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सरकार ने दिवालिया कानून में किया बदलाव, अब एक साल कोई नया मामला नहीं होगा दर्ज
Sun, 17 May 2020 01:19 PM IST
अनवर अंसारी
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: अनवर अंसारी
Updated Sun, 17 May 2020 01:19 PM IST
सार
- वित्त मंत्री ने दिवालिया कानून में बदलाव की घोषणा की
- कंपनियों पर एक साल तक नहीं होगी कार्रवाई
- कोरोना वायरस के मद्देनजर उठाया गया कदम
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण
- फोटो : PTI
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विस्तार
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज की पांचवीं और आखिरी किस्त का ब्योरा दिया। यहां उन्होंने कोरोना वायरस महामारी के कारण कर्ज की किस्तें चुकाने में अपने को असमर्थ पा रही कंपनियों को दिवाला संहिता के तहत एक साल तक कार्रवाई से बचाने की घोषणा की।
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वित्त मंत्री ने कहा कि दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) के तहत एक साल तक कोई नई दिवालिया प्रक्रिया शुरू नहीं की जाएगी। कोराना से उत्पन्न परिस्थितियों से निपटने और आत्म निर्भर भारत अभियान के तहत प्रधानमंत्री के 20 लाख करोड़ रुपये के मेगा पैकेज की पांचवी किस्त की घोषणाओं में आईबीसी संबंधी यह प्रावधान भी शामिल किया गया है।
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सीतारमण ने कहा कि इसके साथ ही, कोरोना वायरस से संबंधित ऋण को डिफॉल्ट की परिभाषा से बाहर रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि लघु, सूक्ष्म एवं मध्यम उपक्रमों (एमएसएमई) को लाभ पहुंचाने के लिए दिवाला शोधन प्रक्रिया शुरू करने के लिए फंसे कर्ज की न्यूनतम राशि एक लाख रुपये से बढ़ाकर एक करोड़ रुपये किया जाएगा।
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वित्त मंत्री ने कहा कि इसके लिए अध्यादेश लाया जाएगा। उन्होंने कंपनी कानून के कुछ प्रावधानों के उल्लंघन को गैर-आपराधिक बनाए जाने की भी घोषणा की। इसके तहत कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) के बारे में जानकारी देने में चूक, निदेशक मंडल की रिपोर्ट की अपर्याप्ता, शेयर बाजारों को सूचना देने में देरी, सालाना आम बैठक में देरी समेत कई प्रक्रियात्मक चूकें तथा मामूली तकनीकी दिक्कतें शामिल हैं।
अर्थ दंड या हर्जाने के साथ समाधान योग्य उल्लंघनों में अधिकांश को आंतरिक न्याय निर्णय प्रक्रिया (आईएएम) के तहत रखा जाएगा। इस संबंध में अध्यादेश जारी किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कंपनी कानून के तहत सात समाधान योग्य अपराधों को एक साथ हटाया जाएगा और इनमें से पांच को वैकल्पिक नियमों के तहत रखा जाएगा।
इसके अलावा, सरकार ने कंपनियों को सीधे विदेशी बाजार में प्रतिभूतियों को सूचीबद्ध करने की मंजूरी दी। वित्त मंत्री ने कहा कि निजी कंपनियां, जो शेयर बाजारों में गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर सूचीबद्ध कराती हैं, उन्हें सूचीबद्ध कंपनियों के रूप में नहीं माना जाएगा।