बैंक और बड़े कॉर्पोरेट फंड में ही निवेश बेहतर
- 50 फीसदी से ज्यादा पैसा डेट फंड में लगा है म्यूचुअल फंड हाउसों का
- 26 हजार करोड़ रूपये निवेशकों का फंस गया है फ्रैंकलिन के फंड में
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अमेरिकी कंपनी फ्रैंकलिन टेंपलटन की तरफ से निश्चित आय वाली 6 डेट स्कीमों को बंद करने का फैसला समूचे म्यूचुअल फंड उद्योग के भरोसे को डिगाने वाला कदम है। पिछले कुछ वर्षों में डेट फंड में निवेश आकर्षक रहा है क्योंकि यहां जोखिम कम रहता है। इसी से जुड़े कुछ सवालों का जवाब देती प्रमोद तिवारी की रिपोर्ट-
फंड की एएमसी को दें तरजीह
शेयर बाजार के जानकारों का कहना है कि फ्रैंकलिन टेंपलटन के इस फैसले के बाद भी म्यूचुअल फंड उद्योग में कोई बड़ा संकट नहीं आने वाला है, लेकिन इतना तो तय है कि इससे निवेशकों के भरोसे में कमी आई है। मौजूदा हालात में अगर किसी म्यूचुअल फंड योजना में निवेश करना है तो उसकी संपत्ति प्रबंधन कंपनी (एएमसी) को तरजीह देनी चाहिए।
मसलन, बैंकों या बड़े कॉर्पोरेट हाउस से जुड़े फंडों में पैसे लगाना ज्यादा सुरक्षित माना जा सकता है। इसका कारण यह है कि अगर इन फंडों की मार्केट क्रेडिट गिरती है या निकासी बढ़ती है, तो उनकी मूल या पैरेंट कंपनियां इसमें पैसा डाल सकती हैं। हालांकि, ऐसा कोई कानून नहीं है लेकिन माना जाता है की ये कंपनियां अपनी साख बचाने के लिए अनुषंगियों को मुश्किल से निकाल लेंगी।
इसलिए महत्वपूर्ण है एएमसी की भूमिका
वित्त विशेषज्ञ अभीक बरुआ का कहना है कि 2008 कि मंदी के बाद भी ऐसे ही हालात बने थे। तब उन म्यूचुअल फंडों को उबरने में बेहतर सफलता मिली थी जिनकी मूल या पैरेंट कंपनियां मजबूत थीं। उदहारण के लिए अगर एसबीआई म्यूचुअल फंड की इकाइयां बाजार में बिकनी बंद हो जाएं या उनकी बिकवाली बढ़ जाए और निवेशकों को लौटाने के लिए फंड हाउस के पास पैसे न हों तो स्टेट बैंक इसमें पैसे डाल सकता है और निवेशकों का पैसा डूबेगा नहीं। इसी तरह, बैंक ऑफ बड़ौदा के फंड, कोटक महिंद्रा के म्यूचुअल फंड या रिलायंस और एलएंडटी जैसे कॉर्पोरेट हाउस के फंड भी निवेश के लिहाज से सुरक्षित हैं।
तीन वजहों से बढ़ी फंड हाउस की चिंता
- 2018 में आईएलएंडएफएस के डिफॉल्ट करने के बाद से कई फंड हाउस के निवेश पर असर पड़ा। एनएवी 5 फीसदी तक घटी।
- फ्रेंक्लिन के 6 डेट फंड बंद करने के बाद तो निवेशकों का पैसा मिलना ही रुक गया। इसमें करीब 26 हजार करोड़ की राशि फंसी हुई है।
- इन 6 फंडों में से 2 अल्ट्रा शॉर्ट टर्म हैं जिनपर जोखिम आना चिंता का विषय है। क्रेडिट फंड या लॉन्ग टर्म फंड में जोखिम होना संभव है लेकिन शार्ट टर्म फंड पर ऐसा होना निवेश के लिहाज से घातक है।
अब ये सावधानियां जरूरी
- ताजा हालात में अन्य निवेशक भी डेट फंड से निकासी पर जोर दे सकते हैं, ऐसे में आने वाले कुछ सप्ताह तक बाजार पर सतर्कता से नजर बनाये रखें।
- जल्दबाजी में अपने डेट फंड को नुकसान पर न बेचें, बेहतर क्रेडिट क्वालिटी वाले फंड पर टिके रहें।
- अपने सभी डेट म्यूचुअल फंड की गहन समीक्षा करें और देखें कि किस पोर्टफोलियो में जोखिम है।
- लिक्विड और ओवरनाइट फंड्स के अतिरिक्त मनी मार्केट फंड्स, छोटी अवधि के फंड्स, कॉरपोरेट बॉन्ड फंड्स, पीएसयू और बैंकिंग फंड्स, गिल्ट फंड्स और हाई-क्वालिटी पोर्टफोलियो वाली योजनाओं में पैसे लगा सकते हैं।
बदलनी होगी रणनीति
फण्ड हाउसों की एनएवी घटने के बाद निवेशकों को पैसे लगाते समय सतर्कता बरतनी होगी। अगर उन्हें लॉन्ग टर्म या क्रेडिट फण्डों में निवेश करना है तो इस बात का ख्याल रखें कि पैरेंट कंपनी की वित्तीय स्थिति मजबूत हो।
-कुंज बंसल, शेयर बाजार और निवेश विशेषज्ञ