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Make in India 2.0: निर्यात बढ़ाने-आयात घटाने के लिए 24 क्षेत्रों पर सरकार का जोर, DPIIT बना रहा यह एक्शन प्लान

Wed, 27 Dec 2023 06:18 AM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जलज मिश्रा Updated Wed, 27 Dec 2023 06:18 AM IST
सार

फर्नीचर, एसी, चमड़ा, तैयार खाना, मछली पालन, कृषि उत्पाद, ऑटो कलपुर्जे, एल्यूमीनियम, कृषि रसायन, इस्पात, कपड़ा, ईवी कलपुर्जे, इथेनॉल, इलेक्ट्रॉनिक्स, चीनी मिट्टी की चीजें, सेट टॉप बॉक्स, रोबोटिक्स, टीवी, क्लोज सर्किट कैमरे, खिलौने, ड्रोन, चिकित्सा उपकरण, खेल के सामान।

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Make in India 2.0 Government emphasis on 24 sectors to increase exports and reduce imports
make in india - फोटो : istock

विस्तार

घरेलू विनिर्माण व निर्यात बढ़ाने के साथ आयात घटाने के लिए उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) 24 उप-क्षेत्रों के साथ काम कर रहा है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने कहा, मेक इन इंडिया 2.0 के तहत भी 27 क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। डीपीआईआईटी 15 विनिर्माण क्षेत्रों के लिए एक्शन प्लान बना रहा है। डीपीआईआईटी जिन क्षेत्रों के साथ काम कर रहा है, वे भारतीय उद्योगों की ताकत हैं। उन्हें प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त, निर्यात संभावना और बढ़ी रोजगार क्षमता को ध्यान रखकर चुना गया है। वाणिज्य विभाग सेवाओं से जुड़े 12 क्षेत्रों के साथ योजना बना रहा है।

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इन क्षेत्रों पर ध्यान
फर्नीचर, एसी, चमड़ा, तैयार खाना, मछली पालन, कृषि उत्पाद, ऑटो कलपुर्जे, एल्यूमीनियम, कृषि रसायन, इस्पात, कपड़ा, ईवी कलपुर्जे, इथेनॉल, इलेक्ट्रॉनिक्स, चीनी मिट्टी की चीजें, सेट टॉप बॉक्स, रोबोटिक्स, टीवी, क्लोज सर्किट कैमरे, खिलौने, ड्रोन, चिकित्सा उपकरण, खेल के सामान।

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इस्पात : पीएलआई 2.0 योजना
केंद्रीय मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते ने कहा, सरकार पीएलआई योजना 2.0 पर काम कर रही है। साथ ही 2024 में इस्पात के लिए पर्याप्त कच्चे माल की आपूर्ति सुनिश्चित करने के तरीकों पर भी विचार कर रही है। मजबूत आर्थिक वृद्धि से इस्पात की मांग बढ़ेगी, हालांकि कंपनियां कई देशों के तनाव के चलते अनिश्चितताओं के बीच बढ़ते आयात और कच्चे माल की ऊंची कीमतों को लेकर चिंतित हैं। भारत ने 2030 तक 30 करोड़ टन इस्पात विनिर्माण क्षमता का लक्ष्य रखा है। वर्तमान में देश की क्षमता करीब 16.1 करोड़ टन है।

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पीएलआई : 14 क्षेत्र के 746 आवेदन मंजूर
दवा, एलईडी, एसी और इलेक्ट्रिक उत्पादों जैसे 14 क्षेत्रों के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजनाओं के तहत नवंबर तक 746 आवेदनों को मंजूरी मिली है। विनिर्माण क्षमताओं और निर्यात को बढ़ाने के लिए 1.97 लाख करोड़ रुपये के खर्च के साथ 14 क्षेत्रों के लिए पीएलआई की घोषणा की गई थी। वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, लाभार्थी कंपनियों ने 24 राज्यों के 150 से अधिक जिलों में इकाइयां स्थापित की हैं। सितंबर तक 95,000 करोड़ से अधिक का निवेश हुआ है। इससे 7.80 लाख करोड़ का उत्पादन या बिक्री हुई है। 6.4 लाख से अधिक रोजगार मिले हैं।

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