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कई उत्पादों पर बढ़ सकता है GST, चार से घटकर तीन हो सकते हैं स्लैब

Thu, 12 Dec 2019 09:13 AM IST
‌डिंपल अलवधी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Published by: ‌डिंपल अलवधी Updated Thu, 12 Dec 2019 09:13 AM IST
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GST Council may go for 3 slabs could make certain slabs expensive

राजस्व संग्रह पर दबाव बढ़ने के साथ ही सरकार कई उत्पादों पर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) बढ़ा सकती है। इसके अलावा जीएसटी स्लैब में भी बदलाव हो सकता है। जीएसटी परिषद की अगले हफ्ते होने वाली बैठक में ऐसे कई फैसले हो सकते हैं।

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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अगुआई वाली अधिकार प्राप्त जीएसटी परिषद की अगली बैठक 18 दिसंबर को होनी है, जिसमें मुख्य रूप से जीएसटी संग्रह में अनुमान से ज्यादा कमी और कई राज्यों के बकाया मुआवजा आदि मुद्दों पर मुख्य रूप से चर्चा होनी है।
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जीएसटी व्यवस्था में अभी तक 5, 12, 18 और 28 फीसदी के चार स्लैब हैं। 28 फीसदी की श्रेणी के तहत आने वाले उत्पादों और सेवाओं पर उपकर भी लगता है, जो 1 से 25 फीसदी के दायरे में रहता है। सूत्रों ने कहा कि मंगलवार को केंद्र और राज्यों के अधिकारियों की बैठक में दरों में बदलाव से जुड़ी सिफारिशों को अंतिम रूप दिया गया, जिसमें दरें 5 फीसदी से बढ़ाकर 8 फीसदी और 12 से बढ़ाकर 15 फीसदी करने का विकल्प भी शामिल है। जीएसटी परिषद की बैठक में विस्तृत प्रस्तुतीकरण किया जाएगा।

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कुछ उत्पादों पर बढ़ सकता है उपकर

जीएसटी परिषद की बैठक में मुआवजे की भरपाई करने के लिए कुछ उत्पादों पर उपकर बढ़ाने पर विचार किए जाने का भी अनुमान है। सूत्रों ने कहा कि परिषद स्लैबों के विलय के साथ स्लैब की संख्या तीन तक सीमित करने की संभावनाओं पर विचार कर सकती है। उन्होंने कहा कि इसमें छूट वाले उत्पादों की सूची पर फिर से विचार किया जा सकता है और साथ ही कुछ सेवाओं पर उपकर लगाने की संभावनाएं भी खंगाली जा सकती हैं।

40 फीसदी कम रहा सीजीएसटी संग्रह

हाल में आए सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल-नवंबर अवधि के दौरान बजट अनुमान की तुलना में केंद्रीय जीएसटी (सीजीएसटी) संग्रह लगभग 40 फीसदी कम रहा। अप्रैल-नवंबर के दौरान वास्तविक जीएसटी संग्रह 3,28,365 करोड़ रुपये रहा, जबकि इस अवधि के लिए बजट अनुमान 5,26,000 करोड़ रुपये था।

उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2018-19 में वास्तविक सीजीएसटी संग्रह 4,57,534 करोड़ रुपये रहा था, जबकि साल के लिए 6,03,900 करोड़ रुपये का अनुमान था। वहीं 2017-18 में सीजीएसटी संग्रह 2,03,261 करोड़ रुपये रहा था। जीएसटी में कमी पर चर्चा काफी अहम है और और मुआवजा उपकर संग्रह पिछले कई महीनों से चिंता का विषय बना हुआ है।

महाराष्ट्र का 15,558 करोड़ रुपये बकाया

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा कि राज्य सरकार जीएसटी मुआवजे आदि के एवज में केद्र सरकार से 15,558 करोड़ रुपये का ‘कानूनी बकाया’ मिलने का इंतजार कर रही है। वित्त मंत्री को लिखे पत्र में मुख्यमंत्री ने धनराशि तुरंत जारी करने की मांग की। उन्होंने कहा, ‘कर अवमूल्यन के मद में 6,946.29 करोड़ रुपये और जीएसटी मुआवजे के मद में 8,611.76 करोड़ रुपये बकाया हैं।’ आम बजट, 2019-20 के तहत महाराष्ट्र का कर अवमूल्यन 46,630.66 करोड़ रुपये था, जो 2018-19 में मिली 41,952.65 करोड़ रुपये की तुलना में 11.15 फीसदी ज्यादा था।

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