{"_id":"6acf131c5fc66669da0d19c4","slug":"india-semiconductor-materials-tech-sovereignty-ashwini-vaishnaw-2026-10-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"'दोस्त कब दुश्मन बन जाएं, पता नहीं': वैष्णव ने बताया भारत का टेक प्लान, क्या भारत बदलेगा टेक्नोलॉजी का खेल?","category":{"title":"Business Diary","title_hn":"बिज़नेस डायरी","slug":"business-diary"}}
'दोस्त कब दुश्मन बन जाएं, पता नहीं': वैष्णव ने बताया भारत का टेक प्लान, क्या भारत बदलेगा टेक्नोलॉजी का खेल?
Wed, 14 Oct 2026 10:59 AM IST
राकेश कुमार
एएनआई, नई दिल्ली।
एएनआई, नई दिल्ली।
Published by: राकेश कुमार
Updated Wed, 14 Oct 2026 10:59 AM IST
सार
अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत सेमीकंडक्टर क्षेत्र में जरूरी सामग्रियों और विनिर्माण क्षमता को देश के भीतर विकसित करने पर जोर दे रहा है। भारत की योजना तीन से पांच साल से लेकर 20-25 साल तक के लक्ष्यों को ध्यान में रखकर बनाई जा रही है। सिस्को के प्रमुख चक रॉबिंस ने डेटा पर देश के नियंत्रण और भारत की तकनीकी क्षमता को अहम बताया। दोनों के बयानों में वैश्विक तकनीकी आपूर्ति शृंखला में भरोसेमंद भागीदार बनने की जरूरत पर जोर दिया गया।
विज्ञापन
अश्विनी वैष्णव, केंद्रीय मंत्री
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
भारत में सेमीकंडक्टर यानी चिप बनाने की क्षमता बढ़ाने के साथ अब उन सामग्रियों पर भी ध्यान दिया जा रहा है, जिनकी मदद से चिप तैयार होती है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने यह बातें ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में कही। उन्होंने कहा कि भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक जरूरी सामग्रियों की उपलब्धता और उनके उत्पादन का सीमित जगहों पर केंद्रित होना है। उन्होंने कहा कि भारत को इन सामग्रियों को समझने, संभालने, बनाने, प्रोसेस करने और सुरक्षित रखने की क्षमता अपने देश में विकसित करनी होगी।
क्या भारत के सेमीकंडक्टर कार्यक्रम में हो रहा बदलाव?
वैष्णव ने कहा कि कार्यक्रम के पहले चरण में एक प्रमुख कंपनी को शामिल करने पर ध्यान दिया गया था। इस चरण में कुल 12 परियोजनाएं हैं, जिनमें से पांच व्यावसायिक उत्पादन शुरू कर चुकी हैं। दूसरे चरण में जरूरी सामग्रियों के विकास पर अधिक जोर दिया जा रहा है।
भारत अपनी तकनीकी जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भरता कैसे घटाएगा?
अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत को ऐसी व्यवस्था बनानी होगी, जिसमें तैयार उत्पाद से लेकर उसके अलग-अलग हिस्सों और उन्हें बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्रियों तक की क्षमता विकसित हो। उन्होंने कहा कि किसी भी क्षेत्र में विनिर्माण को सफल बनाने के लिए मजबूत औद्योगिक तंत्र जरूरी है। भारत इसी तरीके से सेमीकंडक्टर, रेलवे और रक्षा क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है।
विज्ञापन
भारत की योजना कितने वर्षों को ध्यान में रखकर बनाई जा रही है?
वैष्णव ने बताया कि भारत कम और लंबी, दोनों अवधि के लक्ष्यों पर काम कर रहा है। इसके तहत तीन से पांच साल के अल्पकालिक लक्ष्य, पांच से 15 साल के मध्यकालिक लक्ष्य और 20 से 25 साल के दीर्घकालिक लक्ष्य तय किए जा रहे हैं।
क्यों भारत पर भरोसा कर सकती हैं वैश्विक कंपनियां?
