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GST: ट्रंप टैरिफ के बीच जीएसटी स्लैब में कमी से जीडीपी रफ्तार में, कर दरें घटने से जेब में आएगा ज्यादा पैसा
Mon, 18 Aug 2025 07:01 AM IST
शिव शुक्ला
अमर उजाला ब्यूरो/एजेंसी, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो/एजेंसी, नई दिल्ली
Published by: शिव शुक्ला
Updated Mon, 18 Aug 2025 07:01 AM IST
सार
जीएसटी में चार स्लैब हैं। ये 5, 12, 18 और 28 फीसदी के दायरे में हैं। नई व्यवस्था के तहत 28 फीसदी कर स्लैब समाप्त हो जाएगा। इस स्लैब में कारें और इलेक्ट्रॉनिक्स शामिल हैं।
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : एएनआई
विस्तार
वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी में 8 वर्षों में की गई सबसे बड़ी कर कटौती से सरकार के राजस्व पर दबाव पड़ेगा, लेकिन अर्थव्यवस्था की रफ्तार बढ़ाने में मदद मिलेगी। साथ ही अमेरिका के साथ चल रहे व्यापार युद्ध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि भी मजबूत होगी। अमेरिकी टैरिफ का खतरा कम होगा और इसके दबाव से निपटने में भारत को इस फैसले से बड़ा फायदा होने की उम्मीद है। कम कर दरों का मतलब है कि इससे लोगों की जेब में ज्यादा पैसा आएगा। निश्चित तौर पर इससे खपत बढ़ेगी।
आईडीएफसी फर्स्ट बैंक का कहना है कि इन कटौतियों से सामान सस्ते होने से निचले स्तर पर खपत बढ़ेगी। इससे देश की अर्थव्यवस्था में एक साल में 0.6 फीसदी की वृद्धि होगी। हालांकि, राज्य और केंद्र सरकार को सालाना 20 अरब डॉलर का नुकसान होगा। ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के फेलो रशीद किदवई ने कहा, इससे शेयर बाजार की कमजोर धारणा में सुधार होगा। बिहार में होने वाले अहम चुनाव से पहले मोदी को राजनीतिक फायदा भी होगा। किदवई ने कहा, जीएसटी में कटौती का सकारात्मक असर सभी पर पड़ेगा। आयकर में कटौती का असर सिर्फ तीन-चार फीसदी आबादी पर ही पड़ता है। मोदी ऐसा इसलिए कर रहे हैं क्योंकि अमेरिकी नीतियों के कारण उन पर काफी दबाव है। इस कदम से शेयर बाजार को भी फायदा होगा, जो अब राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि इसमें काफी खुदरा निवेशक हैं। 2017 के बाद से सबसे बड़े कर सुधार में मोदी सरकार ने जीएसटी व्यवस्था में बड़े बदलाव की घोषणा की है। इससे अक्तूबर से रोजाना की जरूरी वस्तुएं और इलेक्ट्रॉनिक्स सामान सस्ते हो जाएंगे।
28 फीसदी का कर स्लैब होगा समाप्त
जीएसटी में चार स्लैब हैं। ये 5, 12, 18 और 28 फीसदी के दायरे में हैं। नई व्यवस्था के तहत 28 फीसदी कर स्लैब समाप्त हो जाएगा। इस स्लैब में कारें और इलेक्ट्रॉनिक्स शामिल हैं। 12 फीसदी श्रेणी के अंतर्गत आने वाली लगभग सभी वस्तुओं को निचले 5 फीसदी स्लैब में स्थानांतरित कर दिया जाएगा। इससे कई और उपभोक्ता वस्तुओं और पैकेज्ड खाद्य पदार्थों को लाभ होगा। 28% और 12 फीसदी कर स्लैब का पिछले वित्त वर्ष में 250 अरब डॉलर के वार्षिक जीएसटी राजस्व में 16 फीसदी योगदान था।
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वाहन उद्योग : वर्गीकरण विवाद का होगा समाधान
ऑटोमोबाइल पर जीएसटी अभी शीर्ष स्लैब में है। इसको भी एक स्लैब में रखा जाएगा, ताकि इंजन क्षमता व लंबाई के आधार पर कारों के वर्गीकरण से उत्पन्न होने वाले विवादों को रोका जा सके। कम जीएसटी दर से मांग और बिक्री में वृद्धि होगी, क्योंकि कारें सस्ती हो जाएंगी। इससे खपत बढ़ेगी। जीएसटी दर युक्तिकरण पर मंत्रियों का समूह 21 अगस्त को चर्चा करेगा। इसके बाद केंद्र व राज्य के वित्त मंत्रियों वाली जीएसटी परिषद अगले महीने बैठक करेगी और अंतिम जीएसटी दर संरचना को मंजूरी देगी।
