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Rakesh Mohan: 'भारत को आसियान के स्तर तक लाने चाहिए टैरिफ', प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य बोले

Thu, 04 Sep 2025 11:28 AM IST
निर्मल कांत बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Thu, 04 Sep 2025 11:28 AM IST
सार

Rakesh Mohan: प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य राकेश मोहन ने कहा कि भारत को अपने आयात शुल्क आसियान के स्तर तक कम करने की जरूरत है, जिससे व्यापार में वृद्धि होगी। उन्होंने सुझाव दिया कि भारत को आरसीईपी और सीपीटीपीपी जैसे बड़े व्यापारिक समूहों में जुड़ना चाहिए। 

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India needs to bring down tariffs to ASEAN level: EAC-PM member Rakesh Mohan
राकेश मोहन - फोटो : आधिकारिक वेबसाइट/ईएसी-पीएम

विस्तार

प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) के सदस्य राकेश मोहन ने गुरुवार को कहा कि भारत के पास आयात शुल्क (टैरिफ) कम करने की गुंजाइश है और प्रयास किए जाने चाहिए कि इन शुल्कों को आसियान देशों के स्तर तक लाया जाए। उन्होंने कहा कि विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) का प्रभाव कम होने के साथ वैश्विक व्यापार व्यवस्था अब यूरोपीय संघ (ईयू), उत्तर अमेरिका यूएसएमसीए, एशिया में आरसीईपी और एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सीपीटीपीपी जैसे बड़े क्षेत्रीय समूहों से नियंत्रित हो रही है। 
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उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि हमारे पास बहुत सारे शुल्कों (टैरिफ) को कम करने की गुंजाइश है और कम से कम आसियान देशों के स्तर तक लाने की कोशिश करनी चाहिए। यह हमारे लिए बहुत फायदेमंद होगा। पीटीआई के साथ एक विशेष इंटरव्यू में मोहन ने कहा, अब इसका एख मतलब यह भी होगा कि मुद्रा विनिमय दर (करंसी एक्सचेंज रेट) को इस शुल्क कटौती की भरपाई करने के लिए समायोजित करना पड़ेगा। 
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'बड़े क्षेत्रीय व्यापारिक समूहों का हिस्सा बने भारत'
उन्होंने कहा कि अगर भारत वैश्विक व्यापार से कटना नहीं चाहता तो उसे इन उभरते बड़े व्यापार समूहों का हिस्सा बनना चाहिए। अपनी भौगोलिक स्थिति को देखते हुए भारत को आरसीईपी में शामिल होने पर फिर से विचार करना चाहिए, लेकिन अपने हितों का बचाव करने वाले उचित सुरक्षा उपायों के साथ। इसके अलावा, भारत को सीपीटीपीपी में शामिल होने के लिए भी आवेदन करना चाहिए। 

'रुपये के अवमूल्यन से सफल रहे 1990 के दशक के सुधार'
उन्होंने बताया कि 1990 के दशक की शुरुआत में जब भारत में आर्थिक सुधार शुरू हुए, तबसे लेकर 2012 तक लगातार आयात शुल्क में धीरे-धीरे कटौती होती रही। लेकिन 2012 के बाद यह प्रक्रिया रुक गई और 2017 से औसतन कुछ शुल्क बढ़ा दिए गए। उन्होंने यह भी कहा कि 1990 के दशक में भारत ने जो कारोबारी सुधार किए थे, वे इसलिए सफल रहे क्योंकि तब सरकार ने पहले रुपये का अवमूल्यन (डिवैल्यू) कर दिया था, जिससे घरेलू उद्योगों को प्रभावी सुरक्षा मिली थी। 


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'निर्यातकों और विनिर्माण के पक्ष में समायोजित करनी होगी विनिमय दर'
मोहन ने कहा, जैसे-जैसे हम अपने आयात शुल्कों को कम करेंगे ताकि प्रतिस्पर्धा बन सके और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का हिस्सा बन सके, इसका मतलब यह भी होगा कि वास्तविक विनिमय दर को इस तरह समायोजित करना होगा कि निर्यातकों और विनिर्माण के पक्ष में हो। आसियान देशों में सिंगापुर, मलयेशिया, थाईलैंड, ब्रुनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, म्यांमार, फिलीपींस और वियतनाम शामिल हैं। 

2019 में आरसीईपी से समझौते से पीछे हटा भारत
भारत ने आरसीईपी में शामिल होने के लिए 2013 में बातचीत शुरू की थी, लेकिन 2019 में इस समझौते से बाहर निकल गया था। इस समूह में दस आसियान सदस्य देश और उनके छह मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) साझेदार चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड शामिल हैं। जब उनसे पूछा गया कि क्या भारत को चीन से निवेश पर लगाए गए प्रतिबंध हटाने चाहिए, तो मोहन ने कहा कि भारत को श्रम प्रधान क्षेत्रों में चीनी निवेश का स्वागत करना चाहिए, क्योंकि चीन में प्रति व्यक्ति आय बढ़ रही है। उन्होंने कहा, मेरा मानना है कि भारतीय उद्यमियों को चीनी निवेशकों के साथ संयुक्त उद्यम शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, ताकि ये उद्योग भारत में आ सकें। 


 
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