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नौकरी और आय बढ़ाने के लिए भारत में और सुधारों की जरूरत: ओईसीडी

Fri, 06 Dec 2019 10:18 AM IST
‌डिंपल अलवधी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Published by: ‌डिंपल अलवधी Updated Fri, 06 Dec 2019 10:18 AM IST
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More reforms needed to boost jobs and incomes in India OECD report

आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (ओईसीडी) ने भारत को सुझाव दिया है कि उसे गुणवत्तापूर्ण नौकरी और आय में इजाफा करने के लिए और सुधारों की जरूरत है। संगठन ने बृहस्पतिवार को कहा कि सरकार की ओर से पूर्व में उठाए गए आर्थिक सुधार के कदमों का असर दिखने लगा है। 

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ओईसीडी के अनुसार, कंपनी कर में कटौती और इंफ्रा क्षेत्र में किए गए सुधारों का फल मिलना शुरू हो गया है। लेकिन अभी और सुधारों की जरूरत है, ताकि गुणवत्ता वाले रोजगार और आय में बढ़ोतरी की जा सके। इस कदम से सार्वजनिक सेवा और जन कल्याण का दायरा भी बढ़ाया जा सकेगा। ओईसीडी की ओर से भारतीय अर्थव्यवस्था पर जारी हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि अलबत्ता पिछले कुछ वर्षों से वैश्विक कारोबार में भारत की हिस्सेदारी बढ़ी है, लेकिन निजी निवेश लगातार कमजोर होता गया है। गुणवत्ता वाली नौकरियों की कमी के कारण बेरोजगारी दर बढ़ी है और ग्रामीण क्षेत्र की आय में कमी आई है। इसके अलावा राज्यों के बीच प्रति व्यक्ति आय में भी अंतर काफी बढ़ गया है। ओईसीडी एक अंतर सरकारी संगठन है, जिसमें 36 देश शामिल हैं। 

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5.8 फीसदी विकास दर अनुमान

ओईसीडी ने कहा है कि 2019-20 में भारत की विकास दर 5.8 फीसदी रहेगी। संगठन ने कहा कि उच्च स्तर पर वृद्धि को बहाल करना नौकरियों के सृजन के लिए जरूरी है । साथ ही निवेश व निर्यात में तेजी लाने के लिए ढांचागत सुधारों को बढ़ाना होगा। इससे 2020-21 में भारत की विकास दर 6.2 फीसदी और 2021-22 में 6.4 फीसदी पहुंच सकती है। 

मध्य वर्ग की आय बढ़ाने को चाहिए सांस्थानिक ढांचा

वित्त मंत्रालय के दो पूर्व अधिकारियों ने अपनी किताब में कहा है कि भारत को मध्य वर्ग की आय बढ़ाने के लिए सांस्थानिक ढांचे की जरूरत है, क्योंकि भारत मध्य आय की उभरती अर्थव्यवस्था वाला देश है। सर्विस ऑफ द रिपब्लिक किताब में विजय केलकर और अजय शाह ने लिखा है कि 30 खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था के साथ भारत अब मध्य आय की ओर बढ़ रहा है। हमने 1991 से 2011 के बीच तेज वृद्धि दर देखी है। हालांकि, अब विकास का यह फॉर्मूला पुराना हो गया है और सरकार को इस पर नए सिरे से विचार करना होगा। मध्य वर्ग की आय बढ़ाने के लिए कृषि क्षेत्र पर विशेष जोर देना होगा। पेट्रोलियम सचिव, वित्त सचिव और 13वें वित्त आयोग के चेयरमैन रहे केलकर ने कहा कि अभी हम कृषि क्षेत्र की गिरावट से जूझ रहे हैं। इसका सबसे बड़ा कारण है कि राज्य सरकारें भंडारण, वायदा बाजार, घरेलू और वैश्विक कारोबार में कमजोर होती जा रही हैं। 

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