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Vivo: दिल्ली हाईकोर्ट ने धनशोधन के मामले में जवाब देने के लिए वीवो के अधिकारियों को दिया समय, अदालत ने यह कहा

Wed, 03 Jan 2024 04:37 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Wed, 03 Jan 2024 04:37 PM IST
सार

Vivo Case: दिल्ली हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने मामले को 11 जनवरी को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करते हुए कहा कि आरोपियों को जवाब दाखिल करने की आवश्यकता होगी। मैं उन्हें मना नहीं कर सकती। अदालत ने प्रतिवादियों को जवाब दाखिल करने के लिए एक हफ्ते का समय दिया है।

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HC grants time to Vivo officials to respond to ED plea against release in money laundering case
दिल्ली हाईकोर्ट। - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

दिल्ली उच्च न्यायालय ने धनशोधन के एक मामले में वीवो इंडिया के तीन अधिकारियों को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की याचिका पर जवाब देने के लिए बुधवार को एक हफ्ते का समय दिया। अतिरिक्त सॉलीसीटर जनरल एसवी राजू ने दलील दी कि निचली अदालत का आदेश ''पूरी तरह विसंगतिपूर्ण'' है और मामले में तत्काल फैसले की जरूरत है जबकि आरोपियों के वकील ने जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा।

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न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने मामले को 11 जनवरी को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया और कहा, "उन्हें जवाब दाखिल करने की आवश्यकता होगी। मैं उन्हें मना नहीं कर सकती।" अदालत ने प्रतिवादियों को जवाब दाखिल करने के लिए एक हफ्ते का समय दिया है।
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एएसजी राजू ने तर्क दिया कि उत्तरदाताओं में से एक, एक चीनी नागरिक के एक भागने का है। आरोपियों के वकील ने कहा कि उन्होंने पहले ही अपने पासपोर्ट जमा कर दिए हैं। न्यायमूर्ति शर्मा ने यह भी संकेत दिया कि जब वह लिखित आदेश पारित करेंगी तो आरोपी को शुक्रवार और सोमवार को ईडी के समक्ष पेश होने का निर्देश देंगी।
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मंगलवार को न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की अवकाशकालीन पीठ ने मंगलवार को निचली अदालत के 30 दिसंबर के आदेश को चुनौती देने वाली एजेंसी की याचिका पर नोटिस जारी किया था। निचली अदालत ने 30 दिसंबर को वीवो इंडिया के तीन कार्यकारियों- चीनी नागरिक और वीवो इंडिया के अंतरिम सीईओ होंग शुक्वान उर्फ टेरी, मुख्य वित्तीय अधिकारी (सीएफओ) हरिंदर दहिया और सलाहकार हेमंत मुंजाल को रिहा करने का निर्देश दिया था।

तीनों आरोपियों ने जमानत के लिए स्थानीय अदालत का रुख किया था और दावा किया था कि उन्हें 22 दिसंबर को नहीं बल्कि 21 दिसंबर को गिरफ्तार किया गया था, जैसा कि ईडी ने दर्ज किया है और चूंकि उन्हें गिरफ्तारी के 24 घंटे के भीतर अदालत में पेश नहीं किया गया, इसलिए उनकी गिरफ्तारी "अवैध और कानून रूप से सही नहीं था।"

ईडी के वकील ने हालांकि इस दावे का विरोध करते हुए कहा था कि तीनों को औपचारिक रूप से गिरफ्तार किए जाने के बाद गिरफ्तारी के 24 घंटे के भीतर संबंधित अदालत में पेश किया गया था। एजेंसी ने कहा कि तीनों आरोपियों के परिसरों की 21 दिसंबर को तलाशी ली गई थी और इसके बाद उन्हें पूछताछ के लिए और उनके फोन के फॉरेंसिक विश्लेषण के लिए ईडी कार्यालय ले जाया गया था। ईडी ने अदालत को बताया कि उन्हें अगले दिन 22 दिसंबर को औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया।


ईडी ने पिछले साल जुलाई में वीवो-इंडिया कार्यालयों और उससे जुड़े लोगों के परिसरों पर छापा मारा था और चीनी नागरिकों और कई भारतीय कंपनियों से जुड़े एक बड़े मनी लॉन्ड्रिंग रैकेट का भंडाफोड़ करने का दावा किया था। तब उसने आरोप लगाया था कि भारत में करों के भुगतान से बचने के लिए वीवो-इंडिया ने चीन को 62,476 करोड़ रुपये 'अवैध रूप से' हस्तांतरित किए थे।

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