वैष्णव ने कहा कि वैश्विक तकनीकी कंपनियों के लिए भारत का पुराना रिकॉर्ड भरोसे का आधार है। उन्होंने कहा, 'पिछले 40 वर्षों से बड़ी वैश्विक कंपनियों के तकनीकी केंद्र भारत में नए उत्पादों की डिजाइनिंग और विकास करते रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि इस अवधि में बौद्धिक संपदा यानी आईपी से जुड़ा कोई विवाद सामने नहीं आया। भारत का लोकतांत्रिक और कानूनी व्यवस्था कंपनियों को भरोसा देती है कि राजनीतिक या नीतिगत बदलावों के बावजूद वे यहां काम कर सकती हैं। वैष्णव ने यह भी कहा कि दोस्त कब दुश्मन बन जाएं, पता नहीं चलता।
चिप बनाने के लिए भरोसा इतना जरूरी क्यों ?
वैष्णव ने कहा कि अब वैश्विक आपूर्ति शृंखला में केवल लागत मायने नहीं रखती, बल्कि साइबर सुरक्षा और भरोसा भी अहम हैं। भारत डिजाइन, विनिर्माण और तैयार उत्पाद के मूल्यांकन के क्षेत्र में भरोसेमंद भागीदार बनना चाहता है।
यह भी पढ़ें: रेलवे कर्मचारियों की बल्ले-बल्ले: कैबिनेट की बैठक में बोनस पर लग सकती है मुहर, जानिए किसे-कितना मिलेगा फायदा
कौन-सी तकनीकी व्यवस्था लाने की तैयारी कर रही है सिस्को?
सिस्को के चेयरमैन और मुख्य कार्यकारी अधिकारी चक रॉबिंस ने कहा कि कंपनियों को सरकारों के साथ मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत उन गिने-चुने देशों में है, जहां बड़े स्तर पर ऐसी तकनीकी क्षमताएं विकसित की जा सकती हैं। उन्होंने बताया कि यूरोप में पिछले दो से तीन वर्षों के दौरान सरकारों के साथ बातचीत में डेटा की सुरक्षा और उस पर देश का नियंत्रण प्रमुख मुद्दे रहे हैं।
रॉबिंस ने बताया कि कंपनी ने ऐसी तकनीकी व्यवस्था तैयार की है, जिसमें डेटा और सिस्टम के संचालन पर संबंधित देश का नियंत्रण बनाए रखने पर जोर है। इसे यूरोप के कई देशों और कनाडा में शुरू किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि कंपनी अगले कुछ महीनों में इसे भारत में भी लाएगी। चक रॉबिंस ने कहा कि तकनीक तेजी से बदल रही है और कई बार कोई तकनीकी उत्पाद बाजार में आने तक पुराना पड़ने लगता है। ऐसे में नई क्षमताओं को विकसित करना और तकनीक में आगे की छलांग लगाना जरूरी है।
भारत के लिए आगे की सबसे अहम प्राथमिकता क्या होगी?
वैष्णव के मुताबिक, भारत को तैयार उत्पाद से आगे बढ़कर मॉड्यूल, कलपुर्जों, सामग्रियों और मशीनों के निर्माण तक अपनी क्षमता विकसित करनी होगी। इसके लिए लंबे समय तक निवेश, तकनीकी जानकारी और मजबूत औद्योगिक तंत्र की जरूरत होगी।
विज्ञापन
क्या भारत के सेमीकंडक्टर कार्यक्रम में हो रहा बदलाव?
वैष्णव ने कहा कि कार्यक्रम के पहले चरण में एक प्रमुख कंपनी को शामिल करने पर ध्यान दिया गया था। इस चरण में कुल 12 परियोजनाएं हैं, जिनमें से पांच व्यावसायिक उत्पादन शुरू कर चुकी हैं। दूसरे चरण में जरूरी सामग्रियों के विकास पर अधिक जोर दिया जा रहा है।
विज्ञापन
भारत अपनी तकनीकी जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भरता कैसे घटाएगा?
अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत को ऐसी व्यवस्था बनानी होगी, जिसमें तैयार उत्पाद से लेकर उसके अलग-अलग हिस्सों और उन्हें बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्रियों तक की क्षमता विकसित हो। उन्होंने कहा कि किसी भी क्षेत्र में विनिर्माण को सफल बनाने के लिए मजबूत औद्योगिक तंत्र जरूरी है। भारत इसी तरीके से सेमीकंडक्टर, रेलवे और रक्षा क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है।
विज्ञापन
भारत की योजना कितने वर्षों को ध्यान में रखकर बनाई जा रही है?
