एक दशक में तीन गुना बढ़ जाएगा भारत का उपभोक्ता बाजार, चीन-अमेरिका को देगा टक्कर
- पारिवारिक आय और जनसंख्या में इजाफे के आधार पर बीसीजी ने जताया अनुमान
- 110 लाख करोड़ रुपये का था 2018 में उपभोक्ता बाजार का आकार
- 335 लाख करोड़ रुपये हो जाएगा वर्ष 2028 तक बढ़कर
विस्तार
भारत के उपभोक्ता बाजार का आकार अगले एक देश में तीन गुने से भी ज्यादा बढ़ जाएगा, जो अमेरिका और चीन के बाद तीसरा सबसे बड़ा बाजार होगा। बीसीजी ने मंगलवार को जारी रिपोर्ट में कहा कि अभी भारतीय उपभोक्ता बाजार 12 फीसदी सालाना की दर से बढ़ रहा है।
वैश्विक प्रबंधन परामर्शदाता फर्म बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (बीसीजी) ने पारिवारिक आय और जनसंख्या में बढ़ोतरी के आधार पर खुलासा किया कि 2018 में भारत का उपभोक्ता बाजार 110 लाख करोड़ रुपये का था, जो अगले एक दशक यानी 2028 में बढ़कर 335 लाख करोड़ रुपये हो जाएगा।
पिछले 10 वर्षों में घरेलू बाजार 13 फीसदी की दर से आगे बढ़ा, जो 2008 में 31 लाख करोड़ रुपये था। इस तरह देखा जाए तो कुल 20 वर्षों के भीतर भारतीय उपभोक्ता बाजार का आकार 10 गुना बढ़ जाएगा। बीसीजी ने कहा, इन दो दशकों में जीडीपी में निजी खपत की भागीदारी 56.8 फीसदी से बढ़कर 62 फीसदी हो जाएगी। यह दुनिया के अन्य उभरते बाजारों के औसत 50-51 फीसदी से कहीं ज्यादा है और आगे भी बरकरार रहने का अनुमान है।
10 फीसदी सालाना बढ़ा पारिवारिक खर्च
रिपोर्ट के अनुसार, पिछले एक दशक में 10 फीसदी सालाना की दर से पारिवारिक खर्च बढ़ा है। 2008 में जहां पारिवारिक खर्च का जीडीपी में हिस्सा 6 फीसदी था, वहीं 2018 में यह बढ़कर 12 फीसदी हो गया है। इस दौरान आय के सभी क्षेत्रों में प्रति परिवार 8 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। समान अवधि में उच्च वर्ग के उपभोक्ताओं का खर्च 20 फीसदी सालाना की दर से बढ़ा है।
ढाई गुना बढ़ी कपड़े-जूते की खपत
उपभोक्ताओं में जूते और कपड़े की खपत सबसे ज्यादा बढ़ी है, जो पिछले एक दशक में 16 फीसदी सालाना रहा है। इसी तरह हेल्थकेयर पर खर्च 14 फीसदी जबकि वित्तीय सेवाओं, सामाजिक सुरक्षा और आभूषण पर 15 से 19 फीसदी की दर से सालाना बढ़ोतरी दिखी। कुल खुदरा बाजार में ऑनलाइन खुदरा बाजार की हिस्सेदारी 2008 के 0.1 फीसदी से बढ़कर 2018 में 2.8 फीसदी हो गई।
6 लाख करोड़ का होगा ई-कॉमर्स बाजार
उपभोक्ता खर्च में इजाफे का असर ई-कॉमर्स पर भी दिखेगा और तमाम प्रतिबंधों के बावजूद यह बाजार चार वर्षों में साढ़े तीन गुना बढ़ जाएगा। भारतीय खुदरा संगठन का कहना है कि वर्ष 2021 तक ई-कॉमर्स बाजार 84 अरब डॉलर (5.96 लाख करोड़ रुपये) का हो जाएगा, जो 2017 में 1.70 लाख करोड़ रुपये का था। इस दौरान इंटरनेट का विस्तार बढ़ने से कई और अंतरराष्ट्रीय रिटेलर्स भारत में अपना व्यापार शुरू करने आएंगे।