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एक्सप्लेनर: अमेरिका से दूरी, भारत-कनाडा की व्यापार समझौते की तैयारी पूरी; क्या 2026 में होगी डील, कितना फायदा?

Thu, 15 Oct 2026 09:37 AM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Thu, 15 Oct 2026 09:37 AM IST
सार

भारत और कनाडा के बीच व्यापार के मौजूदा आंकड़े क्या हैं? क्यों दोनों देश अब व्यापार समझौते तक जल्द पहुंचने की तैयारी कर रहे हैं? इस डील से दोनों देश चाहते क्या हैं और किसको-क्या फायदा होने की संभावना है? क्या यह समझौता 2026 में ही पूरा हो सकता है? इसमें कैसी चुनौतियां आ सकती हैं? आइये जानते हैं...

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India Canada Cepa Trade Agreement 2026 PM Modi Mark Carney Talk delegation visit explainer
भारत-कनाडा के बीच जल्द व्यापार समझौता होने के संकेत। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भारत और कनाडा के बीच इस साल के अंत तक एक बड़ा व्यापार समझौता संभव है। कनाडा की ओर से इस डील को पूरा करने के लिए अब जल्दबाजी भी देखी जा रही है। खासकर अमेरिका की तरफ से कनाडा पर नए आयात शुल्क (टैरिफ) के प्रभावी होने के बाद से। इसी कड़ी में कनाडा ने 30 साल से भी ज्यादा समय के बाद भारत में अपना सबसे बड़ा व्यापार प्रतिनिधिमंडल भेजा है। इस दल में करीब 300 व्यापारी और अधिकारी शामिल हैं, जो कि भारत और कनाडा के बीच आर्थिक सहयोग को बढ़ाने के साथ-साथ एक व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (सीईपीए) करने की भी तैयारी करेंगे।
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इस पूरे घटनाक्रम के बीच यह जाना अहम है कि आखिर भारत और कनाडा के बीच व्यापार के मौजूदा आंकड़े क्या हैं? क्यों दोनों देश अब व्यापार समझौते तक जल्द पहुंचने की तैयारी कर रहे हैं? इस डील से दोनों देश चाहते क्या हैं और किसको-क्या फायदा होने की संभावना है? क्या यह समझौता 2026 में ही पूरा हो सकता है? इसमें कैसी चुनौतियां आ सकती हैं? आइये जानते हैं...
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पहले जानें- भारत और कनाडा के बीच व्यापार के मौजूदा आंकड़े?

भारत के वाणिज्य मंत्रालय के डेटा के मुताबिक, दोनों देशों के बीच वित्त वर्ष 2025-26 में करीब 8 अरब डॉलर (7.95 अरब डॉलर) का द्विपक्षीय व्यापार हुआ। इसमें भारत की ओर से कनाडा को होने वाले निर्यात 4.67 अरब डॉलर था, जबकि कनाडा से आयात का आंकड़ा 3.28 अरब डॉलर का था। 

ये भी पढ़ें: भारत-कनाडा संबंध: विदेश मंत्री जयशंकर से कनाडाई समकक्ष की मुलाकात, व्यापार से रक्षा तक इन मुद्दों पर की चर्चा
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भारत-कनाडा के बीच व्यापार के आंकड़े। - फोटो : अमर उजाला
भारत और कनाडा के बीच बीते पांच वित्त वर्षों के आंकड़ों पर गौर किया जाए तो सामने आता है कि जहां 2021 से 2024 के बीच दोनों देशों का व्यापार लगातार बढ़ता रहा तो वहीं 2024 के बाद इसमें कमी आने लगी। इसकी एक बड़ी वजह दोनों देशों के बीच रिश्तों में आई कड़वाहट रही। दरअसल, जून 2023 में खालिस्तान समर्थक आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया स्थित गुरुद्वारे से निकलते वक्त हत्या हो गई थी। तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने इसके लिए बिना सबूत दिए ही भारत पर आरोप लगा दिए थे। नतीजतन दोनों देशों के बीच न सिर्फ राजनयिक रिश्ते, बल्कि व्यापारिक रिश्तों पर भी बड़ा ब्रेक लग गया और आयात-निर्यात दोनों के ही आंकड़ों में गिरावट दर्ज की गई। 
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भारत-कनाडा के बीच व्यापार के आंकड़े। - फोटो : अमर उजाला
हालांकि, मार्च 2025 में जस्टिन ट्रूडो के प्रधानमंत्री पद से हटने और मार्क कार्नी के पीएम बनने के बाद से कनाडा ने एक बार फिर भारत से रिश्ते बेहतर करने की दिशा में कदम बढ़ाए। नतीजतन दोनों देशों का व्यापार एक बार फिर संतुलित स्तर पर आ चुका है। इसी कड़ी में अब दोनों देश अपने रिश्तों को एक व्यापार समझौते के जरिए और मजबूत करने के लिए काम कर रहे हैं। 

