार नहीं था। रूस पर ऊर्जा की निर्भरता खत्म करने के लिए यूरोपीय देशों ने 200 बिलियन डॉलर के रिजर्व से ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। 
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इस कदम का असर सामने आने में लंबा समय लग सकता है। इस बीच ऊर्जा जरूरतों के लिए यूरोपीय देशों को रूस पर निर्भर रहना पड़ सकता है। अमेरिका सहित रूस विरोधी देशों के लिए बुरी खबर है कि रूस से तेल आयात करने वाले लगभग आधा देशों ने रूबल में लेन-देन पर सहमति दे दी है। इससे रूस की आर्थिक स्थिति और ज्यादा मजबूत होगी। डॉलर पर निर्भरता घटने से भी रूस की स्थिति मजबूत होगी।

ऊर्जा विशेषज्ञ मानते हैं कि इन सभी कारणों से रूस को आर्थिक मजबूती मिलेगी और वह युद्ध को लगातार जारी रखने के लिए प्रेरित हो सकता है। इस कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल कीमतों पर लगातार दबाव बना रहेगा और इस कारण पूरी दुनिया में तेल कीमतों में महंगाई का संकट बरकरार रहेगा।  

तेल कीमतों में लगाम लगाने की कोशिश
तेल कीमतों में अप्रत्याशित बढ़ोतरी का असर अमेरिका-यूरोप सहित पूरी दुनिया पर पड़ रहा है। क्रूड की कीमतों में भारी बढ़ोतरी के कारण पूरी दुनिया में महंगाई बढ़ रही है। इससे अमेरिका, यूरोप पर गंभीर असर पड़ रहा है तो अफ्रीकी-एशियाई देश भारी संकटों का सामना कर रहे हैं। यही कारण है कि क्रूड ऑयल की कीमतों में कमी लाने की चौतरफा कोशिशें हो रही हैं।

अमेरिका ने इसी दृष्टि से वेनेजुएला पर लगाए गए प्रतिबंधों में ढील देने का फैसला किया है जिससे तेल निर्यात में बढ़ावा लाकर कीमतों पर लगाम लगाई जा सके। ओपेक से भी तेल उत्पादन बढ़ाने की अपील की जा रही है जिससे तेल कीमतों को काबू में रखा जा सके। अमेरिका अपना तेल रिजर्व भी खोलने पर विचार कर चुका है। वह आगे भी ऐसा कर सकता है।  


यूएई बढ़ाएगा गैस उत्पादन
गैस कीमतों के मामले में अच्छी खबर संयुक्त अरब अमीरात की ओर से भी आ रही है जो अपना नेचुरल गैस उत्पादन बढ़ाकर लगभग दो गुना करने पर गंभीरता से विचार कर रहा है। यूएई की राष्ट्रीय तेल कंपनी एडनॉक (ADNOC) ने घोषणा की है कि वह अपना गैस उत्पादन बढ़ाकर 5.8 मिलियन टन प्रति वर्ष से बढ़ाकर 9.6 मिलियन टन प्रति वर्ष करने पर विचार कर रहा है। 2027 तक इस निर्णय को पूरा कर लिया जाएगा। स्पष्ट है कि अंतरराष्ट्रीय गैस कीमतों पर इसका असर पड़ने में भी लंबा समय लग सकता है और इस बीच दुनिया को ऊर्जा संकट झेलना पड़ सकता है। इससे इनकी कीमतों में कमी आने के कोई आसार नहीं हैं।

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