प्राकृतिक गैस-हवाई ईंधन आ सकते हैं GST के दायरे में, बजट में हो सकती है घोषणा
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पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बृहस्पतिवार को कहा कि सरकार प्राकृतिक गैस और विमान ईंधन (एटीएफ) को जल्द ही जीएसटी के दायरे में ला सकती है। आगामी बजट में इसकी घोषणा हो सकती है। फिक्की के सम्मेलन में उन्होंने कहा, ‘उम्मीद है कि वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण आगामी बजट में प्राकृतिक गैस और एटीएफ को जीएसटी के दायरे में लाने की घोषणा कर सकती हैं।’ वित्त मंत्री एक फरवरी, 2020 को वित्त वर्ष 2020-21 के लिए बजट पेश कर सकती हैं।
प्रधान ने कहा कि सरकार के इस कदम से पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतें घटेंगी, जिससे ग्राहकों और उद्योग जगत को राहत मिलेगी। साथ ही करों की संख्या घटाने के साथ कारोबारी माहौल सुधारने में भी मदद मिलेगी। इससे पहले एक जुलाई, 2017 को जब जीएसटी लागू किया गया था, तब सरकार ने पांच पेट्रोलियम पदार्थों कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, पेट्रोल, डीजल और विमान ईंधन को इसके दायरे से बाहर रखा था। सरकार की कमाई का बड़ा हिस्सा पेट्रोलियम पदार्थों पर लगाए गए टैक्स से वसूला जाता है। मौजूदा समय में पेट्रोल, डीजल और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों पर राज्य सरकारें खुद टैक्स लगाती हैं।
10 साल में तीन गुना बढ़ेगी प्राकृतिक गैस की खपत
प्रधान ने कहा कि भारत में प्राकृतिक गैस की खपत अगले 10 साल में तीन गुना से अधिक बढ़ जाएगी। इसी के साथ 2030 तक देश के ऊर्जा क्षेत्र में इसकी हिस्सेदारी बढ़कर 15 फीसदी हो जाएगी, जो इस समय 6.2 फीसदी है।
उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए गैस इन्फ्रास्ट्रक्चर के विस्तार पर 60 अरब डॉलर की बड़ी राशि खर्च की जा रही है। इससे प्रदूषण बढ़ाने वाले कोयले और लिक्विड ईंधनों की मांग में कमी आएगी।
उन्होंने कहा कि 2030 तक इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए हमें गैस की खपत को बढ़ाकर 60 करोड़ स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्रति दिन करना होगा। वर्तमान में यह खपत 16.6 करोड़ स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्रति दिन है।