{"_id":"5fd49e6b6c81f149c607ce3a","slug":"niti-ayog-ceo-amitabh-kant-said-private-credit-to-gdp-ratio-of-india-is-low-govt-working-on-framework-for-credit-push","type":"story","status":"publish","title_hn":"नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत का बयान, कहा- भारत का ऋण GDP अनुपात सबसे कम","category":{"title":"Business Diary","title_hn":"बिज़नेस डायरी","slug":"business-diary"}}
नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत का बयान, कहा- भारत का ऋण GDP अनुपात सबसे कम
Sat, 12 Dec 2020 04:11 PM IST
डिंपल अलवधी
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: डिंपल अलवधी
Updated Sat, 12 Dec 2020 04:11 PM IST
विज्ञापन
नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत
- फोटो : ANI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने शनिवार को कहा कि भारत का निजी ऋण और सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) अनुपात इसके वैश्विक साथियों के मुकाबले सबसे कम है और सरकार अभी तक अछूते क्षेत्रों में ऋण को बढ़ावा देने के लिए एक ढांचा तैयार कर रही है।
विज्ञापन
चीन और दक्षिण कोरिया जैसे देशों में जबरदस्त वृद्धि
उन्होंने ग्लोबल एलायंस फॉर मास उद्यमिता (जीएएमई) द्वारा आयोजित एक आभासी कार्यक्रम में कहा कि हाल के वर्षों में भारत के बड़े हिस्से में ऋण परिदृश्य को भार माना जाता था। उन्होंने कहा, 'भारत का निजी ऋण और जीडीपी अनुपात वैश्विक साथियों के मुकाबले सबसे कम है। चीन और दक्षिण कोरिया जैसे देशों में जबरदस्त वृद्धि हुई है, उनके जीवन स्तर में बड़े पैमाने पर सुधार हुआ है।'
विज्ञापन
रोजगार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं एमएसएमई
उन्होंने कहा कि यहां तक कि वियतनाम का हालिया विकास कुछ हद तक निजी ऋण में वृद्धि के चलते हुआ है। कांत ने कहा कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) रोजगार प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, लेकिन औपचारिक वित्तीय क्षेत्र द्वारा उनकी ऋण संबंधी जरूरतों को काफी कम पूरा किया जाता है।
विज्ञापन
नीति आयोग का दावा
मालूम हो कि नीति आयोग ने वित्त वर्ष 2021-22 के अंत यानी मार्च 2022 तक देश की आर्थिक वृद्धि दर कोविड-19 (कोरोना वायरस) महामारी से पहले के स्तर पर ही पहुंच जाने की संभावना जताई है।
आरबीआई ने भी जताया अनुमान
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने भी चालू वित्त वर्ष (2020-21) के संशोधित पूर्वानुमान में आर्थिक वृद्धि दर के माइनस 7.5 फीसदी रहने की संभावना जाहिर की है, जबकि पहले इसके माइनस 9.5 फीसदी रहने का पूर्वानुमान जताया गया था।