फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Business ›   Business Diary ›   Increases in steel and petrol-diesel prices reduced the profit of MSME Sector

महंगाई की मार: स्टील और पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि से घटा एमएसएमई का मुनाफा

Tue, 12 Oct 2021 12:54 AM IST
देव कश्यप बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Tue, 12 Oct 2021 12:54 AM IST
सार

एमएसएमई के कुल उत्पादन लागत में स्टील की हिस्सेदारी 70 फीसदी होती है। पिछले एक साल में इसकी कीमतों में 25 हजार रुपये प्रति टन का इजाफा हो चुका है। पिछले महीने सितंबर में ही कीमतें छह हजार रुपये प्रति टन बढ़ी हैं। इसका सीधा असर एमएसएमई की उत्पादन लागत पर पड़ रहा है।

विज्ञापन
Increases in steel and petrol-diesel prices reduced the profit of MSME Sector
एमएसएमई (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाले सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) पर महंगाई की जबरदस्त मार पड़ती दिख रही है। देशभर के एमएसएमई संगठनों ने स्टील और पेट्रोल-डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों पर चिंता जताई और सरकार से दखल देने की गुहार लगाई है।

विज्ञापन

 
170 एमएसएमई संगठनों की अखिल भारतीय परिषद के सदस्य राममूर्ति का कहना है कि एमएसएमई के कुल उत्पादन लागत में स्टील की हिस्सेदारी 70 फीसदी होती है। पिछले एक साल में इसकी कीमतों में 25 हजार रुपये प्रति टन का इजाफा हो चुका है। पिछले महीने सितंबर में ही कीमतें छह हजार रुपये प्रति टन बढ़ी हैं। इसका सीधा असर एमएसएमई की उत्पादन लागत पर पड़ रहा है।
विज्ञापन


बावजूद इसके छोटी इकाइयां बाजार को बढ़ी कीमतों पर उत्पादों की आपूर्ति नहीं कर सकतीं। उन्हें डर है कि दाम बढ़ाने से अपने ग्राहकों को हमेशा के लिए खो देंगी। ऐसे में क्षेत्र की अधिकतर कंपनियां बेहद कम मार्जिन पर उत्पाद बेचने को मजबूर हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


महंगे ईंधन ने बढ़ाई लागत
भारतीय उपकरण विनिर्माता संगठन के अध्यक्ष नरेंद्र भामरा ने कहा, स्टील कीमतों के साथ पेट्रोल-डीजल की महंगाई ने छोटे-मझोले उद्यमों की कमर तोड़ दी है। ईंधन का इस्तेमाल न सिर्फ माल ढुलाई में होता है, बल्कि कई एमएसएमई अपने विनिर्माण में भी इस्तेमाल करती हैं। लिहाजा ईंधन महामारी से उबरते इस क्षेत्र को दोहरा झटका दे रहा है। कच्चे माल की ढुलाई महंगी होने के साथ उत्पादन लागत भी बढ़ रही है। उत्पादन के लिहाज से अक्तूबर काफी मुश्किल समय हो सकता है।


पूंजी की कमी लेकिन कर्ज विकल्प नहीं
राममूर्ति के अनुसार, लागत में लगातार इजाफा होने से एमएसएमई के पास क्रियाशील पूंजी घटती जा रही। पहले ही कोरोना महामारी और लॉकडाउन के दबाव से जूझ रहे छोटे-मझोले उद्यमों को अब बाजार में बने रहना भी मुश्किल हो रहा है। पंजाब के 4,000 छोटे उद्यमों के संगठन के अध्यक्ष बादिश जिंदल ने कहा, इकाइयों का क्रियाशील पूंजी महंगे कच्चे माल खरीदने में जा रही। सरकार सीधे मदद करने के बजाय कर्ज बांट रही, जो समस्या का सही समाधान नहीं है। एमएसएमई का मार्जिन पहले ही काफी कम हो चुका है। ऐसे में नए कर्ज को पाटना संभव नहीं होगा।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें कारोबार समाचार और Union Budget से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। कारोबार जगत की अन्य खबरें जैसे पर्सनल फाइनेंस, लाइव प्रॉपर्टी न्यूज़, लेटेस्ट बैंकिंग बीमा इन हिंदी, ऑनलाइन मार्केट न्यूज़, लेटेस्ट कॉरपोरेट समाचार और बाज़ार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed