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आर्थिक मोर्चे पर ड्रैगन की हेकड़ी निकालेगा भारत का ये प्लान, चीनी कंपनियों को लगेगा जोरदार झटका

Fri, 19 Jun 2020 03:48 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 19 Jun 2020 03:48 PM IST
सार

ई-कॉमर्स कंपनियां और भारतीय मानक ब्यूरो भी चीनी उत्पादों की रफ्तार कम करने में मदद करेंगे। मौजूदा समय में भारत का चीन के साथ होने वाला व्यापार करीब 47 अरब डॉलर का है...

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On the economic front, this plan of India will remove the dragon's arrogance, Chinese companies will get a big blow
boycott china - फोटो : File Photo

विस्तार

भारत और चीन के बीच सीमा पर बढ़ते तनाव का असर अब दोनों देशों के मध्य होने वाले कारोबार पर पड़ने जा रहा है। लद्दाख की गलवां घाटी में चीन के धोखे को लेकर देश के सामान्य नागरिक, सेना, सत्ता पक्ष-विपक्ष और व्यापारिक जगत में खासा आक्रोश है।

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आर्थिक मोर्चे पर ड्रैगन की हेकड़ी निकालने के लिए भारत ने प्लान तैयार कर लिया है। अब इसी प्लान के जरिए चीनी कंपनियों को जोरदार झटका दिया जाएगा।

एक तरफ केंद्र सरकार भारतीय स्टार्टअप में चीनी कंपनियों के निवेश पर नकेल कसने की तैयारी कर रही है, तो दूसरी ओर सामान्य उपयोग की चीनी वस्तुओं का बहिष्कार करने की बात सामने आई है।
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ई-कॉमर्स कंपनियां और भारतीय मानक ब्यूरो भी चीनी उत्पादों की रफ्तार कम करने में मदद करेंगे। मौजूदा समय में भारत का चीन के साथ होने वाला व्यापार करीब 47 अरब डॉलर का है। ़
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इस राशि में चीन से आयात होने वाले उत्पादों का हिस्सा ज्यादा है, जबकि भारत से निर्यात होने वाला माल काफी कम है।

आर्थिक प्लेटफार्म के जरिए चीन पर बनेगा चौतरफा दबाव  

भारत सरकार के वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के एक अधिकारी के अनुसार, अब आर्थिक प्लेटफार्म के जरिए चीन पर चौतरफा दबाव बनाया जाएगा।


इसका खाका तैयार किया जा रहा है। चीन से होने वाला आयात कम होगा।

भारत की ओर से चीनी कंपनियों में निवेश करने वालों के दस्तावेजों की गहराई से जांच पड़ताल की जाएगी।
 
इसका असर न केवल चीनी कंपनियों पर, बल्कि भारतीय स्टार्टअप पर भी देखने को मिलेगा। केंद्र सरकार को ऐसी पॉलिसी बनानी होगी, जिससे कि हमारे युवा स्टार्टअप को चीन जैसी तकनीक और सस्ते उत्पाद स्वदेश में ही व उसी रेट में उपलब्ध हो सकें।

चीनी कंपनी पेटीएम, मेक माई ट्रिप, ओला, स्विगी और बिग बास्केट सहित दर्जनभर कंपनियों के निवेश को बड़ा झटका लग सकता है।

फर्म नियमों के तहत जब इन कंपनियों की गहन जांच होगी तो इनमें अनिवार्य दस्तावेज नहीं होने या लिखित प्रावधानों का उल्लंघन कर कारोबार करने जैसी अनेक कमियां सामने आएंगी।

प्रत्यक्ष विदेशी निवेश नीति में करने होंगे ऐसे बदलाव

आर्थिक विश्लेषकों का कहना है कि चीन को सबक सिखाने के लिए केंद्र सरकार को कड़े कदम उठाने होंगे।

प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नीति में कई ऐसे बदलाव करने पड़ेंगे, जिससे चीनी कंपनियों में निवेश प्रक्रिया को हतोत्साहित किया जा सके।

केंद्र सरकार से अभी जो खाका तैयार किया जा रहा है, उसमें ऐसे निवेश पर कई तरह की शर्तें लगाने की बात कही जा रही है। इसमें निवेश के आकार, सीमा और अवधि जैसी कैप लगाई जा सकती है।

चीन के साथ भारतीय प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का आकार करीब 6 अरब डॉलर से ज्यादा है।

ई-कॉमर्स कंपनियां बताएंगी उत्पाद भारतीय है या चीनी

केंद्र सरकार का वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए सख्त नियम बनाने जा रहा है। अभी तक ये कंपनियां अपनी मनमर्जी और खुलेपन के माहौल में अपने प्रोडेक्ट बेचती आई हैं।

कैट ने कई बार केंद्र सरकार से आग्रह किया था कि इन कंपनियों की मनमर्जी वाली पॉलिसी पर रोक लगाई जाए। अब इन कंपनियों के बेचे जाने वाले अपने सभी उत्पादों पर यह लिखना होगा कि वे भारत में बने हैं या किसी अन्य देश में।

चूंकि जनता में चीनी वस्तुओं के बहिष्कार की मुहिम शुरू कर दी गई है और ऐसे में जब किसी प्रोडक्ट पर 'मेड इन चाइना' या 'पीआरसी' लिखा होगा, तो ग्राहक उससे दूरी बना लेंगे।



देश के युवा अपना स्टार्टअप चीन की मदद के बिना उतने ही बजट में खड़ा कर सकें, इसके लिए अलग से एक नीति बनाई जा रही है।

बीआईएस भी चीनी उत्पादों पर लगायागा अंकुश

केंद्रीय खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री रामविलास पासवान ने आम जनता से अपील की है कि वे चीन में निर्मित उत्पादों का बहिष्कार करें।

उन्होंने कहा है कि मंत्रालय में भी दैनिक इस्तेमाल के लिए कोई भी चीनी उत्पाद नहीं खरीदा जाए।

भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस), चीन से आने वाले सामान की जांच सूक्ष्म तरीके से करेगा। अभी तक यह होता आया है कि चीन से आयातित बहुत सारा सामान हल्की-फुल्की जांच के बाद भारतीय मार्केट में आ जाता है।

अब बीआईएस के गुणवत्ता नियमों को चीनी उत्पादों पर कड़ाई से लागू किया जाएगा। बता दें कि बीआईएस ने विभिन्न उत्पादों की गुणवत्ता को परखने एवं उन्हें क्लीयरेंस देने के लिए 25 हजार से अधिक नियम बना रखे हैं।

अब चीन से आने वाले सामान की गहन जांच होगी। बीआईएस लैब की टेस्टिंग रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद ही सामान को बेचने की मंजूरी मिलेगी।

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