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SBI Research: वैश्विक संकटों के बावजूद अर्थव्यवस्था की मजबूत उड़ान, FY2027 में 6.6% जीडीपी ग्रोथ का अनुमान
Mon, 11 May 2026 10:13 AM IST
कुमार विवेक
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कुमार विवेक
Updated Mon, 11 May 2026 10:13 AM IST
सार
वैश्विक संकटों और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बावजूद FY27 में भारत की जीडीपी 6.6% की दर से बढ़ेगी। SBI रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार मजबूत खपत और क्रेडिट ग्रोथ से अर्थव्यवस्था को मिलेगा सहारा। पूरी रिपोर्ट पढ़ें।
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भारतीय अर्थव्यवस्था।
- फोटो : amarujala
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विस्तार
वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था लगातार अपना लचीलापन दिखा रही है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) की हालिया रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) में भारत की जीडीपी विकास दर 6.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है। यह आंकड़ा इस बात का स्पष्ट संकेत है कि पश्चिमी एशिया के संकट और अन्य बाहरी अनिश्चितताओं के बावजूद घरेलू खपत और मजबूत आर्थिक बुनियाद देश को विकास के पथ पर लगातार आगे बढ़ा रही है।
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खपत और विकास दर का मजबूत आधार
पिछले वित्त वर्ष (FY26) के लिए जीडीपी विकास दर 7.5 प्रतिशत रहने की उम्मीद है, जिसमें चौथी तिमाही में वास्तविक जीडीपी विकास दर 7.2 प्रतिशत के करीब रह सकती है। उच्च आवृत्ति वाले आर्थिक आंकड़े यह दर्शाते हैं कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद विकास की गति मजबूत बनी हुई है। भारतीय स्टेट बैंक के समूह मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. सौम्य कांति घोष के अनुसार, कृषि और गैर-कृषि गतिविधियों से मिलने वाले सकारात्मक संकेतों के कारण ग्रामीण खपत काफी मजबूत बनी हुई है। इसके साथ ही, राजकोषीय प्रोत्साहन के समर्थन से शहरी खपत में भी पिछले त्योहारी सीजन के बाद से लगातार तेजी देखी जा रही है, जो आर्थिक वृद्धि को सहारा दे रही है।
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बैंक क्रेडिट ग्रोथ में शानदार उछाल
अर्थव्यवस्था में मांग और खपत बढ़ने का सीधा असर बैंकिंग सेक्टर के क्रेडिट (ऋण) वितरण पर पड़ा है। वित्त वर्ष 2026 में अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों की क्रेडिट ग्रोथ बढ़कर 16.1 प्रतिशत हो गई, जो इससे पिछले वित्त वर्ष में 11.0 प्रतिशत के स्तर पर थी। कुल वृद्धिशील ऋण वृद्धि 29.5 लाख करोड़ रुपये रही, जिसमें सरकार द्वारा जीएसटी के माध्यम से खपत को दिए गए प्रोत्साहन के कारण दूसरी छमाही में 24.5 लाख करोड़ रुपये का भारी ऋण वितरण शामिल था। एसबीआई रिसर्च का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही में क्रेडिट ग्रोथ मजबूत बनी रहेगी, लेकिन उच्च आधार प्रभाव के कारण दूसरी छमाही में इसमें मामूली गिरावट आ सकती है, जिससे पूरे वर्ष के लिए ऋण वृद्धि 13 से 14 प्रतिशत के बीच रह सकती है।
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कच्चे तेल की कीमतों का आर्थिक प्रभाव
रिपोर्ट में वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों के आर्थिक प्रभाव का एक व्यापक गणितीय आकलन भी पेश किया गया है। एसबीआई के अर्थशास्त्रियों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में प्रति 10 डॉलर प्रति बैरल की वृद्धि होने पर देश का चालू खाता घाटा (सीएडी) 35 आधार अंक बढ़ सकता है। इसके अलावा, महंगाई में 35-40 आधार अंक की वृद्धि और जीडीपी में 20-25 आधार अंक की कमी आ सकती है। वर्तमान में मई महीने में कच्चे तेल की कीमतें 105 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं। रिपोर्ट में यह अनुमान जताया गया है कि आगे चलकर कच्चे तेल का औसत मूल्य 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहेगा, और इसी गणित को आधार बनाकर वित्त वर्ष 2027 के लिए जीडीपी विकास दर 6.6 प्रतिशत आंकी गई है।
एसबीआई रिसर्च की यह रिपोर्ट इस बात की पुष्टि करती है कि बाहरी झटकों के बावजूद भारत की घरेलू खपत और बैंकिंग सेक्टर की मजबूती अर्थव्यवस्था को ढाल प्रदान कर रही है। कच्चे तेल की उच्च कीमतें निश्चित तौर पर मुद्रास्फीति के लिए एक चुनौती बनी हुई हैं, लेकिन ग्रामीण और शहरी मांग में निरंतरता भारतीय अर्थव्यवस्था को वैश्विक स्तर पर सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शुमार रखने के लिए पूरी तरह से सक्षम है।
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