IMF: आईएमएफ ने बांग्लादेश को 4.5 बिलियन डाॅलर का ऋण देने की सहमति दी, आर्थिक संकट से निपटने में मिलेगी मदद
IMF Loan to Bangladesh: बांग्लादेश के वित्त मंत्री एएचएम मुस्तफा कमाल ने ढाका में समझौते पर हस्ताक्षर के बाद एक समाचार ब्रीफिंग के दौरान बताया कि आईएमएफ की ओर से ऋण की 447.48 मिलियन अमरीकी डाॅलर की पहली किस्त को अगले वर्ष फरवरी में मंजूरी दे दी जाएगी।
विस्तार
बांग्लादेश और आईएमएफ (international monetary fund) ने बुधवार को प्रारंभिक रूप से एक समझौता किया है। इसके तहत वैश्विक ऋणदाता बांग्लादेश को अपनी अर्थव्यवस्था को स्थिर करने और कमजोर वर्ग के लोगों की सुरक्षा के लिए 4.5 अरब डॉलर का सहायता पैकेज प्रदान करेगा। आईएमएफ के साथ यह समझौता वैश्विक ऋणदाता और बांग्लादेश के अधिकारियों के बीच कई महीनों की चर्चा के बाद हो पाया है।
श्रीलंका और पाकिस्तान के बाद बांग्लादेश तीसरा दक्षिण एशियाई देश है, जिसने कोरोनो वायरस महामारी, रूस-यूक्रेन युद्ध और वैश्विक मुद्रास्फीति के कारण खाद्य और ऊर्जा की कीमतों में तेज वृद्धि से निपटने के लिए आईएमएफ से बेलआउट पैकेज हासिल की है।
बांग्लादेश के वित्त मंत्री एएचएम मुस्तफा कमाल ने ढाका में समझौते पर हस्ताक्षर के बाद एक समाचार ब्रीफिंग के दौरान बताया कि आईएमएफ की ओर से ऋण की राशि दिसंबर 2026 तक सात किस्तों में वितरित की जाएगी। 447.48 मिलियन अमरीकी डालर की पहली किस्त को अगले साल फरवरी में मंजूरी दे दी जाएगी, जबकि ऋण की ब्याज दर परिपक्वता के समय बाजार दर पर निर्भर करेगी।
वित्त मंत्रालय के अधिकारियों ने इस ऋण पर ब्याज दर करीब 2.2 फीसदी रहने का अनुमान लगाया है। कमाल ने कहा, ‘हमें जैसा चाहिए वैसा ही ऋण मिल रहा है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष हमें कुल 4.5 अरब डॉलर का कर्ज देगा।’ इस सौदे को आईएमएफ के कार्यकारी बोर्ड के अनुमोदन की जरूरत होगी, इसके आने वाले कुछ हफ्तों में मिल जाने की उम्मीद है।
इस बीच, आईएमएफ ने एक बयान में कहा कि यह बांग्लादेश के साथ एक कर्मचारी स्तर के समझौते पर पहुंच गया है ताकि वहां व्यापक आर्थिक स्थिरता को बनाए रखा जा सके और कमजोर लोगों के हितों की करते हुए मजबूत, समावेशी और हरित विकास का समर्थन किया जा सके।
बांग्लादेश में आईएमएफ के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने वाले राहुल आनंद ने कहा कि यूक्रेन युद्ध ने महामारी के बाद देश के मजबूत आर्थिक सुधार को बाधित कर दिया है। इससे चालू खाते का घाटा तेजी से बढ़ रहा है और विदेशी मुद्रा भंडार में तेजी से गिरावट आ रही है। मुद्रास्फीति बढ़ने से विकास धीमी पड़ रही है।