एफडीआई : निवेश प्रस्तावों की मंजूरी के लिए सख्त की जाएगी समयसीमा, इससे प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में आएगी तेजी
डीपीआईआईटी सचिव ने कहा, इन मंजूरियों के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) है। फिर भी इसमें देरी हो रही है क्योंकि एसओपी का पालन नहीं किया जा रहा है। सचिव ने कहा, मंजूरी व अनुमोदन की प्रक्रिया को छोटा करने का विचार है।
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सरकार प्राथमिकता वाले क्षेत्रों से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) प्रस्तावों को तेजी से मंजूरी देने के लिए विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के लिए सख्त समयसीमा तय करेगी। इससे प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में तेजी आएगी। डीपीआईआईटी सचिव ने कहा, इन मंजूरियों के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) है। फिर भी इसमें देरी हो रही है क्योंकि एसओपी का पालन नहीं किया जा रहा है। सचिव ने कहा, मंजूरी व अनुमोदन की प्रक्रिया को छोटा करने का विचार है। विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड को खत्म करने के बाद एफडीआई नीति और फेमा (विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम) विनियमों के तहत विदेशी निवेश के लिए मंजूरी देने का कार्य संबंधित मंत्रालयों/विभागों को सौंप दिया गया है। इन्हें 60 दिन के भीतर प्रस्तावों पर फैसला लेना होता है।
इसलिए, नियम सरल करना जरूरी
- यह घोषणा इस लिहाज से अहम है क्योंकि हाल में देश में आने वाले एफडीआई में गिरावट दर्ज की गई है। सेवाओं, कंप्यूटर हार्डवेयर एवं सॉफ्टवेयर, दूरसंचार, वाहन और दवा जैसे क्षेत्रों में कम निवेश के कारण 2023-24 में एफडीआई इक्विटी प्रवाह 3.49 फीसदी घटकर 44.42 अरब डॉलर रह गया है।
- कुल एफडीआई भी 2022-23 के 71.35 अरब डॉलर से एक फीसदी घटकर 2023-24 में 70.95 अरब डॉलर रह गया।