PMI: विनिर्माण और सेवा क्षेत्र ने पकड़ी रफ्तार, 14 माह के उच्च स्तर पर पहुंचा आंकड़ा
एचएसबीसी फ्लैस इंडिया कम्पोजिट आउटपुट इंडेक्स के अनुसार भारत के विनिर्माण और सेवा क्षेत्र में तीव्र वृद्धि दर्ज हुई है। यह जून में बढ़कर 61.0 पर पहुंच गया, जो बीते 14 महीनों का उच्च स्तर है।
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भारत के विनिर्माण और सेवा क्षेत्र की गतिविधियों ने जोरदार रफ्तार पकड़ी है। एचएसबीसी फ्लैस इंडिया कम्पोजिट आउटपुट इंडेक्स जून में बढ़कर 61.0 पर पहुंच गया। यह पिछले 14 महीनों में सबसे उच्च स्तर है। मई महीने में यह 59.3 दर्ज हुआ था। एचएसबीसी फ्लैश इंडिया कम्पोजिट आउटपुट इंडेक्स विनिर्माण और सेवाओं के संयुक्त उत्पादन में महीने-दर-महीने परिवर्तनों को ट्रैक करता है।
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निर्यात ऑर्डरों में हुई वृद्धि
एचएसबीसी फ्लैश परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, भारतीय व्यवसायों ने जून में निर्यात ऑर्डरों में तीव्र वृद्धि दर्ज की। यह 2014 के रिकॉर्ड वृद्धि के बाद से सबसे मजबूत उछाल है। इससे पता चलता है कि कंपनियां बढ़ती घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मांग को पूरा करने के लिए उत्पादन बढ़ा रही हैं।
मजबूत वैश्वक मांग ने डाला असर- भंडारी
एचएसबीसी के मुख्य भारत अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी ने कहा कि भारत के फ्लैश पीएमआई ने जून में मजबूत वृद्धि का संकेत दिया। नए निर्यात ऑर्डरों ने निजी क्षेत्र की व्यावसायिक गतिविधि को बढ़ावा देना जारी रखा, विशेष रूप से विनिर्माण क्षेत्र में। इस बीच, मजबूत वैश्विक मांग और बढ़ते बैकलॉग के संयोजन ने निर्माताओं को भर्ती बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। भंडारी ने कहा कि मई से जून के दौरान थोड़ी कमजोरी के बावजूद सेवा क्षेत्र में भी रोजगार वृद्धि स्वस्थ है। अंत में विनिर्माण और सेवा दोनों फर्मों के लिए इनपुट और आउटपुट की कीमतों में वृद्धि जारी रही, लेकिन वृद्धि की दरों में नरमी के संकेत दिखे।
विनिर्माण पीएमआई 61.5 पर पहुंचा
विनिर्माण पीएमआई आउटपुट इंडेक्स मई में 60.3 से जून में चढ़कर 61.5 पर पहुंच गया। समग्र विनिर्माण पीएमआई बढ़कर 58.4 पर पहुंच गया। यह अप्रैल 2024 के बाद का सबसे अच्छा स्तर है, जो बेहतर परिचालन स्थितियों का संकेत देता है। बढ़ती मांग, दक्षता में सुधार और प्रौद्योगिकी निवेशों के समर्थन से सेवा क्षेत्र की गतिविधि में भी तेजी आई। सर्वेक्षण के उत्तरदाताओं ने एशिया, यूरोप, मध्य पूर्व और अमेरिका सहित क्षेत्रों से मजबूत अंतरराष्ट्रीय मांग का उल्लेख किया। विनिर्माण निर्यात में और सेवा क्षेत्र के निर्यात में भी वृद्धि हुई लेकिन धीमी गति से।