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Investment: वित्तीय सेवा और बीमा क्षेत्र में 1.35 लाख करोड़ का निवेश, विदेशी बैंकों और पीई फंड्स का बढ़ा भरोसा

Sat, 27 Dec 2025 06:54 AM IST
शिवम गर्ग अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: शिवम गर्ग Updated Sat, 27 Dec 2025 06:54 AM IST
सार

साल 2025 में भारत का बैंकिंग, वित्तीय सेवा और बीमा क्षेत्र वैश्विक निवेशकों की पहली पसंद बना। विदेशी बैंकों, बीमा कंपनियों और निजी इक्विटी फंडों ने 1.35 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया।

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Massive Investments Flow into India’s BFSI Sector in 2025, Foreign Players Show Strong Confidence
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला प्रिंट

विस्तार

घरेलू बैंकिंग, वित्तीय सेवा और बीमा क्षेत्र यानी बीएफएसआई के लिए 2025 वैश्विक निवेश का केंद्र बना रहा। इस दौरान इस क्षेत्र में कुल 1.35 लाख करोड़ रुपये (15 अरब डॉलर) का निवेश आया है। विदेशी बैंकों, बीमा कंपनियों, निजी इक्विटी फंडों के साथ सरकारी निवेशकों ने हिस्सेदारी खरीद, नियंत्रण सौदों और पूंजी निवेश के जरिये यह रकम लगाई।

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बैंकों, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों और बीमा कंपनियों में सौदों की इस गति ने वैश्विक निवेशकों की नजर में भारत की वित्तीय प्रणाली के संरचनात्मक पुनर्मूल्यांकन को दर्शाया। 2025 को पिछले वर्षों से अलग करने वाली बात सीमा पार लेनदेन का विशाल आकार और उद्देश्य था। मित्सुबिशी यूएफजे वित्तीय समूह के श्रीराम फाइनेंस में 4.4 अरब डॉलर में 20 फीसदी हिस्सा हासिल करने के समझौते ने भारत के विविध ऋण मंचों विशेष रूप से खुदरा और लघु व्यवसायों में मजबूत उपस्थिति वाले मंचों में विदेशी विश्वास को रेखांकित किया।
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एमिरेट्स एनबीडी का आरबीएल में 60 फीसदी हिस्सा लेना भी उतना ही महत्वपूर्ण था, जो किसी विदेशी ऋणदाता द्वारा भारतीय निजी क्षेत्र के बैंक का परिचालन नियंत्रण लेने के दुर्लभ मामलों में से एक है। इस सौदे से संकेत मिला कि भारत का नियामक वातावरण इतना परिपक्व है कि वह अच्छी पूंजी वाले वैश्विक बैंकों को नेतृत्व की भूमिकाओं में शामिल कर सकता है। पूंजी के स्रोत के रूप में जापान की निरंतर प्रमुखता ने इस धारणा को और मजबूत किया। सुमितोमो मित्सुई का यस बैंक में  निवेश यह दर्शाता है कि विदेशी बैंक भारत को सहायक बाजार के रूप में नहीं, बल्कि एक प्रमुख विकास क्षेत्र के रूप में देखते हैं जो निरंतर रणनीतिक उपस्थिति के योग्य है।
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इसलिए आ रहा भारी निवेश
वैश्विक निवेश का यह कारक घरेलू संस्थानों की खाताबही की तैयारी थी। ऋणमुक्ति, पुनर्पूंजीकरण और सख्त विनियमन के बाद भारतीय बैंक और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां 2025 में बेहतर वित्तीय स्थिति और मजबूत पूंजी पर्याप्तता के साथ प्रवेश कर गईं। इससे वे विदेशी निवेशकों के लिए आकर्षक भागीदार बन गईं जो जोखिम भरे निवेश के बजाय पूर्वानुमानित वृद्धि की तलाश में थीं।


फेडरल से लेकर आईडीएफसी तक में दिलचस्पी : फेडरल बैंक में ब्लैकस्टोन, सम्मान कैपिटल में आईएचसी और आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में वारबर्ग पिंकस और एडीआईए के निवेश ने मजबूत रिटेल फ्रेंचाइजी, प्रौद्योगिकी आधारित लंबे चक्रों में आय बढ़ाने की क्षमता वाले संस्थानों में निवेश कर विश्वास जताया।

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