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Millet Crops: क्यों खास हैं 'मिलेट क्रॉप्स', उनका उत्पादन व निर्यात बढ़ाने के लिए क्या कर रही सरकार?

Wed, 21 Dec 2022 11:17 AM IST
विवेक दास बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विवेक दास Updated Wed, 21 Dec 2022 11:17 AM IST
सार

Millet Crops: मोटे अनाज वाली फसलों जैसे ज्वार, बाजरा, रागी, सावां, कंगनी, चीना, कोदो, कुटकी और कुट्टू को मिलेट क्रॉप कहा जाता है। मिलेट्स को सुपर फूड कहा जाता है, क्योंकि इनमें पोषक तत्व अपेक्षाकृत अधिक मात्रा में होते हैं।

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Millets Crop: Why are 'Millets Crop' special, what is the govt doing to increase their production and exports?
संसद में मिलेट क्रॉप्स से बने विशेष लंच के दौरान बाजरे के उत्पादों को देखते पीएम और उपराष्ट्रपति। - फोटो : amarujala.com

विस्तार

संयुक्त राष्ट्र संघ ने वर्ष 2023 को अंतरराष्ट्रीय मिलेट क्रॉप वर्ष घोषित किया है। संयुक्त राष्ट्र की ओर से यह कदम भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल के बाद उठाया गया है। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह ने कहा है कि वर्ष 2023 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिलेट्स का उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी। साथ ही इससे मिलेट्स क्रॉप के उपयोगी प्रसंस्करण और फसल चक्र के बेहतर इस्तेमाल के साथ इसे खाद्य सामग्री का अहम अंग बनाने में मदद मिलेगी। इससे पहले भाजपा संसदीय दल की बैठक के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2023 को अंतरराष्ट्रीय मिलेट इयर मनाने के साथ-साथ इस वर्ष लोगों को इसके बारे में जागरूक करना चाहिए। कृषि मंत्री ने नरेंद्र तोमर ने कहा, “कृषि मंत्रालय और किसानों के कल्याणकारी संगठन मिशन मोड में मिलेट का उत्पादन बढ़ाने और उपभोग बनाने के लिए केंद्रीय मंत्रालयों, राज्य सरकारों और अन्य संबंधित संगठनों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने अप्रैल 2018 में मिलेट को एक पोषणकारी अनाज घोषित किया था। मिलेट्स क्रॉप को पोषण मिशन अभियान में भी शामिल गया है।

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रागी से तैयार उत्पम। - फोटो : istock

# मिलेट्स क्रॉप खाद्य सुरक्षा के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लिए भी महत्वपूर्ण 
हाल ही में विदेशी मंत्री एस जयशंकर ने भी कोरोना महामारी, जलवायु परिवर्तन और अन्य चुनौतियों के बीच मिलेट्स के महत्व को रेखांकित किया था। जयशंकर ने बताया था कि मिलेट्स खाद्य सुरक्षा के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। एशिया और अफ्रीका मिलेट्स के प्रमुख उत्पादक और उपयोगकर्ता देश हैं। भारत के अलावे नाइजर, सूडान और नाइजीरिया मिलेट्स के प्रमुख उत्पादन देश हैं। मंगलवार को सरकार ने सांसदों के लिए एक लंच का भी आयोजन किया, जिसमें मिलेट्स से बने भोजन ही मीनू का हिस्सा थे। प्रधानमंत्री मोदी की ओर से वर्ष 2023 को मिलेट इयर की पहचान देने की पहल के तहत मंगलवार को संसद में सांसदों के लिए एक स्पेशल लंच तैयार किया गया जहां रागी, ज्वार व बाजरे से बनी रोटियां परोसी गई। इसके अलावे ज्वार और बाजरे से बनी खिचड़ी भी सांसदों को परोसी गई। इस स्पेशल लंच के लिए शेफ विशेष तौर कर्नाटक से मंगाए गए थे। उन्होंने रागी से इडली और डोसा तैयार किए।  

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संसद में मिलेट क्रॉप्स से बने विशेष लंच के दौरान बाजरे के उत्पादों को देखते पीएम और उपराष्ट्रपति। - फोटो : Social Media

# क्या हैं मिलेट क्रॉप्स? इन्हें क्यों कहा जाता है सूपर फूड?

मोटे अनाज वाली फसलों जैसे ज्वार, बाजरा, रागी, सावां, कंगनी, चीना, कोदो, कुटकी और कुट्टू को मिलेट क्रॉप कहा जाता है। मिलेट्स को सुपर फूड कहा जाता है, क्योंकि इनमें पोषक तत्व अपेक्षाकृत अधिक मात्रा में होते हैं। भारतीय मिलेट्स अनुसंधान संस्थान के अनुसार, रागी यानी फिंगर मिलेट में कैल्शियम की मात्रा अच्छी होती है। प्रति 100 ग्राम फिंगर मिलेट में 364 मिलिग्राम तक कैल्शियम होता है। रागी में आयरन की मात्रा भी गेहूं और चावल से ज्यादा होती है। 

