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Adani US Bribery Case: रिश्वत केस में फंसने के बाद अब कैसे बचेंगे अदाणी? अमेरिकी कानून में क्या हैं विकल्प?

Fri, 22 Nov 2024 12:50 PM IST
द बोनस बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: द बोनस Updated Fri, 22 Nov 2024 12:50 PM IST
सार

Options for Adani in Bribery Case: अदाणी समूह के गौतम अदाणी, सागर अदाणी समेत कई एक्जीक्यूटिव्स के खिलाफ एक अमेरिकी अदालत में घूसखोरी और धोखाधड़ी के मामले बनाए गए हैं...

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Gautam Adani US Bribery Case these are probable options for Indian businessman after indictment
अदाणी विवाद - फोटो : amarujala.com

विस्तार

दुनिया के सबसे अमीर लोगों में शुमार और भारत के शीर्ष कारोबारियों में गिने जाने वाले गौतम अदाणी अमेरिका में एक नए मामले में फंस चुके हैं। एक अमेरिकी अदालत में गौतम अदाणी और उनके समूह के कई अन्य लोगों के खिलाफ घूसखोरी और निवेशकों के साथ धोखाधड़ी जैसे मामले बनाए गए हैं। इन मामलों में गौतम अदाणी समेत कई लोगों के खिलाफ अमेरिका में अरेस्ट वारंट भी निकल चुका है। हालांकि घूसखोरी पर लगाम लगाने के (एंटी-ब्राइबरी) अमेरिकी कानून के हिसाब से अदाणी के पास अभी भी बचने के विकल्प मौजूद हैं।

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इस तरह गिरफ्तारी से बच सकते हैं अदाणी

ओपन सोसायटी जस्टिस इनिशिएटिव के अनुसार, अमेरिका में अगर किसी के ऊपर घूसखोरी का मामला बनता है, तो उसके पास राहत के कई विकल्प मौजूद होते हैं। ओपन सोसायटी की वेबसाइट पर अमेरिकी कानून में मौजूद राहत के विकल्पों के बारे में बताया गया है। उसके अनुसार, इस तरह के मामलों में आरोपियों को राहत देने के दो प्रावधान किए गए हैं। वे दोनों प्रावधान हैं- डेफर्ड प्रोसीक्यूशन एग्रीमेंट (डीपीए) और नॉन-प्रोसीक्यूशन एग्रीमेंट (एनपीए)। इन प्रावधानों के तहत अगर आरोपी अपने ऊपर लगे घूसखोरी के आरोप को स्वीकार कर लेते हैं तो उन्हें कुछ जुर्माना देना पड़ता है। साथ ही उन्हें कानून के अनुपालन के अपने तौर-तरीकों को सुधारना पड़ता है। इस तरह गिरफ्तारी या जेल जैसी सजाएं नहीं होती हैं।

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गोल्डमैन सैश ने ऐसे सेटल किया था केस

कुछ पुराने मामलों से भी इस बात के साक्ष्य मिलते हैं और पता चलता है कि घूसखोरी के आरोप लगने के बाद आरोपियों (कंपनियों) के सामने क्या विकल्प रहते हैं। उदाहरण के लिए कुछ ही साल पहले का गोल्डमैन सैश केस देखा जा सकता है। गोल्डमैन सैश के ऊपर कई देशों में सरकार को रिश्वत देने का आरोप लगा था। दिग्गज फाइनेंस कंपनी ने उस मामले में सेटलमेंट का रास्ता अपनाया था। गोल्डमैन सैश ने लंबी मुकदमेबाजी से बचने के लिए सेटलमेंट के तौर पर 2020 में 2.5 बिलियन डॉलर का भारी-भरकम भुगतान किया था।

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एरिक्सन के साथ भी हुआ था ऐसा मामला

स्वीडन की टेलीकम्युनिकेशन कंपनी एरिक्सन भी रिश्वत के मामले में फंस चुकी है। एरिक्सन के ऊपर भी फॉरेन करप्ट प्रैक्टिसेज एक्ट के उल्लंघन का आरोप लगा था। उसके ऊपर आरोप था कि उसने चीन, वियतनाम, इंडोनेशिया, कुवैत और जिबुती जैसे देशों में रिश्वत देकर काम कराया था। कंपनी ने आरोपों को स्वीकार करते हुए 2019 में अमेरिकी कानून मंत्रालय के साथ डीपीए किया था। कंपनी करार के तहत 1 बिलियन डॉलर से ज्यादा जुर्माना देने और अथॉरिटीज के साथ सहयोग करने पर सहमत हुई थी। हालांकि एरिक्सन ने उसके बाद भी तौर-तरीकों में सुधार नहीं किया था। कंपनी ने इसे खुद मार्च 2023 में स्वीकार किया था। उसके बाद कंपनी 2.06 बिलियन डॉलर का जुर्माना देने के लिए तैयार हुई थी।

ओरेकेल और एसएपी का भी उदाहरण मौजूद

इसी तरह का उदाहरण 2012 के ओरेकल केस में भी मिलता है. अदाणी मामले की तरह ओरेकल के खिलाफ अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस (कानून मंत्रालय) और बाजार नियामक एसईसी दोनों की ओर से आरोप लगाए गए थे। उसने 23 मिलियन डॉलर का जुर्माना देकर एसईसी के साथ मामले को सेटल कर लिया था। वहीं 2010 के एक मामले में एसएपी ने 220 मिलियन डॉलर का भुगतान कर कानून मंत्रालय के साथ सेटलमेंट किया था। एसएपी ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को स्वीकार नहीं किया था और उसने डीपीए का रास्ता चुना था।

मामला सेटल करने के मूड में नहीं हैं अदाणी

मतलब गौतम अदाणी और अदाणी समूह के पास पर्याप्त कानूनी विकल्प बचे हुए हैं। हालांकि अदाणी समूह का रुख देखकर लगता नहीं है कि वह सेटलमेंट करने के मूड में है। अदाणी समूह ने गुरुवार को इस मामले पर आधिकारिक बयान जारी किया, जिसमें उसने सभी आरोपों को आधारहीन और गलत करार दिया। अदाणी समूह का दावा है कि उसकी कंपनियां सभी संबंधित कानूनों का सख्ती से पालन करती हैं। वैसे भी अगर अदाणी समूह सेटलमेंट का विकल्प चुनता है तो उसे प्रतिष्ठा का भारी नुकसान होने वाला है।

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