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Report: ग्रामीण भारत में महिलाएं होती हैं 100 फीसदी रोजगार असमानता की शिकार, ये कारण है जिम्मेदार

Thu, 15 Sep 2022 05:42 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Thu, 15 Sep 2022 05:42 PM IST
सार

ऑक्सफैम इंडिया ने 'इंडिया डिस्क्रिमिनेशन रिपोर्ट 2022' को 2004-05 से 2019-20 तक के रोजगार और श्रम के सरकारी आंकड़ों का विश्लेषण करके तैयार किया है। इस रिपोर्ट के नतीजे देश में महिलाओं की कम श्रम शक्ति भागीदारी दर (एलएफपीआर) के पीछे एक बड़ा कारण भेदभाव को बताते हैं। 

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Oxfam says Discrimination accounts for 100 percent employment inequality for women in rural India
मजदूरी करती महिलाएं - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

भारत में महिलाओं के साथ अममानता कोई नई बात नहीं है। खासकर नौकरी के क्षेत्र में महिलाओं के साथ ये असमानता और भी ज्यादा उभर कर सामने आती है। वहीं, ऑक्सफैम इंडिया की एक नई रिपोर्ट ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। ऑक्सफेम इंडिया की इस रिपोर्ट के मुताबिक, शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में नैकरी पाने के मामलों में औसतन 99 फीसदी महिलाओं को असमानता का सामना करना पड़ता है। भारत में ग्रामीण क्षेत्रों के श्रम बाजार में महिलाओं को करीबन 100 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 98 प्रतिशत लैंगिक भेदभाव का सामना करना पड़ता है। 

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ऑक्सफैम इंडिया ने 'इंडिया डिस्क्रिमिनेशन रिपोर्ट 2022' को 2004-05 से 2019-20 तक के रोजगार और श्रम के सरकारी आंकड़ों का विश्लेषण करके तैयार किया है। इस रिपोर्ट के नतीजे देश में महिलाओं की कम श्रम शक्ति भागीदारी दर (एलएफपीआर) के पीछे एक बड़ा कारण भेदभाव को बताते हैं। 
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केंद्रीय सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के अनुसार, भारत में महिलाओं के लिए श्रम शक्ति भागीदारी दर (LFPR) शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में 2020-21 में केवल 25.1 प्रतिशत था। साथ ही विश्व बैंक के नवीनतम अनुमानों के अनुसार, भारत में श्रम शक्ति भागीदारी दर ब्राजील, रूस, चीन और दक्षिण अफ्रीका की तुलना में काफी कम है। इस रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि साल 2021 में दक्षिण अफ्रीका में महिलाओं के लिए एलएफपीआर 46 फीसदी था।
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 ऑक्सफैम इंडिया ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि भारत में महिलाओं के लिए एलएफपीआर 2004-05 में 42.7 प्रतिशत था जो कि 2021 में मात्र 25.1 प्रतिशत रह गया है। ये आंकड़े इस समयावधि में तेजी से हुए आर्थिक विकास के बाद भी बड़ी संख्या में महिलाओं द्वारा नौकरी छोड़ने को दिखाता है। रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2019-20 में 15 साल और उससे अधिक आयु के पुरुषों में से 60 प्रतिशत के पास नियमित नौकरी या स्वरोजगार था जबकि इस काल में समान आयु वर्ग की 19 प्रतिशत महिलाओं के पास ही नियमित नौकरी और स्वरोजगार था। शहरी क्षेत्रों में नियमित नौकरी और स्वरोजगार के मामले में पुरुषों और महिलाओं की आय में भी काफी अंतर है। 

इंडिया डिस्क्रिमिनेशन रिपोर्ट 2022 के मुताबिक, स्वरोजगार में पुरुषों के लिए औसत मासिक कमाई 15,996 रुपये और शहरी क्षेत्रों में महिलाओं के लिए केवल 6,626 रुपये है। वहीं, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पुरुषों की औसत कमाई महिलाओं की कमाई का लगभग 2.5 गुना है।


ऑक्सफैम इंडिया ने सरकार से देश में सभी महिलाओं के लिए समान वेतन और काम के अधिकार के कार्यान्वयन के लिए प्रभावी उपायों को सक्रिय रूप से लागू करने की सिफारिश की है। साथ ही इसने यह भी कहा है कि सरकार कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी को सक्रिय रूप से प्रोत्साहित करने के लिए वेतन में वृद्धि, अपस्किलिंग, नौकरी में आरक्षण और मातृत्व के बाद काम के लिए आसान विकल्प आदि को प्रोत्साहित करे। 

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