2022 तक 10 फीसदी तेल आयात घटाने का लक्ष्य: प्रधान
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केंद्र सरकार 2022 तक भारत की तेल आयात निर्भरता को घटाने की कोशिशों में जुटी हुई है। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बुधवार को बताया कि सरकार ने 10 फीसदी तक आयात घटाने का लक्ष्य रखा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इससे पहले मार्च 2015 में ऊर्जा संगम सम्मेलन में अपने संबोधन में कहा था कि देश की तेल आयात निर्भरता को 77 फीसदी (2013-2014) से घटाकर 2022 तक 67 फीसदी तक लाना होगा। लेकिन तेजी से बढ़ती खपत और सीमित उत्पादन के चलते तेल आयात निर्भरता 2017-18 में 82.9 फीसदी से बढ़कर 2018-19 में 83.7 फीसदी हो गई। हालांकि पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बुधवार को कहा, ‘हमारे प्रयास जारी हैं और हम तेल आयात निर्भरता को कम करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।’
उन्होंने कहा कि 2022 तक 10 फीसदी के लक्ष्य को हासिल कर लिया जाएगा। सरकार जैव ईंधन का इस्तेमाल बढ़ाने पर जोर दे रही है। साथ ही घरेलू कच्चा तेल और गैस उत्पादन को भी बढ़ाने के प्रयास जारी हैं ताकि आयात को कम किया जा सके। उन्होंने कहा कि पेट्रोल से एथेनॉल निकालने से भी ऊर्जा की जरूरतें बंटेंगी और तेल आयात पर इसका असर पड़ेगा।
पेट्रोलियम मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक तेल की खपत 2015-16 में 18.47 करोड़ टन से बढ़कर 2016-17 में 19.46 करोड़ टन व उसके बाद अगले साल यह बढ़कर 20.62 करोड़ टन हो गया। 2018-19 में यह मांग 2.6 फीसदी बढ़कर 21.16 करोड़ टन हो गया।
इस्पात की खपत में होगा भारी इजाफा
अंतरराष्ट्रीय क्रोमियम विकास संघ के एक आयोजन में केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि देश में इस्पात की खपत में इजाफा होने की उम्मीद है। उन्होंने निवेशकों से आगे आकर सरकार के साथ देश की विकास यात्रा में भागीदार बनने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि इस्पात क्षेत्र सरकार की विभिन्न नीतियों और उद्योग की उद्यमशीलता के सहारे जीवंत, कुशल, पर्यावरण अनुकूल और विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन रहा है, जो अच्छा संकेत हैं। उन्होंने कहा देश की अर्थव्यवस्था और इस्पात की खपत में एक मजबूत संबंध है।