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UN: भारत डिजिटल क्रांति में अग्रणी, वित्तीय पहुंच बढ़ाने की यात्रा दूसरे देशों के लिए एक मिसाल
Fri, 05 May 2023 01:16 PM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क
Published by: नितिन गौतम
Updated Fri, 05 May 2023 01:16 PM IST
सार
रुचिरा कंबोज ने बताया कि जन-धन खाता, आधार डिजिटल आईडी, मोबाइल बैंकिंग और डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर जैसी योजनाओं से समाज के निचले तबके को वित्तीय व्यवस्था में शामिल किया गया है।
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रुचिरा कंबोज, संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी राजदूत।
- फोटो : ANI
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विस्तार
संयुक्त राष्ट्र के वरिष्ठ अधिकारियों एवं अर्थशास्त्रियों ने भारत की डिजिटल यात्रा की तारीफ की। उन्होंने कहा, भारत डिजिटल क्रांति में दुनिया की अगुवाई कर रहा है। वित्तीय समावेशन यानी लोगों तक वित्तीय सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने की उसकी यात्रा अन्य विकासशील देशों के लिए मिसाल बन सकती है। संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज ने ‘वित्तीय समावेशन पर भारत की गोलमेज चर्चा’ में कहा, भारत वित्तीय समावेशन को गंभीरता से लेता है। इससे लोगों का सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण हुआ है।
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उन्होंने कहा, दुनिया एजेंडा-2030 और सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) के तहत निर्धारित मुकाम हासिल करने की दिशा में आधे रास्ते में है। दुर्भाग्य से अभी तक का रिपोर्ट कार्ड अच्छा नहीं है। रिपोर्ट बताती है कि एसडीजी के तहत निर्धारित महज 12 फीसदी लक्ष्य ट्रैक पर हैं। 50 फीसदी लक्ष्यों पर प्रगति बहुत धीमी है। इसे देखते हुए वित्तीय समावेशन की अहमियत बढ़ जाती है। यह समावेशी और समग्र आर्थिक विकास सुनिश्चित करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
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अन्य देशों को बहुत कुछ दे सकता है भारत : पनगढ़िया
नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया ने चर्चा में कहा कि भारत ने वित्तीय समावेशन के विचार को आकार देने में ‘अग्रणी भूमिका’ निभाई है। भारत के जी20 शेरपा रह चुके पनगढ़िया ने कहा, वित्तीय समावेशन, आर्थिक समावेशन और विकास...ये साथ-साथ चलते हैं। साथ ही, स्वास्थ्य और एसडीजी जैसी चीजों को प्रभावित करते हैं। ये सभी बहुत ही अंतर-संबंधित और परस्पर जुड़े हुए तत्व हैं। भारत अपने अनुभव के बलबूते अन्य विकासशील देशों को बहुत कुछ दे सकता है।
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भारत की कहानी प्रोत्साहित करने वाली : मोनारी
चर्चा में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) की अवर महासचिव एवं सहायक प्रशासक उषा राव-मोनारी ने कहा, वह ‘भारत की कहानी’ से बहुत प्रोत्साहित हैं। आप जब भारत की बात कर रहे हैं तो मैं गर्व से कहना चाहती हूं कि भारत डिजिटल क्रांति की अगुवाई कर रहा है। दुनिया में रियल टाइम में होने वाले करीब 40 फीसदी डिजिटल भुगतान भारत में होते हैं। मोनारी ने कहा, मजबूत और नागरिक केंद्रित डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचा कई राष्ट्रीय लक्ष्यों को हासिल करने में प्रमुख भूमिका निभाता है।
मोदी सरकार की नीतियों ने बदली तस्वीर
कंबोज ने कहा कि मोदी सरकार की ओर से शुरू की गई विभिन्न नीतियों ने लाखों लोगों को औपचारिक वित्तीय प्रणाली का हिस्सा बनाया है। इससे लोग सशक्त हुए हैं। आंकड़े इसकी गवाही देते हैं। 2009 में भारत में सिर्फ 17 फीसदी वयस्कों के पास बैंक खाते थे। 15 फीसदी लोग डिजिटल भुगतान करते थे। 25 लोगों में से सिर्फ एक के पास यूनिक आईडी दस्तावेज थे और 37% भारतीयों के पास ही मोबाइल फोन थे। अब इन संख्याओं में भारी वृद्धि देखी गई है। आज एक अरब से अधिक लोगों के पास डिजिटल आईडी दस्तावेज हैं। 80 फीसदी से अधिक के पास बैंक खाते हैं। 2022 तक हर महीने 600 करोड़ से अधिक डिजिटल भुगतान लेनदेन हुए। जनधन खाता, आधार डिजिटल आईडी, मोबाइल बैंकिंग और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण ने समाज के हाशिये पर पड़े वर्गों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया है। नवंबर, 2022 तक कई बड़ी केंद्रीय योजनाओं में 10 अरब से अधिक सफल लेनदेन के जरिये करीब 95 अरब डॉलर का भुगतान किया है।
खाद्य सुरक्षा पर स्थायी समाधान ढूंढे डब्ल्यूटीओ : भारत
भारत ने विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) की फरवरी, 2024 में होने वाली 13वीं मंत्री-स्तरीय बैठक में खाद्य सुरक्षा के लिए सार्वजनिक भंडारण के मुद्दे का एक स्थायी समाधान ढूंढने को कहा है। जिनेवा स्थित एक अधिकारी ने कहा, भारत ने 3-4 मई, 2023 को हुए एक विशेष सत्र में सार्वजनिक भंडारण (पीएसएच) और विशेष सुरक्षात्मक प्रणाली (एसएसएम) से अलग वैकल्पिक खाद्य सुरक्षा समाधानों के लिए दी गई दलीलें खारिज कर दीं। भारत ने खाद्य उत्पादों पर महंगाई और आर्थिक कारकों के प्रभाव को दर्शाने के लिए बाहरी कीमतों की नए सिरे से गणना करने की जरूरत पर भी बल दिया।