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Pakistan: पाकिस्तान और रूस ने स्टील मिल्स परियोजना बहाल करने के लिए किया समझौते पर हस्ताक्षर, मिलेगा यह फायदा

Sat, 12 Jul 2025 04:41 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Sat, 12 Jul 2025 04:41 PM IST
सार

Pakistan: सरकारी समाचार पत्र एसोसिएटेड प्रेस ऑफ पाकिस्तान (एपीपी) की रिपोर्ट के अनुसार, कराची में पीएसएम को फिर से शुरू के समझौते पर शुक्रवार को मास्को स्थित पाकिस्तान दूतावास में हस्ताक्षर किए गए। आइए इस बारे में विस्तार से जानें।

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Pak, Russia sign agreement to revive Pakistan Steel Mills project
पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ - फोटो : X @CMShehbaz

विस्तार

पाकिस्तान और रूस ने पाकिस्तान स्टील मिल्स परियोजना को बहाल करने और आधुनिक बनाने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। यह दोनों देशों के बीच सहयोग में एक नया अध्याय है। चीन भी पाकिस्तान स्टील मिल्स (पीएसएम) परियोजना का ठेका पाने की दौड़ में शामिल था, जिसे मूलतः सोवियत सहायता से बनाया गया था।

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सरकारी समाचार पत्र एसोसिएटेड प्रेस ऑफ पाकिस्तान (एपीपी) की रिपोर्ट के अनुसार, कराची में पीएसएम को फिर से शुरू के समझौते पर शुक्रवार को मास्को स्थित पाकिस्तान दूतावास में हस्ताक्षर किए गए। एपीपी ने कहा कि इस परियोजना का उद्देश्य इस्पात उत्पादन को पुनः आरंभ करना और उसका विस्तार करना है, जो दोनों देशों के बीच सहयोग में एक नया अध्याय लिखेगा।
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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के विशेष सहायक हारून अख्तर खान, जो इस समय रूस की यात्रा पर हैं, ने कहा, "रूस के सहयोग से पीएसएम को पुनर्जीवित करना हमारे साझा इतिहास और मजबूत औद्योगिक भविष्य के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।"
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प्रेस सूचना विभाग की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि पीएसएम का निर्माण मूलतः 1971 में पूर्व सोवियत संघ की सहायता से किया गया था और यह पाकिस्तान-रूस संबंधों का एक स्थायी प्रतीक बना हुआ है।

एक्सप्रेस ट्रिब्यून अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, 2008 में पीएसएम का पतन शुरू हो गया था, जिसके लिए हजारों नई नियुक्तियां और वैश्विक मंदी जिम्मेदार थे। स्टील मिल को 2008-09 में 16.9 बिलियन पाकिस्तानी रुपये का घाटा हुआ था, जो पांच वर्षों में बढ़कर 118.7 बिलियन पाकिस्तानी रुपये हो गया।

पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) और पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) की सरकारें, जो 2008 से 2018 तक सत्ता में रहीं, इस औद्योगिक क्षेत्र को कुशलतापूर्वक चलाने में विफल रहीं।

बाद में, इमरान खान के नेतृत्व वाली पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) सरकार ने इसे पुनर्जीवित करने की पहल शुरू की, जिससे अनुबंध प्राप्त करने के लिए चीन और रूस के बीच होड़ शुरू हो गई।

प्रारंभ में पीटीआई सरकार चीन की ओर झुकी हुई थी और उसने एक चीनी कंपनी के साथ बातचीत शुरू की थी, लेकिन बातचीत सफल नहीं हो सकी। दूसरी ओर, रूसियों ने दावा किया था कि चूंकि परियोजना का निर्माण उन्होंने किया था, इसलिए वे बीमार इकाई को फिर से शुरू करने के लिए सबसे उपयुक्त थे।


तत्कालीन राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के कार्यकाल के दौरान वित्तीय वर्ष 2007-08 तक पीएसएम का संचयी लाभ 9.54 बिलियन पाकिस्तानी रुपये था। अगले 10 वर्षों में इसका घाटा बढ़ता गया और 31 मई, 2018 को कार्यकाल के अंत तक यह 200 अरब पाकिस्तानी रुपये तक पहुंच गया।

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