{"_id":"60b4018c0de682248c2d04cf","slug":"indians-took-loans-for-education-and-treatment-for-children-during-the-pandemic","type":"story","status":"publish","title_hn":"कोरोना की मार: महामारी में बच्चों की पढ़ाई और इलाज के लिए लिया सबसे ज्यादा कर्ज","category":{"title":"Business Diary","title_hn":"बिज़नेस डायरी","slug":"business-diary"}}
कोरोना की मार: महामारी में बच्चों की पढ़ाई और इलाज के लिए लिया सबसे ज्यादा कर्ज
Mon, 31 May 2021 02:50 AM IST
Jeet Kumar
एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली।
Published by: Jeet Kumar
Updated Mon, 31 May 2021 02:50 AM IST
सार
- 77 फीसदी भारतीयों ने खर्च पूरे करने के लिए कर्ज लिया
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर....
- फोटो : pixabay
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
महामारी के दौरान अपने खर्चे पूरे करने के लिए करीब 77 फीसदी भारतीयों को कर्ज लेना पड़ा है। इसमें सबसे ज्यादा हिस्सेदारी चिकित्सा और बच्चों की पढ़ाई की है। उपभोक्ता फाइनेंस कंपनी नोरी ने अपने सर्वे में बताया कि 28 फीसदी पर्सनल लोन मेडिकल इमरजेंसी के लिए, जबकि 25 फीसदी घरों की जरूरतों जैसे बच्चों की पढ़ाई, घर का रेनोवेशन और शादी के खर्च के लिए होते हैं।
विज्ञापन
रिपोर्ट में कहा गया है कि ज्यादातर लोग ठीक-ठाक सैलरी कमाते हैं, जिससे केवल उनका रोजाना का खर्च पूरा होता है और अचानक होने वाले खर्च के लिए अतिरिक्त संसाधन नहीं होते हैं। ऐसे में 77 फीसदी लोग असुरक्षित पर्सनल लोन का इस्तेमाल करते हैं।
विज्ञापन
महामारी के दौरान 41 फीसदी लोगों ने कर्जदाता को चुनने के लिए ब्याज दर को मुख्य मापदंड बताया, जबकि 30 फीसदी ने लोन की अवधि और 20 फीसदी ने राशि मिलने में लगने वाले समय को प्राथमिकता दी। ज्यादातर लोगों के पास पारंपरिक तरीकों जैसे बचत खाते, फिक्स्ड डिपॉजिट और सोने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।
विज्ञापन
इसमें से 40 फीसदी लोग सोने को निवेश के लिए प्राथमिकता देते हैं और केवल 12 फीसदी लोगों के पास इक्विटी और म्यूचुअल फंड्स जैसे निवेश विकल्प थे।