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नया कानून बनाने की तैयारी में सरकार, विदेशी निवेश को मिलेगी सुरक्षा

Thu, 16 Jan 2020 11:02 AM IST
‌डिंपल अलवधी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Published by: ‌डिंपल अलवधी Updated Thu, 16 Jan 2020 11:02 AM IST
सार

  • विवादों के समाधान के लिए फास्ट-ट्रैक अदालतों की स्थापना कर सकती है सरकार।
  • अभी तक निवेशकों के लिए बड़ी चिंता रही है समझौतों का अनुपालन।
  • 40 पृष्ठ का मसौदा प्रस्ताव तैयार किया वित्त मंत्रालय ने, कई मंत्रालयों से हुई चर्चा।

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Government plans new law to protect foreign investment

विस्तार

विदेशी निवेश को ज्यादा सुरक्षा देने के लिए सरकार एक नया कानून बनाने की तैयारी में है। इससे विवाद समाधान में तेजी लाना सुनिश्चित किया जाएगा। इसका उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा विदेशी निवेश आकर्षित करके आर्थिक विकास दर को गति देना है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, वित्त मंत्रालय ने इसके लिए एक 40 पेज का मसौदा भी तैयार कर लिया है।

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उन्होंने कहा कि मसौदे में सरकार और निवेशकों के बीच विवादों के समाधान के लिए एक मध्यस्थ की नियुक्ति और फास्ट-ट्रैक अदालतों की स्थापना का भी प्रस्ताव किया गया है। एक अधिकारी ने कहा, ‘इसका उद्देश्य विदेशी निवेश लुभाना और प्रोत्साहन देना है, लेकिन इसमें सबसे बड़ी बाधा अनुबंधों को लागू करना और त्वरित विवाद समाधान है।’
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मसौदे प्रस्ताव का उद्देश्य समझौतों के पालन को लेकर निवेशकों के अविश्वास को खत्म करना है, जिनको लेकर हाल के दौर में संदेह खासा बढ़ गया है। दरअसल कई मामलों में कुछ राज्य सरकारों ने स्वीकृत परियोजनाओं की समीक्षा करने का फैसला किया या अनुबंधों को निरस्त करने की चेतावनी दी थी। सूत्रों के मुताबिक, इस मसौदे का विभिन्न मंत्रालयों और नियामकों द्वारा आकलन किया जा रहा है। हालांकि वित्त मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने इस मसले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

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कम होगी मुकदमेबाजी

एक अधिकारी ने कहा कि विदेशी निवेशक अनुबंधों के अनुपालन को अपनी सबसे बड़ी चिंताओं में से एक बताते रहे हैं। इसलिए, इस मोर्चे पर सुधार से सरकार के लिए मुकदमेबाजी में भी कमी आएगी। वर्तमान में निवेशक विवादों के समाधान के लिए मौजूदा कानूनी व्यवस्था पर ही निर्भर हैं, जिसमें मुकदमों के फैसले या निस्तारण में कई साल तक लग जाते हैं।

पूर्व में निवेशकों के पास मामलों को सरकार की द्विपक्षीय निवेश संधियों (बीआईटी) के तहत अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थ अदालतों में ले जाने का विकल्प था। लेकिन विदेशी मध्यस्थ अदालतों में कई झटके लगने के बाद भारत ने कई संधियों को आगे नहीं बढ़ाया, जिसके चलते निवेशकों को कई बड़े विवादों में पीछे हटना पड़ गया।

20 मामलों से जूझ रहा भारत

बीआईटी दो देशों के बीच होने वाला ऐसा समझौता है, जिससे विदेशी निवेशकों को सुरक्षा मिलती है और वे सरकार के साथ होने वाले विवादों का अंतरराष्ट्रीय पंचाट में ले जा सकते हैं। भारत फिलहाल वोडाफोन, डॉयचे टेलीकॉम और निसान मोटर कंपनी सहित कई कई कंपनियों के साथ विदेशी पंचाट में लगभग 20 मामलों से जूझ रहा है। ये मामले पूर्व-प्रभावी कर दावों और अनुबंधों के उल्लंघन से आदि से संबधित हैं। यदि भारत ये मामले हार जाता है तो उसे अरबों डॉलर का नुकसान हो सकता है। 

द्विपक्षीय संधियों की जगह नहीं ले सकता कानून

सरकार मान रही है कि अगर भारत दूसरे देशों के साथ निवेश संधियां नहीं करता है तो नया कानून निवेशकों का भरोसा मजबूत कर सकता है। सूत्रों ने कहा कि एक घरेलू कानून बीआईटी व्यवस्था की जगह नहीं ले सकता है, क्योंकि इसमें निवेशकों को अंतरराष्ट्रीय पंचाट में मामला ले जाने का विकल्प नहीं दिया गया है। हालांकि बीते लगभग पांच साल में भारत की कारोबार सुगमता रैकिंग 142 से सुधरकर 63 हो चुकी है। इसके बावजूद विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ाना जरूरी हो गया है। 

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