G20: केवाईसी की लागत 10 रुपये प्रति ग्राहक से घटकर 5 रुपये हुई, दो हजार की जगह सिर्फ 8 रुपये खर्च
भारत के अकाउंट एग्रीगेटर (एए) ढांचे ने डाटा के बुनियादी ढांचे को मजबूत किया। नागरिकों का अपने डाटा पर खुद नियंत्रण बढ़ा। डाटा पर काम कर रहीं कंपनियां अब केवल उन्हीं से उनके डाटा उपयोग करने की इलेक्ट्रॉनिक सहमति ले सकती हैं।
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जी-20 के लिए तैयार नीतिगत रिपोर्ट में विश्व बैंक ने कहा कि भारत में डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) ने भारत में निजी क्षेत्र के संस्थानों की कार्यकुशलता बढ़ाई और उनके खर्च कम किए। काम जटिल से आसान हुए, कारोबार करने में लगने वाला समय भी बच रहा है।
कई गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थानों (एनबीएफसी) में एसएमई को ऋण देने का कन्वर्जन रेट (उपभोक्ता हासिल करने की दर) 8 प्रतिशत सुधरी, अवमूल्यन दर में 65 प्रतिशत बचत हो रही है और फ्रॉड पकड़ने से जुड़े खर्च भी 66 प्रतिशत कम हुए। बैंकों के लिए तो और भी फायदे हैं, नए ग्राहक को अपने उत्पाद की जानकारी देने का खर्च 2,000 रुपये से घटकर सिर्फ 8.30 रुपये रह गया है। केवाईसी का न केवल अनुपालन आसान हुआ, लागत भी 10 रुपये प्रति ग्राहक से घटकर 5 रुपये रह गई। उनके लिए कम आय वर्ग के नए ग्राहकों को सेवा देना आसान हुआ है, वे इस सेवा व नए उत्पादों से मुनाफा कमा रहे हैं।
अकाउंट एग्रीगेटर: नागरिकों को अपने निजी डाटा पर अधिकार
भारत के अकाउंट एग्रीगेटर (एए) ढांचे ने डाटा के बुनियादी ढांचे को मजबूत किया। नागरिकों का अपने डाटा पर खुद नियंत्रण बढ़ा। डाटा पर काम कर रहीं कंपनियां अब केवल उन्हीं से उनके डाटा उपयोग करने की इलेक्ट्रॉनिक सहमति ले सकती हैं। आरबीआई इस ढांचे के लिए नियम बनाता है। इसके तहत 11.3 करोड़ खातों द्वारा डाटा साझा करने की अनुमतियां दी गईं। अकेले जून 2023 में 29 लाख लोगों ने यह अनुमतियां दीं, यानी रोजाना औसतन 97 हजार अनुमतियां। भारत ने डाटा सशक्तिकरण और संरक्षण प्रणाली यानी डेपा के जरिये नागरिकों का अपने निजी डाटा पर नियंत्रण बढ़ाया।
बचाया गया हर रुपया विकसित देश बनने की ओर एक कदम : शाह
विश्व बैंक ने दर्ज किया है कि पीएम मोदी के नेतृत्व में हमारे देश ने सामान्य रास्ते से लगने जा रहे 47 साल के बजाय महज 6 साल में 80% वित्तीय समावेशन हासिल कर लिया है। यह जी20 रिपोर्ट स्वीकार करती है कि पीएम मोदी द्वारा तैयार किए मजबूत जनधन, आधार और मोबाइल के त्रिवेणी ढांचे ने करोड़ों लोगों को मजबूत किया। हमारे देश ने 3,300 करोड़ डॉलर प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) प्रणाली से बचाए। देश द्वारा बचाया गया हर रुपया अमृत काल में पूरी तरह विकसित देश बनने के हमारे लक्ष्य की ओर एक कदम है
सरकार से जनता को भुगतान
डीपीआई की मदद से भारत ने 10 साल में सरकार से जनता (जी2पी) को भुगतान के लिए दुनिया का सबसे बड़ा नेटवर्क बनाया। केंद्र के 53 मंत्रालय 312 योजनाओं के लाभार्थियों को 36,100 करोड़ डॉलर का भुगतान कर रही है। इससे सरकार ने 2022 में 3,300 करोड़ डॉलर बचाए, यह देश की जीडीपी का 1.14% है।