क्यों दोनों देश अब व्यापार समझौते तक जल्द पहुंचने की तैयारी कर रहे हैं?

  • भारत-कनाडा ने व्यापक समझौता को लेकर चर्चाएं इसी साल मार्च में शुरू कीं, जब कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी भारत दौरे पर आए थे। 
  • तनावपूर्ण संबंधों के दौर के बाद दोनों देश अपनी रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी को रीसेट कर मजबूत बनाना चाहते हैं। 
  • इस समझौते के जरिए भारत-कनाडा ने अपने द्विपक्षीय व्यापार को 2030 तक बढ़ाकर 50 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।

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भारत-कनाडा के बीच आयात-निर्यात। - फोटो : अमर उजाला
दोनों ही देशों की तरफ से मजबूत आर्थिक रिश्ते बनाने की कोशिश की जा रही है। सीईपीए को एक वृहद आर्थिक फ्रेमवर्क के तौर पर स्थापित कने की तैयारी है, जिसके अंतर्गत उत्पाद, सेवाओं, निवेश और अन्य क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं, ताकि यह सिर्फ एक टैरिफ कम करने का समझौता न रह सके। 

ये भी पढ़ें: देश में बढ़ेगा निवेश: आईडीबीआई बैंक सौदे के बाद भारत में पैसा लगाएगा कनाडा, किन क्षेत्रों में संभावनाएं? 


कैसे एक-दूसरे की जरूरतों को पूरा कर सकते हैं भारत-कनाडा?

भारत और कनाडा आर्थिक, रणनीतिक और तकनीकी मोर्चों पर एक-दूसरे की जरूरतों को पूरा करने में अहम सहयोगी के तौर पर उभर सकते हैं। खासकर उन क्षेत्रों में जहां दोनों देश अब तक दूसरों पर निर्भर थे।

1. ऊर्जा सुरक्षा और अहम खनिज 

भारत को फायदा: तेजी से बढ़ते औद्योगिक विनिर्माण और आर्थिक विस्तार के लिए भारत को विश्वसनीय ऊर्जा और कच्चे माल की जरूरत है। समझौते के बाद कनाडा इन जरूरतों की निर्बाध आपूर्ति के लिए एक स्रोत बन सकता है।

कनाडा को फायदा: कनाडा भारत को एलएनजी, यूरेनियम, उर्वरक, स्वच्छ तकनीक और उन्नत विनिर्माण के लिए जरूरी अहम खनिजों की आपूर्ति कर सकता है, जिससे उसे अपने निर्यात के लिए बड़ा बाजार मिलेगा और उसका भारत से व्यापार घाटा कम हो सकेगा। 

2. अमेरिका पर निर्भरता घटाने, बड़े बाजार की तलाश में

कनाडा का फायदा: कनाडा की व्यापारिक निर्भरता अब तक अमेरिका पर काफी ज्यादा रही है। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से कनाडा पर टैरिफ लगाए जाने के बाद अब उसे अपनी व्यापारिक निर्भरता को कम करने की जरूरत दिख रही है। कनाडा इसके लिए अपनी हिंद-प्रशांत रणनीति के तहत बाजारों का विविधीकरण करना चाहता है। भारत का विशाल उपभोक्ता और औद्योगिक बाजार कनाडा के कृषि-खाद्य, वुड पल्प और ऊर्जा उद्योगों के लिए बड़ा बाजार है।

