जेट के खिलाफ पायलट-इंजीनियर भी एनसीएलटी पहुंचे, 20 जून से होगी सुनवाई
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एसबीआई की अगुवाई वाले कर्जदाता बैंकों के समूह के अलावा कंपनी के पायलट और इंजीनियरों के यूनियन ने भी एनसीएलटी से पक्षकार बनाने की मांग की है। वहीं, नीदरलैंड के दो लॉजिस्टिक वेंडर्स ने बुधवार को जेट एयरवेज के खिलाफ याचिका दाखिल कर इसके आईबीसी समाधान का विरोध किया है। इस पर 20 जून से सुनवाई शुरू होगी।
दूसरी ओर, एसबीआई की अगुवाई वाले 26 बैंकों के समूह की दिवालिया प्रक्रिया शुरू करने की याचिका पर भी एनसीएलटी की मुंबई पीठ बृहस्पतिवार से सुनवाई शुरू करेगी। बैंक समूह ने कंपनी पर बकाया 8,500 करोड़ रुपये वसूलने के लिए राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) का रुख किया है।
इस बीच, नीदरलैंड के दो वेंडर ने बकाया भुगतान को लेकर कंपनी के दिवालिया समाधान का विरोध किया है। गत मार्च महीने में इनमें से ही एक वेंडर ने जेट के विमान को एम्सटर्डम में रोक लिया था। वेंडर ने दिवालिया प्रक्रिया के लिए अलग से प्रशासक नियुक्त करने की भी मांग की है।
वित्तीय लेनदारों को ज्यादा नुकसान
रेटिंग एजेंसी इक्रा का कहना है दिवालिया एवं ऋणशोधन अक्षमता कानून (आईबीसी) के तहत जेट एयरवेज का समाधान होने पर वित्तीय लेनदारों को ज्यादा नुकसान होगा। एजेंसी ने कहा कि आईबीसी में अब तक हुए 92 मामलों के समाधान में परिचालन लेनदारों को कुल कर्ज (81 अरब रुपये) का 42 फीसदी मिला है, जबकि वित्तीय लेनदारों को कुल कर्ज (1,606 अरब रुपये) का 44 फीसदी ही रिकवरी हुई। लिहाजा जेट के मामले में भी वित्तीय लेनदार ज्यादा नुकसान में रहेंगे।
जेट के शेयर 18 फीसदी टूटे
बैंकों के एनसीएलटी पहुंचने के बाद से ही जेट के शेयरों में बड़ी गिरावट जारी है। बुधवार को भी बीएसई पर कंपनी के शेयर 18.17 फीसदी गिरकर 33.10 रुपये के भाव पर आ गए, जबकि एनएसई पर 18.51 फीसदी की गिरावट के साथ 33 रुपये पर पहुंच गए। पिछले 13 कारोबारी सत्र में कंपनी के शेयर 78 फीसदी तक गिर चुके हैं। अप्रैल 2005 में जेट के शेयर 1,375 रुपये के भाव थे, इसके बाद यह स्तर कभी नहीं छू सके।