MSME New Rule: एमएसएमई की बदली परिभाषा, निवेश-कारोबार की सीमा में बढ़ोतरी; टर्नओवर के नियमों में भी बड़े बदलाव
1 अप्रैल, 2025 से नए वित्त वर्ष 2025-26 की शुरुआत हो रही है। इस तारीख से आपकी जेब और जिंदगी पर सीधा असर डालने वाले कई बड़े बदलाव होने वाले हैं। इन बदलावों का मकसद करदाताओं, वरिष्ठ नागरिकों, उपभोक्ताओं और व्यवसायों को राहत देकर खर्च एवं खपत को बढ़ाना है, ताकि अर्थव्यवस्था की रफ्तार को मजबूती मिल सके।
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विस्तार
बजट में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को देश का महत्वपूर्ण ग्रोथ इंजन बताते हुए इसकी परिभाषा में बदलाव की घोषणा की गई थी। इसके तहत, एमएसएमई के लिए निवेश की सीमा 2.5 गुना और कारोवार की सीमा दोगुना कर दी गई है। पहले के मुकाबले अब ज्यादा निवेश और कारोबार करने वाले उद्योग भी एमएसएमई में शामिल हो सकेंगे।
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अगर किसी कंपनी ने 2.5 करोड़ तक निवेश किया है तो उसे सूक्ष्म उद्यम माना जाएगा। पहले यह सीमा एक करोड़ रुपये थी। 25 करोड़ रुपये तक के निवेश बाली कंपनियों को लघु उद्यम कहा जाएगा। पहले यह सीमा 10 करोड़ थी। अगर किसी एमएसएमई ने 125 करोड़ रुपये तक का निवेश किया है, तो उसे मध्यम उद्यम माना जाएगा। पहले यह सीमा 50 करोड़ रुपये थी।
टर्नओवर के भी नए नियम
- अगर किसी कंपनी का टर्नओवर 10 करोड़ रुपये तक है, तो उसे सूक्ष्म उद्यम माना जाएगा। पहले यह सीमा 5 करोड़ थी।
- लघु उद्यमों के लिए टर्नओवर की सीमा 50 करोड़ से बढ़ाकर 100 करोड़ कर दी गई है।
- मध्यम उहामों के लिए भी टर्नओवर सीमा 250 रुपये से बढ़ाकर 500 करोड़ रुपये की गई है।
विस्तार को बढ़ावा, रोजगार के खुलेंगे अवसर
- विनिर्माण और सेवा क्षेत्र को मिलाकर देश में कुल 6 करोड़ से अधिक एमएसएमई पंजीकृत हैं। 2029 तक इनकी संख्या बढ़कर 9 करोड़ पहुंच जाएगी।
- परिभाषा बदलने से ज्यादा कंपनियां एमएसएमई से जुड़ी सरकारी योजनाओं और प्रोत्साहन का लाभ ले सकेंगी।
- स्कीम व इंसेंटिव का लाभ ले सकेंगे। वे अपना विस्तार कर सकेंगी, जिससे नए रोजगार बढ़ेंगे और विनिर्माण को भी रफ्तार मिलेगी।