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जीपीएफ: केंद्र के कर्मियों से छिना आर्थिक फायदा, 'जनरल प्रोविडेंट फंड' की अधिकतम सीमा तय, 5 लाख होंगे जमा

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Thu, 03 Nov 2022 02:29 PM IST
सार

GPF: सरकार के नए निर्देशों के तहत अब जीपीएफ खाते में छह फीसदी राशि जमा कराने वाली शर्त तो रहेगी ही, साथ ही इसकी अधिकतम राशि भी तय कर दी गई है। अब कोई भी कर्मचारी या अधिकारी किसी भी तरह से पांच लाख रुपये से अधिक की राशि जीपीएफ में जमा नहीं करा सकता।

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GPF: Financial benefits taken away from the employees of the Center, the maximum limit of 'GPF' fixed
central employees - फोटो : GPF Rules

विस्तार

केंद्र सरकार ने 'जनरल प्रोविडेंट फंड' यानी सामान्य भविष्य निधि में पैसा जमा कराने की अधिकतम सीमा तय कर दी है। अब कोई भी सरकारी कर्मचारी पांच लाख रुपये से ज्यादा की राशि जीपीएफ में जमा नहीं करा सकेगा। कर्मचारी संगठनों का आरोप है कि केंद्र सरकार ने यह कदम उठाकर कर्मियों से आर्थिक फायदा छीनने का प्रयास किया है। अभी तक यह नियम था कि कोई भी कर्मचारी इस निधि में अपने कुल मेहनताने का 6 फीसदी जमा कराता था। अनेक ऐसे कर्मचारी भी थे, जो अपने मेहनताने का छह, दस या बीस फीसदी और उससे ज्यादा राशि भी जमा कराते थे। इस जमा राशि पर जो ब्याज मिलता है, वह सामान्य तौर पर बैंकों के मुकाबले ज्यादा रहता है। मौजूदा समय में जीपीएफ के खाताधारकों को 7.1 फीसदी दर से ब्याज मिलता है। 

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भारत सरकार के लोक शिकायत, कार्मिक और पेंशन मंत्रालय के तहत पेंशन और पेंशनभोगी कल्याण विभाग द्वारा दो नवंबर को इस संबंध में पत्र जारी किया गया है। विभाग द्वारा इस संबंध में 15 जून को एक आदेश जारी किया गया था। उसमें भी पांच लाख रुपये की अधिकतम सीमा का जिक्र था। बाद में अनेक मंत्रालयों और विभागों से ऐसे सवाल आने लगे कि इसे किस तरह लागू किया जाए। बहुत से कर्मचारी ऐसे भी हैं, जिन्होंने इस साल में पांच लाख रुपये से ज्यादा की राशि जमा करा दी है। अनेक कर्मचारी ऐसे भी हैं, जिनकी 2022-23 में जमा राशि पांच लाख रुपये के करीब पहुंचने वाली है। ऐसे में क्या किया जाए। पेंशन मंत्रालय द्वारा कहा गया है कि पहले जीपीएफ में कम से कम छह फीसदी राशि जमा कराना अनिवार्य था। यानी जो भी कर्मी जीपीएफ के दायरे में आता है, उसे इतनी राशि तो जमा करानी ही होगी। बहुत से कर्मचारी इससे ज्यादा राशि भी जमा कराते थे। 
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अब जीपीएफ खाते में छह फीसदी राशि जमा कराने वाली शर्त तो रहेगी ही, लेकिन इसकी अधिकतम राशि तय कर दी गई है। अब कोई भी कर्मचारी या अधिकारी किसी भी तरह से पांच लाख रुपये से अधिक की राशि जीपीएफ में जमा नहीं करा सकता। साल  2022-23 के लिए जिन कर्मियों की राशि पांच लाख रुपये से अधिक हो गई है, उनके खाते पर कैप लगा दी जाए। अब चालू वित्त वर्ष के लिए उनके जीपीएफ खाते में कोई राशि जमा नहीं होगी। जिन कर्मियों की जमा राशि पांच लाख रुपये होने वाली है, वहां भी ध्यान रखा जाए कि वह पांच लाख के ऊपर न जाने पाए। 
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बता दें कि पुरानी पेंशन व्यवस्था के अंतर्गत जो भी कर्मी या अधिकारी आते हैं, उन्हें जीपीएफ की सुविधा मिलती है। जीपीएफ पर जो ब्याज मिलता है, उस पर 80सी के तहत टैक्स में छूट मिलती है। अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ एआईडीईएफ के महासचिव सी.श्रीकुमार का कहना है, केंद्र सरकार कर्मियों के हितों के खिलाफ निर्णय ले रही है। पुरानी पेंशन बहाली के लिए कर्मचारी संघर्ष कर रहे हैं। सरकार इस नियम को लागू नहीं कर रही है। अगर कोई कर्मचारी अपनी मेहनत की कमाई से कुछ राशि जीपीएफ में जमा कराता है और उस पर ब्याज लेता तो वह भी सरकार को सहन नहीं हुआ। सरकार, केवल अपना खर्च कम करने पर ध्यान दे रही है।

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