भारत का फायदा: भारतीय निर्यातकों को दवाओं (फार्मास्यूटिकल्स), कपड़ा, इंजीनियरिंग सामान, रसायन और इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में कनाडाई बाजार में बेहतर पहुंच मिलती है। समझौते की स्थिति में भारत को अमेरिका से इतर कनाडा में भी एक बड़ा बाजार उपलब्ध होगा, जिससे ट्रंप के टैरिफ की धमकियों और इनके लगने की स्थिति में घरेलू स्तर पर प्रभाव कम होगा। 


3. सेवा क्षेत्र में फायदा और कुशल प्रतिभा का लेन-देन

भारत का फायदा: भारत के पास आईटी, व्यावसायिक और तकनीकी सेवाओं में मजबूत क्षमताएं हैं और इस समझौते के जरिए अपने पेशेवरों की सुगम आवाजाही के लिए मौका मिल सकता है।

कनाडा का फायदा: इसी तरह कनाडा के प्रौद्योगिकी और संसाधन उद्योगों को भारतीय आईटी कंपनियों, डिजिटल सेवाओं और कुशल पेशेवरों की जरूरत है। 
 

4. तकनीकी सहयोग और एयरोस्पेस 

  • दोनों देश एयरोस्पेस, स्वच्छ तकनीक और अनुसंधान-विकास (आरएंडडी) में औद्योगिक साझेदारी, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और निवेश को बढ़ावा दे सकते हैं।
  • इसके अलावा साइबर सुरक्षा, आर्थिक सुरक्षा और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को अधिक टिकाऊ और सुरक्षित बनाने के लिए सामरिक वार्ता और सहयोग बढ़ा रहे हैं।

ये भी पढ़ें: भारत-कनाडा संबंध: पीएम मोदी और मार्क कार्नी के बीच बातचीत, व्यापार और ऊर्जा समेत कई मुद्दों पर बनी सहमति


क्या यह समझौता 2026 में ही पूरा हो सकता है? 

  • भारत-कनाडा ने 2026 के अंत तक इस समझौते को पूरा करने का लक्ष्य तय किया है। मौजूदा समय में जिस तेजी से बातचीत आगे बढ़ रही है, उससे इसके 2026 में ही पूरा होने की प्रबल संभावना है। 
  • दोनों देशों के बीच अब तक वार्ता के पांच दौर पूरे हो चुके हैं और कई तकनीकी अध्यायों को पहले ही अंतिम रूप दिया जा चुका है। कनाडा के प्रतिनिधिमंडल स्तर के दौरे में अब कई और मुद्दों पर सहमति बनने की उम्मीद है।
  • भारतीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और कनाडा के अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंत्री मनिंदर सिद्धू के साथ-साथ कनाडाई विदेश मंत्री अनीता आनंद के भारत दौरे पर समझौते पर जल्द पहुंचने पर चर्चा हुई है।

समझौते के समय पर पूरा होने में चुनौतियां कैसी?

  • तकनीकी अध्यायों पर सहमति जल्द बन जाती है, लेकिन अपने-अपने देश के संवेदनशील वस्तुओं और सेवाओं के क्षेत्रों में विदेशी पहुंच देने पर सहमति बनाना सबसे बड़ा चुनौती भरा काम होगा। खासकर भारत की ओर से किसी भी देश को अपने कृषि और डेयरी सेक्टर में पूरी छूट देना काफी हद तक मुश्किल है।
  • दोनों पक्षों के सामने आयात शुल्क (टैरिफ) में छूट, रूल्स ऑफ ओरिजिन (उत्पादन के स्थान) और गैर-टैरिफ बाधाओं, जैसे- विस्तृत और कानूनी प्रावधानों पर एक राय बनाने की भी चुनौती होगी। ऐसे में दोनों पक्ष संवेदनशील क्षेत्रों में जितनी जल्दी रियायतें देने को तैयार होते हैं, उतनी ही जल्दी यह समझौता पूरा हो जाएगा। 
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