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बाजरा - फोटो : getty images

# क्या है मिलेट क्रॉप्स की खासियत?
मिलेट्स क्रॉप को कम पानी की जरूरत होती है। उदाहरण के लिए गन्ने के पौधे को पकाने में 2100 मिलीमीटर पानी की ज़रूरत होती है। वहीं, बाजरा जैसी मोटे अनाज की फसल के एक पौधे को पूरे जीवनकाल में 350 मिलीमीटर पानी चाहिए होता है। रागी को 350 मिलीमीटर पानी की आवश्यकता होती है तो ज्वार को 400 मिलीमीटर पानी चाहिए होता है। जहां दूसरी फसलें पानी की कमी होने पर पूरी तरह बर्बाद हो जाती हैं, वहीं, मोटा अनाज की फसल खराब होने की स्थिति में भी पशुओं के चारे के काम आ सकती हैं।

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बाजरा

# मिलेट क्रॉप्स को बढ़ावा देने के लिए क्या कर रही है सरकार?
बीते 5 दिसंबर को एपीईडीए (Agricultural and Processed Food Products Export Development Authority (APEDA)  और सरकार की ओर से नई दिल्ली में मिलेट्स-स्मार्ट न्यूट्रिटिव फूड कान्क्लेव का आयोजन किया गया। इसमें किसान उत्पादक संगठनों, स्टार्टअप्स, निर्यातकों, बाजरा आधारित मूल्य वर्द्धित उत्पादों के उत्पादक जैसे आपूर्ति शृंखला के हितधारक शामिल हुए। कॉन्क्लेव के दौरान भारतीय बाजरा तथा बाजरा आधारित उत्पादों को प्रदर्शित करने के लिए प्रदर्शनी तथा बी2बी बैठकों का भी आयोजन किया गया। इसके अतिरिक्त, लक्षित देशों के भारत में स्थित विदेशी मिशनों के राजदूतों और संभावित आयातकों को भी रेडी टू इट बाजरा उत्पादों सहित विभिन्न बाजरा केंद्रित उत्पादों को प्रदर्शित करने और बी2बी बैठकों को सुगम बनाने के लिए कॉनक्लेव में आमंत्रित किया गया।

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मोटे अनाजों के महत्व पर आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला। - फोटो : संवाद

# भारत के बाजरा निर्यात संवर्धन कार्यक्रम को दुनिया के 72 देशों ने दिया है समर्थन
भारत के बाजरा निर्यात संवर्धन कार्यक्रम को दुनिया के 72 देशों ने समर्थन दिया है। संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) ने 5 मार्च, 2021 को घोषणा की थी कि वर्ष 2023 अंतर्राष्ट्रीय बाजरा वर्ष (आईवाईओएम) के रूप में मनाया जाएगा। सरकार वर्तमान में भारतीय बाजरा और इसके मूल्य वर्धित उत्पादों को विश्व भर में लोकप्रिय बनाने तथा इसे एक जन आंदोलन बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रयासरत है। बाजरा को बढ़ावा देने की सरकार की सुदृढ़ नीति के अनुसार, विदेशों में स्थित भारतीय मिशनों को भारतीय बाजरा की ब्रांडिंग व प्रचार, अंतर्राष्ट्रीय शेफों तथा डिपार्टमेंटल स्टोर्स, सुपरमार्केट्स तथा हाइपरमार्केट्स जैसे संभावित खरीदारों की पहचान करने के लिए बी2बी बैठकों और प्रत्यक्ष करारों का आयोजन किया जा रहा है। 

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रागी

# अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी और जापान जैसे देशों में आयोजित होंगे बाजरा संवर्धन से जुड़े कार्यक्रम

केंद्र सरकार ने कुछ उल्लेखनीय फूड शो, क्रेता-विक्रेता बैठकों और रोड शो में भारत से विभिन्न हितधारकों की सहभागिता को सुगम बनाने के लिए दक्षिण अफ्रीका, दुबई, जापान, दक्षिण कोरिया, इंडोनेशिया, सऊदी अरब, सिडनी, बेल्जियम, जर्मनी, ब्रिटेन और अमेरिका में बाजरा संवर्धन कार्यकलापों का आयोजन करने की योजना बनाई है। भारतीय बाजरा के संवर्धन के एक हिस्से के रूप में, एपीईडीए ने गल्फूड 2023, सियोल फूड एंड होटल शो, सऊदी एग्रो फूड, सिडनी (ऑस्ट्रेलिया) में फाइन फूड शो, बेल्जियम के फूड व बेवेरेजेज शो, जर्मनी के बायोफैक व अनुगा फूड फेयर, सैन फ्रैंसिस्को के विंटर फैंसी फूड शो जैसे विभिन्न ग्लोबल प्लेटफॉर्मों पर बाजरा तथा इसके मूल्य वर्धित उत्पादों को प्रदर्शित करने की योजना बनाई है।

