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Tariffs: भारत-अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते के लिए पांचवें दौर की वार्ता पूरी, सामने आया अपडेट
Sat, 19 Jul 2025 11:15 AM IST
कुमार विवेक
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कुमार विवेक
Updated Sat, 19 Jul 2025 11:15 AM IST
सार
टैरिफ की ऊंची दरों को पहले 90 दिनों के लिए 9 जुलाई तक और फिर 1 अगस्त तक के लिए स्थगित कर दिया गया। इस बीच अमेरिका, कई देशों के साथ व्यापार समझौतों पर बातचीत कर रहा है। भारत भी अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता को अंतिम रूप देने की कोशियों में जुटा है। इस पर हालिया अपडेट क्या हैं, आइए जानें।
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भारत अमेरिका व्यापार समझौता (प्रतीकात्मक)
- फोटो : एडॉब स्टॉक
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विस्तार
भारत और अमेरिका की टीमों ने 17 जुलाई को वाशिंगटन में प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) के लिए पांचवें दौर की वार्ता पूरी कर ली है। यह वार्ता वाशिंगटन में चार दिनों (14-17 जुलाई) तक चली। एक अधिकारी ने इसकी जानकारी दी है। अधिकारी ने कहा, ‘‘भारतीय टीम वापस आ रही है।’’ भारत के मुख्य वार्ताकार और वाणिज्य विभाग में विशेष सचिव राजेश अग्रवाल वार्ता दल का नेतृत्व कर रहे हैं।
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ये विचार-विमर्श महत्वपूर्ण हैं क्योंकि दोनों पक्ष 1 अगस्त से पहले अंतरिम व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने पर विचार कर रहे हैं, जो भारत (26 प्रतिशत) सहित दर्जनों देशों पर लगाए गए ट्रम्प टैरिफ के निलंबन की आखिरी तारीख है। इस साल 2 अप्रैल को, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इन उच्च पारस्परिक शुल्कों की घोषणा की थी।
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टैरिफ की ऊंची दरों को पहले 90 दिनों के लिए 9 जुलाई तक और फिर 1 अगस्त तक के लिए स्थगित कर दिया गया। इस बीच अमेरिका, कई देशों के साथ व्यापार समझौतों पर बातचीत कर रहा है। समझा जाता है कि पांचवें दौर की वार्ता में कृषि और ऑटोमोबाइल से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। गैर-बाजार अर्थव्यवस्थाओं और एससीओएमईटी (विशेष रसायन, जीव, सामग्री, उपकरण और प्रौद्योगिकी) से निपटने के तरीकों पर भी चर्चा हुई।
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कृषि और डेयरी उत्पादों पर शुल्क में रियायत की अमेरिकी मांग पर भारत ने अपना रुख कड़ा कर लिया है। डेयरी क्षेत्र में मुक्त व्यापार समझौते में भारत ने अब तक अपने किसी भी व्यापारिक साझेदार को कोई शुल्क रियायत नहीं दी है। कुछ किसान संगठनों ने सरकार से आग्रह किया है कि व्यापार समझौते में कृषि से जुड़े किसी भी मुद्दे को शामिल न किया जाए।
भारत इस अतिरिक्त शुल्क (26 प्रतिशत) को हटाने की मांग कर रहा है। वह स्टील और एल्युमीनियम (50 प्रतिशत) और ऑटो (25 प्रतिशत) क्षेत्रों पर शुल्क में ढील की भी मांग कर रहा है। इनके विरुद्ध, भारत ने विश्व व्यापार संगठन (WTO) के मानदंडों के तहत प्रतिशोधात्मक शुल्क लगाने का अपना अधिकार सुरक्षित रखा है। प्रस्तावित व्यापार समझौते में देश श्रम-प्रधान क्षेत्रों जैसे वस्त्र, रत्न एवं आभूषण, चमड़े के सामान, परिधान, प्लास्टिक, रसायन, झींगा, तिलहन, अंगूर और केले के लिए शुल्क रियायत की भी मांग कर रहा है।
दूसरी ओर, अमेरिका कुछ औद्योगिक वस्तुओं, ऑटोमोबाइल, विशेषकर इलेक्ट्रिक वाहनों, वाइन, पेट्रोकेमिकल उत्पादों, कृषि वस्तुओं, डेयरी उत्पादों, सेब, वृक्ष नट्स और आनुवंशिक रूप से संशोधित फसलों पर शुल्क रियायत चाहता है। दोनों देश प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) के पहले चरण के लिए बातचीत इस साल पतझड़ (सितंबर-अक्तूबर) तक पूरी करना चाहते हैं। उससे पहले, वे एक अंतरिम व्यापार समझौते पर भी विचार कर रहे हैं। इस वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में अमेरिका को भारत का वस्तु निर्यात 22.8 प्रतिशत बढ़कर 25.51 अरब डॉलर हो गया, जबकि आयात 11.68 प्रतिशत बढ़कर 12.86 अरब डॉलर हो गया।