आम उपयोग की सभी वस्तुएं निचले स्लैब में
एक सरकारी अधिकारी ने कहा, भारत में आर्थिक सुधारों की श्रेणी में यह सबसे ऊपर है। नए ढांचे का मतलब लगभग सभी आम उपयोग की वस्तुएं निचले कर दायरे में आ जाएंगी। इससे कीमतें घटेंगी, जिससे खपत बढ़ेगी। मध्यम वर्ग, गरीबों, किसानों और एमएसएमई की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नेक्स्ट जेन जीएसटी का सुझाव दिया गया था। एक बार यह व्यवस्था लागू हो जाए और भारत एक विकसित देश बन जाए, तो हम एकल दर वाले जीएसटी के बारे में सोच सकते हैं।
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आईडीएफसी फर्स्ट बैंक का कहना है कि इन कटौतियों से सामान सस्ते होने से निचले स्तर पर खपत बढ़ेगी। इससे देश की अर्थव्यवस्था में एक साल में 0.6 फीसदी की वृद्धि होगी। हालांकि, राज्य और केंद्र सरकार को सालाना 20 अरब डॉलर का नुकसान होगा। ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के फेलो रशीद किदवई ने कहा, इससे शेयर बाजार की कमजोर धारणा में सुधार होगा। बिहार में होने वाले अहम चुनाव से पहले मोदी को राजनीतिक फायदा भी होगा। किदवई ने कहा, जीएसटी में कटौती का सकारात्मक असर सभी पर पड़ेगा। आयकर में कटौती का असर सिर्फ तीन-चार फीसदी आबादी पर ही पड़ता है। मोदी ऐसा इसलिए कर रहे हैं क्योंकि अमेरिकी नीतियों के कारण उन पर काफी दबाव है। इस कदम से शेयर बाजार को भी फायदा होगा, जो अब राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि इसमें काफी खुदरा निवेशक हैं। 2017 के बाद से सबसे बड़े कर सुधार में मोदी सरकार ने जीएसटी व्यवस्था में बड़े बदलाव की घोषणा की है। इससे अक्तूबर से रोजाना की जरूरी वस्तुएं और इलेक्ट्रॉनिक्स सामान सस्ते हो जाएंगे।
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28 फीसदी का कर स्लैब होगा समाप्त
जीएसटी में चार स्लैब हैं। ये 5, 12, 18 और 28 फीसदी के दायरे में हैं। नई व्यवस्था के तहत 28 फीसदी कर स्लैब समाप्त हो जाएगा। इस स्लैब में कारें और इलेक्ट्रॉनिक्स शामिल हैं। 12 फीसदी श्रेणी के अंतर्गत आने वाली लगभग सभी वस्तुओं को निचले 5 फीसदी स्लैब में स्थानांतरित कर दिया जाएगा। इससे कई और उपभोक्ता वस्तुओं और पैकेज्ड खाद्य पदार्थों को लाभ होगा। 28% और 12 फीसदी कर स्लैब का पिछले वित्त वर्ष में 250 अरब डॉलर के वार्षिक जीएसटी राजस्व में 16 फीसदी योगदान था।
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वाहन उद्योग : वर्गीकरण विवाद का होगा समाधान
ऑटोमोबाइल पर जीएसटी अभी शीर्ष स्लैब में है। इसको भी एक स्लैब में रखा जाएगा, ताकि इंजन क्षमता व लंबाई के आधार पर कारों के वर्गीकरण से उत्पन्न होने वाले विवादों को रोका जा सके। कम जीएसटी दर से मांग और बिक्री में वृद्धि होगी, क्योंकि कारें सस्ती हो जाएंगी। इससे खपत बढ़ेगी। जीएसटी दर युक्तिकरण पर मंत्रियों का समूह 21 अगस्त को चर्चा करेगा। इसके बाद केंद्र व राज्य के वित्त मंत्रियों वाली जीएसटी परिषद अगले महीने बैठक करेगी और अंतिम जीएसटी दर संरचना को मंजूरी देगी।
आम उपयोग की सभी वस्तुएं निचले स्लैब में
एक सरकारी अधिकारी ने कहा, भारत में आर्थिक सुधारों की श्रेणी में यह सबसे ऊपर है। नए ढांचे का मतलब लगभग सभी आम उपयोग की वस्तुएं निचले कर दायरे में आ जाएंगी। इससे कीमतें घटेंगी, जिससे खपत बढ़ेगी। मध्यम वर्ग, गरीबों, किसानों और एमएसएमई की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नेक्स्ट जेन जीएसटी का सुझाव दिया गया था। एक बार यह व्यवस्था लागू हो जाए और भारत एक विकसित देश बन जाए, तो हम एकल दर वाले जीएसटी के बारे में सोच सकते हैं।