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Kisan Rail Subsidy: फूड प्रोसेसिंग मिनिस्ट्री ने अतिरिक्त लागत देने से मना किया, रेलवे ने 71 करोड़ राइट ऑफ किए

Mon, 12 Sep 2022 10:22 PM IST
विवेक दास बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विवेक दास Updated Mon, 12 Sep 2022 10:22 PM IST
सार

Kisan Rail Subsidy: रेलवे ने किसान रेल सब्सिडी योजना के तहत सब्सिडी के रूप में 121.86 करोड़ रुपये खर्च किए थे। यह राशि वित्तीय वर्ष 2021-22 में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय (MoFPI) की ओर से किसान समर्थक पहल के रूप में स्वीकृत 50 करोड़ रुपये की राशि के दोगुने से भी अधिक है।

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Kisan Rail Subsidy: Food Processing Ministry refused to pay extra cost, had to write off 71 crores
Indian Railway - फोटो : Istock

विस्तार

सरकार से जुड़े दस्तावेजों से पता चलता है कि खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय ने 50 करोड़ रुपये की सीमा का हवाला देते हुए किसान रेल सेवा का अतिरिक्त लागत का खर्चा उठाने से इनकार कर दिया था। इससे रेलवे को पिछले वित्त वर्ष में किसान रेल सेवाओं पर अतिरिक्त सब्सिडी के रूप में खर्च किए गए 71.86 करोड़ रुपये को राइट ऑफ करने का फैसला लेना पड़ा है।

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आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार रेलवे ने इस योजना के तहत सब्सिडी के रूप में 121.86 करोड़ रुपये खर्च किए थे। यह राशि वित्तीय वर्ष 2021-22 में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय (MoFPI) की ओर से किसान समर्थक पहल के रूप में स्वीकृत 50 करोड़ रुपये की राशि के दोगुने से भी अधिक है।

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एमओएफपीआई की ओर से 50 करोड़ रुपये से अधिक की अतिरिक्त राशि देने से मना करने पर रेल मंत्रालय को को 71.86 करोड़ रुपये के अतिरिक्त खर्च को राइट ऑफ करने के लिए मजबूर होना पड़ा है।  बता दें कि  'ऑपरेशन ग्रीन्स - टॉप टू टोटल' योजना को लागू करने के लिए नोडल मंत्रालय फूड प्रोसेसिंग मिनिस्ट्री ही थी इसी के तहत किसान रेल संचालित होती है। इस मंत्रालय ने बकाया नहीं चुकाने का निर्णय लिया था।

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क्या थी किसान रेल सब्सिडी योजना?

इस योजना के तहत किसानों और व्यवसायियों को 50 प्रतिशत सब्सिडी के साथ फलों और सब्जियों के ट्रांसपोर्टेशन की सुविधा दी गई थी। पिछले वित्तीय वर्ष में खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय की ओर से इसके लिए 50 करोड़ रुपये का प्रावधान किया था। इस राशि की प्रतिपूर्ति फूड प्रोसेसिंग मिनिष्ट्री की ओर से किया गया। इसके ऊपर की राशि का वहन करने में मंत्रालय ने असमर्थता जता दी थी।

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