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मूडीज ने जताया अनुमान, 2020-21 में शून्य रह सकती है भारत की आर्थिक वृद्धि दर

Fri, 08 May 2020 03:18 PM IST
‌डिंपल अलवधी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: ‌डिंपल अलवधी Updated Fri, 08 May 2020 03:18 PM IST
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Moodys pegs India FY21 GDP growth at 0 risk of slower economic growth rising
GDP - फोटो : Social Media

मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस ने शुक्रवार को मौजूदा वित्त वर्ष के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान को घटाकर शून्य फीसदी कर दिया है। मूडीज के अनुसार, भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) कम रहेगी। 

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पहले की तुलना में कम रहेगी जीडीपी की वृद्धि
एजेंसी ने कहा कि भारत की रेटिंग पर नेगेटिव आउटलुक से जोखिम बढ़ रहे हैं और आर्थिक, संस्थागत मुद्दों के लिहाज से जीडीपी की वृद्धि पहले की तुलना में काफी कम रहेगी। 
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नवंबर में भारत के आउटलुक किया था नेगेटिव
इससे पहले नवंबर 2019 में एजेंसी ने भारत के आउटलुक को स्थिर से नेगेटिव में बदल दिया था। हालांकि, एजेंसी ने देश की 'Baa2' रेटिंग की पुष्टि की थी। अब एजेंसी ने कहा कि भारत की क्रेडिट प्रोफाइल को देश की बड़ी और विविध अर्थव्यवस्था और स्थिर घरेलू वित्त पोषण का समर्थन प्राप्त है। 
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ग्रामीण घरों में लंबे समय तक वित्तीय तनाव, कमजोर रोजगार सृजन और गैर बैंक वित्तीय संस्थानों ( NBFC ) के बीच क्रेडिट संकट ने इसके कमजोर पड़ने की संभावना को और अधिक बढ़ा दिया है।

कोरोना से प्रभावित अर्थव्यवस्था
कोरोना वायरस के चलते अर्थव्यवस्था की हालत पतली हो रही है, साथ ही आंशिक रूप से लंबे समय से चली आ रही आर्थिक और संस्थागत कमजोरियों ने भी अर्थव्यवस्था को कमजोर किया है।

अन्य एजेंसियों के मुताबिक इतनी रह सकती है GDP

  • मालूम हो कि विश्व बैंक के अनुसार, देश की आर्थिक वृद्धि दर 2020-21 में 1.5 फीसदी से 2.8 फीसदी रह सकती है। 1991 में आर्थिक सुधारों के बाद से यह सबसे धीमी वृद्धि दर होगी। 
  • एशियाई विकास बैंक (ADB) ने भारत की आर्थिक वृद्धि दर 2020-21 में चार फीसदी रहने का अनुमान जताया।
  • सेंट्रम इंस्टीट्यूशनल रिसर्च ने भी 2020-21 में आर्थिक वृद्धि दर अनुमान 5.2 फीसदी से कम कर 3.1 फीसदी कर दिया है।
  • अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) को भारत की वृद्धि दर 1.9 फीसदी रहने तथा विश्वबैंक को 1.5 फीसदी से 2.8 फीसदी के बीच रहने का अनुमान है।
  • क्रेडिट रेटिंग एजेंसी एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने भी चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की वृद्धि दर का अनुमान घटाकर 1.8 फीसदी कर दिया थी। कोरोना वायरस के संक्रमण के कारण आई वैश्विक महामारी के मद्देनजर यह कटौती की गई। एजेंसी के अनुसार, यह 2021-22 में बढ़कर 7.5 फीसदी रह सकता है। 
  • फिच रेटिंग्स ने वित्त वर्ष 2020-21 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि दर के पूर्वानुमानों में कटौती कर इसे घटाकर 0.8 फीसदी कर दिया है। 
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