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Report: भारत के कपड़ा निर्यात में आई गिरावट; 35.8 अरब डॉलर पर पहुंचा कारोबार, जीटीआरआई ने बताई वजह

Sat, 25 Apr 2026 03:20 PM IST
Riya Dubey बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Riya Dubey Updated Sat, 25 Apr 2026 03:20 PM IST
सार

जीटीआरआई की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का टेक्सटाइल और गारमेंट निर्यात 2.2 प्रतिशत घटकर 35.8 अरब डॉलर रह गया। कॉटन टेक्सटाइल, रेडीमेड गारमेंट्स और कारपेट जैसे प्रमुख क्षेत्रों में गिरावट दर्ज की गई, जबकि केवल हैंडीक्राफ्ट में मामूली बढ़त हुई।

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India's textile exports declined to more than 2 percent, according to GTRI
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : एडोब स्टॉक

विस्तार

भारत के टेक्सटाइल और गारमेंट निर्यात को वित्त वर्ष 2025-26 में झटका लगा है। थिंक टैंक जीटीआरआई की रिपोर्ट के मुताबिक, देश का कुल वस्त्र और परिधान निर्यात 2.2 प्रतिशत घटकर 35.8 अरब डॉलर पर आ गया। रुपये के लिहाज से भी निर्यात में 2.1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।

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रिपोर्ट में कहा गया है कि गिरावट लगभग सभी प्रमुख श्रेणियों में देखने को मिली। कॉटन टेक्सटाइल निर्यात 3.9 प्रतिशत घटा, रेडीमेड गारमेंट्स में 1.4 प्रतिशत की कमी आई और कारपेट निर्यात 5.3 प्रतिशत नीचे रहा। केवल हैंडीक्राफ्ट सेक्टर ने मामूली राहत दी, जहां 1.5 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।

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रुपये और डॉलर के आंकड़ों में अंतर एक गहरी आर्थिक चिंता

जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा कि रुपये और डॉलर के आंकड़ों में अंतर एक गहरी आर्थिक चिंता को दर्शाता है। उनका कहना है कि भारत घरेलू मुद्रा में अधिक निर्यात करता दिखाई दे रहा है, लेकिन वैश्विक बाजार से डॉलर कम कमा रहा है।

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उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि मैन-मेड टेक्सटाइल में रुपये के हिसाब से 3.6 प्रतिशत की बढ़त दिखी, लेकिन डॉलर में यह 0.8 प्रतिशत घट गया। इसी तरह गारमेंट निर्यात रुपये में 2.9 प्रतिशत बढ़ा, जबकि डॉलर में 1.4 प्रतिशत की गिरावट आई।

क्या है गिरावट की वजह?

श्रीवास्तव के अनुसार, इसका मतलब यह है कि निर्यात में जो बढ़त दिख रही है, वह प्रतिस्पर्धा बढ़ने से नहीं, बल्कि रुपये के कमजोर होने की वजह से है। वास्तविक स्थिति यह है कि भारत वैश्विक बाजार में अपनी हिस्सेदारी खो रहा है या नए बाजारों में विस्तार नहीं कर पा रहा है। खासकर श्रम-प्रधान क्षेत्रों में यह चिंता ज्यादा गंभीर है, जहां भारत को तेजी से आगे बढ़ना चाहिए था।



उन्होंने कहा कि यह सरकार के लिए एक अहम नीति प्रश्न है कि उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना (PLI), लॉजिस्टिक्स सुधार और व्यापार सुगमता जैसे कदमों के बावजूद निर्यात वृद्धि क्यों नहीं हो रही। रिपोर्ट में सरकार से मांग की गई है कि वह तुरंत उन बाधाओं की पहचान करे, जो टेक्सटाइल और गारमेंट जैसे प्रमुख क्षेत्रों की निर्यात क्षमता को प्रभावित कर रही हैं।

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