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millet

# दुनिया में बाजारा का 41 प्रतिशत उत्पादन भारत में होता है
वैश्विक उत्पादन में लगभग 41 प्रतिशत की अनुमानित हिस्सेदारी के साथ भारत दुनिया में बाजरा के अग्रणी उत्पादकों में से एक है। एफएओ (Food and Agricultural Organization) के अनुसार, वर्ष 2020 में बाजरा का वैश्विक उत्पादन 30.464 मिलियन मीट्रिक टन (एमएमटी) था और उसमें भारत की हिस्सेदारी 12.49 एमएमटी थी जो कुल बाजरा उत्पादन का 41 प्रतिशत है। भारत ने पिछले वर्ष उत्पादित 15.92 एमएमटी की तुलना में 2021-22 में बाजरा उत्पादन में 27 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज कराई। भारत के शीर्ष पांच बाजरा उत्पादक राज्य हैं - राजस्थान, महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात तथा मध्य प्रदेश। बाजरा के निर्यात का हिस्सा कुल बाजरा उत्पादन का लगभग 1 प्रतिशत है। 

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millet

# बाजरे की 16 किस्मों का भारत में होता है उत्पादन 
बाजरा की 16 प्रमुख किस्में हैं जिनका उत्पादन और निर्यात भारत से किया जाता है। इनमें शामिल हैं - ज्वार, पर्ल मिलेट, रागी, कंगणी, चीना, कोदो, सावा/संवा/झंगोरा, कुटकी, बक व्हीट एवं कुट्टु, चैलाई एवं ब्राउन टौप बाजरा। भारत से बाजरा के निर्यातों में मुख्य रूप से साबुत अनाज शामिल है और भारत से बाजरा के मूल्य वर्धित उत्पादों का निर्यात नगण्य है। डीजीसीआईएस के आंकड़ों के अनुसार, भारत ने वित्त वर्ष 2021-22 में बाजरा के निर्यात में 8.02 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज कराई जोकि पिछले वर्ष की समान अवधि के 147,501.08 मीट्रिक टन की तुलना में बढ़ कर 159,332.16  मीट्रिक टन हो गया। भारत के प्रमुख बाजरा निर्यातक देश हैं यूएई, नेपाल, सऊदी अरब, लिबिया, ओमान,, मिस्त्र,  ट्यूनिशिया, यमन, ब्रिटेन तथा अमेरिका। भारत से निर्यात किए जाने वाले बाजरा की किस्मों में बाजरा, रागी, कैनरी, जवार तथा बकवीट शामिल हैं। विश्व के प्रमुख बाजरा आयातक देश हैं- इंडोनेशिया, बेल्जियम, जापान, जर्मनी, मैक्सिको, इटली, अमेरिका, ब्रिटेन, ब्राजील और नीदरलैंड।

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फाक्सटेल मिल्लेट (काउणी) - फोटो : अमर उजाला

# बाजरा उत्पादन का कुल मूल्य वर्ष 2025 तक बढ़कर 12 अरब डॉलर हो जाएगा  
अनुमानों के मुताबिक बाजरा उत्पादन का बाजार मूल्य वर्ष 2025 तक 9 अरब डॉलर से बढ़कर 12 अरब डॉलर हो जाएगा। ऐसे में, एपीईडीए खुदरा स्तर पर और लक्षित देशों के प्रमुख स्थानीय बाजारों में भोजन के नमूनों तथा आस्वादन का आयोजन भी करेगा जहां एकल, घरेलू उपभोक्ता बाजरा उत्पादों से परिचित हो सकते हैं। केंद्र सरकार ने बाजरा सहित संभावित उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने तथा पोषक अनाजों की आपूर्ति श्रृंखला की बाधाओं को दूर करने के लिए पोषक अनाज निर्यात संवर्धन फोरम का गठन किया है। चावल व गेहूं जैसे अत्यधिक उपभोग वाले अनाजों की तुलना में बाजरा में बेहतर पोषण संबंधी गुण होते हैं। बाजरा कैल्सियम, लोहा तथा फाइबर में समृद्ध होते हैं जिनसे बच्चों में स्वस्थ विकास के लिए आवश्यक पोषक तत्वों को प्रतिबलित करने में सहायता मिलती है। इसके अतिरिक्त, शिशु आहार तथा पोषण उत्पादों में बाजरा का उपयोग बढ़ रहा है।

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