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Windfall Tax: सरकार ने डीजल और एटीएफ पर विंडफॉल टैक्स बढ़ाया, पाक्षिक समीक्षा बैठक के बाद लिया गया फैसला

Fri, 19 Aug 2022 12:04 PM IST
विवेक दास बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विवेक दास Updated Fri, 19 Aug 2022 12:04 PM IST
सार

Windfall Tax: सरकार ने तीसरे पाक्षिक रिव्यू के बाद विंडफॉल प्रॉफिट टैक्स बढ़ाने का फैसला लिया है। वित्त मंत्रालय ने नोटिफिकेशन जारी कर इस बात की जानकारी दी है। सरकार के इस फैसले के बाद डीजल के निर्यात पर अब विंडफॉल टैक्स बढ़कर सात रुपये प्रति लीटर हो गया है।

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Government increased windfall tax on diesel and ATF, decision taken after fortnightly review meeting
पेट्रोल पंप पर गाड़ियां। - फोटो : संवाद

विस्तार

अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल और रिफाईनरी उत्पादों के कीमतों में आई कमी के बाद केंद्र सरकार ने एक बार फिर से विमानन ईंधन के निर्यात पर विंडफॉल प्रॉफिट टैक्स लगाने का फैसला किया है। इसके साथ ही सरकार ने डीजल के निर्यात पर विंडफॉल प्रॉफिट टैक्स को बढ़ा दिया है। वहीं घरेलू क्रूड ऑयल के मामले में इसे कम कर दिया गया है। सरकार ने पेट्रोल के निर्यात पर विंडफॉल प्रॉफिट टैक्स को पहले की तरह ही शून्य रखने का भी फैसला लिया है। 

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वित्त मंत्रालय ने जारी किया नोटिफिकेशन 

सरकार ने तीसरे पाक्षिक रिव्यू के बाद विंडफॉल प्रॉफिट टैक्स बढ़ाने का फैसला लिया है। वित्त मंत्रालय ने  नोटिफिकेशन जारी कर इस बात की जानकारी दी है। सरकार के इस फैसले के बाद डीजल के निर्यात पर अब विंडफॉल टैक्स बढ़कर सात रुपये प्रति लीटर हो गया है। पूर्व में पांच रुपये प्रति लीटर का विंडफॉल टैक्स लगता था। वहीं अब विमानों के ईंधन (एटीफ) पर दो रुपये प्रति लीटर की दर से विंडफॉल टैक्स लगेगा। पहले एटीएफ के निर्यात पर कोई टैक्स नहीं लगता था। 

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इसी महीने की शुरुआत में घटाया गया था विंडफॉल टैक्स
बता दें कि सरकार ने अगस्त महीने की शुरुआत में हुई दूसरी समीक्षा के बाद डीजल पर एक्सपोर्ट टैक्स घटाकर पांच रुपये प्रति लीटर कर दिया था, उसी समय एटीएफ पर टैक्स को हटाकर शून्य कर दिया गया था। वहीं गुरुवार को तीसरी समीक्षा बैठक में सरकार ने क्रूड ऑयल के निर्यात पर लग रहे टैक्स में कटौती का भी फैसला लिया है। अब घरेलु क्रूड के निर्यात पर 17750 रुपये की जगह 13000 रुपये प्रति टन की दर से विंडफॉल प्राॅफिट टैक्स का भुगतान करना पड़ेगा।

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वित्त मंत्रालय ने कहा- सरकार के प्रयासों से जल्द मिलेगी महंगाई से राहत
सरकार के नीतिगत व आरबीआई के मौद्रिक नीति उपायों से देश चालू वित्त वर्ष में आर्थिक वृद्धि, महंगाई और वैश्विक स्तर पर संतुलन के मामले में दो माह पूर्व के मुकाबले बेहतर स्थिति में है। वित्त मंत्रालय ने शुक्रवार को मासिक आर्थिक समीक्षा में कहा, वैश्विक स्तर पर जिंसों के दाम में नरमी के साथ केंद्रीय बैंक के नीतिगत कदम और सरकार की राजकोषीय नीतियों से आने वाले महीनों में महंगाई को लेकर दबाव पर अंकुश लगेगा। रिपोर्ट में कहा गया है, वैश्विक चुनौतियों के बावजूद अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष ने 2022-23 में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 7.4% रहने का अनुमान जताया है। यह बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे अधिक है। आरबीआई ने 7.2% का अनुमान रखा है।

अर्थव्यवस्था में बना हुआ है वैश्विक निवेशकों का भरोसा
रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद से निवेशकों में अनिश्चितता बढ़ी है। इससे पूंजी निकासी हुई। यह स्थिति न केवल भारत में बल्कि अन्य अर्थव्यवस्थाओं में भी है। भारत के अलावा अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं की विनिमय दर में भी डॉलर के मुकाबले गिरावट देखी गई। भारत के आर्थिक परिदृश्य में वैश्विक निवेशकों का विश्वास बना हुआ है। 2022-23 की पहली तिमाही में 13.6 अरब डॉलर का शुद्ध एफडीआई इसका प्रमाण है।

महंगाई अस्वीकार्य रूप से ऊंची : दास
आबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक में महंगाई को ‘अस्वीकार्य व असंतोषजनक’ रूप से ऊंचा बताते हुए रेपो दर में 0.50% वृद्धि का प्रस्ताव किया था। केंद्रीय बैंक ने शुक्रवार को मौद्रिक नीति समिति बैठक का ब्योरा जारी कर कहा, बैठक में समिति के अन्य सदस्यों ने भी ऐसी ही राय जताई थी। समिति की तीन से पांच अगस्त तक की बैठक में रेपो दर को बढ़ाकर 5.40% कर दिया गया था।


बैंकों के निजीकरण पर आरबीआई की सफाई
आरबीआई ने सरकारी बैंकों के निजीकरण पर सफाई दी है। केंद्रीय बैंक के लेख में कहा गया था, सरकारी बैंकों के निजीकरण से फायदे से अधिक नुकसान हो सकता है। इसमें सरकार को ध्यान से आगे बढ़ने की सलाह दी गई थी। मामला तूल पकड़ने पर केंद्रीय बैंक ने शुक्रवार को कहा, सरकारी बैंकों के धीरे-धीरे विलय के समर्थन की बात उसके विचार नहीं हैं।

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