वैष्णव ने बताया कि भारत कम और लंबी, दोनों अवधि के लक्ष्यों पर काम कर रहा है। इसके तहत तीन से पांच साल के अल्पकालिक लक्ष्य, पांच से 15 साल के मध्यकालिक लक्ष्य और 20 से 25 साल के दीर्घकालिक लक्ष्य तय किए जा रहे हैं।
- बदलती राजनीति और भू-राजनीतिक परिस्थितियों के मुताबिक भारत को अपनी रणनीति में बदलाव करना होगा। ऐसे क्षेत्रों की पहचान करनी होगी, जहां दूसरे देशों की नीतियों के कारण भारत का उत्पादन और अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
- सेमीकंडक्टर में दो नैनोमीटर से लेकर 90 नैनोमीटर तक के पूरे क्षेत्र को ध्यान में रखना होगा। इनमें 28 से 90 नैनोमीटर के चिप निर्माण खंड में निर्भरता का बड़ा केंद्र बनने की चुनौती है।
क्यों भारत पर भरोसा कर सकती हैं वैश्विक कंपनियां?
वैष्णव ने कहा कि वैश्विक तकनीकी कंपनियों के लिए भारत का पुराना रिकॉर्ड भरोसे का आधार है। उन्होंने कहा, 'पिछले 40 वर्षों से बड़ी वैश्विक कंपनियों के तकनीकी केंद्र भारत में नए उत्पादों की डिजाइनिंग और विकास करते रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि इस अवधि में बौद्धिक संपदा यानी आईपी से जुड़ा कोई विवाद सामने नहीं आया। भारत का लोकतांत्रिक और कानूनी व्यवस्था कंपनियों को भरोसा देती है कि राजनीतिक या नीतिगत बदलावों के बावजूद वे यहां काम कर सकती हैं। वैष्णव ने यह भी कहा कि दोस्त कब दुश्मन बन जाएं, पता नहीं चलता।
चिप बनाने के लिए भरोसा इतना जरूरी क्यों ?
वैष्णव ने कहा कि अब वैश्विक आपूर्ति शृंखला में केवल लागत मायने नहीं रखती, बल्कि साइबर सुरक्षा और भरोसा भी अहम हैं। भारत डिजाइन, विनिर्माण और तैयार उत्पाद के मूल्यांकन के क्षेत्र में भरोसेमंद भागीदार बनना चाहता है।
यह भी पढ़ें: रेलवे कर्मचारियों की बल्ले-बल्ले: कैबिनेट की बैठक में बोनस पर लग सकती है मुहर, जानिए किसे-कितना मिलेगा फायदा
कौन-सी तकनीकी व्यवस्था लाने की तैयारी कर रही है सिस्को?
सिस्को के चेयरमैन और मुख्य कार्यकारी अधिकारी चक रॉबिंस ने कहा कि कंपनियों को सरकारों के साथ मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत उन गिने-चुने देशों में है, जहां बड़े स्तर पर ऐसी तकनीकी क्षमताएं विकसित की जा सकती हैं। उन्होंने बताया कि यूरोप में पिछले दो से तीन वर्षों के दौरान सरकारों के साथ बातचीत में डेटा की सुरक्षा और उस पर देश का नियंत्रण प्रमुख मुद्दे रहे हैं।
रॉबिंस ने बताया कि कंपनी ने ऐसी तकनीकी व्यवस्था तैयार की है, जिसमें डेटा और सिस्टम के संचालन पर संबंधित देश का नियंत्रण बनाए रखने पर जोर है। इसे यूरोप के कई देशों और कनाडा में शुरू किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि कंपनी अगले कुछ महीनों में इसे भारत में भी लाएगी। चक रॉबिंस ने कहा कि तकनीक तेजी से बदल रही है और कई बार कोई तकनीकी उत्पाद बाजार में आने तक पुराना पड़ने लगता है। ऐसे में नई क्षमताओं को विकसित करना और तकनीक में आगे की छलांग लगाना जरूरी है।
भारत के लिए आगे की सबसे अहम प्राथमिकता क्या होगी?
वैष्णव के मुताबिक, भारत को तैयार उत्पाद से आगे बढ़कर मॉड्यूल, कलपुर्जों, सामग्रियों और मशीनों के निर्माण तक अपनी क्षमता विकसित करनी होगी। इसके लिए लंबे समय तक निवेश, तकनीकी जानकारी और मजबूत औद्योगिक तंत्र की जरूरत होगी।