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Defence Export: FY2025-26 में भारत का रक्षा निर्यात 63% उछलकर पहली बार 38424 करोड़ रुपये हुआ, जानिए क्या अपडेट

Thu, 02 Apr 2026 11:47 AM IST
Kumar Vivek बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Kumar Vivek Updated Thu, 02 Apr 2026 11:47 AM IST
सार

वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा निर्यात 62.66% की रिकॉर्ड वृद्धि के साथ ₹38,424 करोड़ पर पहुंच गया है। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत और निजी कंपनियों की बढ़ती भागीदारी से जुड़ी पूरी खबर यहां पढ़ें।

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह - फोटो : ANI

विस्तार

आत्मनिर्भर भारत अभियान के मोर्चे पर भारतीय अर्थव्यवस्था और विनिर्माण क्षेत्र के लिए एक बड़ी और सकारात्मक खबर है। देश का रक्षा निर्यात वित्त वर्ष 2025-26 में शानदार प्रदर्शन करते हुए ₹38,424 करोड़ के अपने सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है। यह आंकड़ा न केवल भारतीय उद्योग की बढ़ती उत्पादन क्षमता को दर्शाता है, बल्कि वैश्विक रक्षा बाजार में भारत की मजबूत होती साख का भी सीधा प्रमाण है।

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आंकड़ों में रिकॉर्ड छलांग

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा गुरुवार को साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, मौजूदा वित्त वर्ष में रक्षा निर्यात में पिछले साल के मुकाबले 62.66 प्रतिशत की जबरदस्त वृद्धि दर्ज की गई है। मूल्य के लिहाज से देखा जाए तो यह ₹14,802 करोड़ का बड़ा उछाल है। 

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सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस अहम उपलब्धि की जानकारी देते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत रक्षा निर्यात की एक प्रभावशाली सफलता की कहानी लिख रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि निर्यात में आया यह भारी उछाल भारत की स्वदेशी क्षमताओं और उन्नत विनिर्माण ताकत में बढ़ते वैश्विक भरोसे को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।

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सरकारी और निजी क्षेत्र की भागीदारी से हासिल हुई उपलब्धि

इस रिकॉर्ड व्यावसायिक प्रदर्शन की सबसे बड़ी खासियत सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की मजबूत संयुक्त भागीदारी है। रक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार:

  • डीपीएसयू की हिस्सेदारी: इस कुल रक्षा निर्यात में रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (डीपीएसयू) का योगदान 54.84 प्रतिशत रहा है।
  • निजी क्षेत्र की भागीदारी: वहीं, निजी उद्योगों ने 45.16 प्रतिशत का अहम योगदान देकर देश में एक सहयोगी और आत्मनिर्भर रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र  की ताकत का प्रदर्शन किया है।
  • भविष्य की संभावनाएं: वर्तमान में, रक्षा उपकरणों और प्लेटफॉर्म्स के निर्माण में निजी उद्योग का योगदान लगभग 25 प्रतिशत है। रक्षा मंत्री के अनुसार, निकट भविष्य में इसके कुल उत्पादन मूल्य का 50 प्रतिशत तक पहुंचने की उम्मीद है।

उत्पादन और नौसेना में शत-प्रतिशत आत्मनिर्भरता

निर्यात के साथ-साथ घरेलू रक्षा उत्पादन भी तेज गति से बढ़ रहा है। मार्च में आयोजित एक कार्यक्रम में रक्षा मंत्री ने बताया था कि सरकार के प्रयासों से वित्त वर्ष 2024-25 में घरेलू रक्षा उत्पादन ₹1.50 लाख करोड़ के पार चला गया था, और तब निर्यात लगभग ₹24,000 करोड़ के स्तर पर था। 

आत्मनिर्भरता का सबसे बड़ा उदाहरण नौसेना के क्षेत्र में दिख रहा है। रक्षा मंत्री के मुताबिक, भारतीय नौसेना के लिए ऑर्डर किए गए सभी युद्धपोत और पनडुब्बियां अब पूरी तरह भारतीय शिपयार्ड में ही बन रही हैं। इनकी डिजाइनिंग से लेकर इंजीनियरिंग, निर्माण और जीवनचक्र समर्थन तक सब कुछ स्वदेशी है। राजनाथ सिंह ने इसे स्पष्ट करते हुए कहा, "आत्मनिर्भरता अब सिर्फ एक नारा नहीं है; यह एक व्यावहारिक वास्तविकता के रूप में स्थापित हो रही है। 'बिल्डर्स नेवी' कोई नारा नहीं, बल्कि जमीनी हकीकत है"।

सरकार ने वित्त वर्ष 2029-30 तक रक्षा निर्यात को ₹50,000 करोड़ तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। 62.66% की वर्तमान विकास दर और निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी को देखते हुए, भारत न केवल इस लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में सही ट्रैक पर है, बल्कि वैश्विक रक्षा आपूर्ति शृंखला में खुद को एक प्रमुख निर्यातक के रूप में भी स्थापित कर रहा है।

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