महंगाई का झटका: 10 दिन में पांच रुपये तक महंगे हुए पेट्रोल-डीजल, आसान सवालों से समझें क्यों आसमान छू रहे दाम
भारत में पेट्रोल, डीजल और सीएनजी के भाव पिछले 10 दिनों में पांच रुपये प्रति लीटर तक बढ़ गए हैं। पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच कंपनियों का घाटा पाटने के लिए कीमतों में इजाफा किया गया है। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।
विस्तार
देशभर में महंगाई के मोर्चे पर आम आदमी को एक और बड़ा झटका लगा है। सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की कीमतों में एक बार फिर इजाफा कर दिया है। पिछले 10 दिनों के भीतर पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में करीब पांच रुपये प्रति लीटर तक की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। चुनाव के बाद कीमतों में लगी रोक हटने से परिवहन लागत बढ़ने और अर्थव्यवस्था पर महंगाई का दबाव बढ़ने की चिंताएं गहरा गई हैं। आइए, आसान सवालों के जरिए समझते हैं कि ईंधन के दाम क्यों बढ़ रहे हैं और इसके क्या आर्थिक मायने हैं।
सवाल: पेट्रोल-डीजल और सीएनजी की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी कितनी है?
जवाब: नवीनतम संशोधन के तहत देश भर में पेट्रोल की कीमतों में 87 पैसे और डीजल में 91 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है। 15 मई से अब तक 10 दिनों से भी कम समय में यह कुल इजाफा लगभग 5 रुपये प्रति लीटर हो गया है। इस बढ़ोतरी के बाद राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 99.51 रुपये और डीजल 92.49 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया है। वहीं, सीएनजी के दाम भी 1 रुपये बढ़कर दिल्ली में 81.09 रुपये प्रति किलोग्राम हो गए हैं, जिससे सीएनजी में हालिया कुल बढ़ोतरी 4 रुपये प्रति किलो हो गई है। महानगरों की बात करें तो मुंबई में पेट्रोल 108.49 रुपये और डीजल 95.02 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है।
सवाल: अचानक ईंधन के दाम क्यों बढ़ाए जा रहे हैं?
जवाब: ईंधन की कीमतों में इस भारी बढ़ोतरी का मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों का अस्थिर होना है। फरवरी के अंत से वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में 50 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है। इसके पीछे अमेरिका-इस्राइल की ओर से ईरान पर किए गए हमले और वैश्विक तेल पारगमन के प्रमुख मार्ग 'होर्मुज जलडमरूमध्य' में शिपमेंट में आई बाधाएं मुख्य वजह हैं। इसके अलावा, कमजोर रुपया और रिफाइनिंग मार्जिन का कड़ा होना भी आयात लागत को तेजी से बढ़ा रहा है।
सवाल: लंबे समय से दाम स्थिर थे, तो अब अचानक क्यों बढ़ रहे हैं?
जवाब: अप्रैल 2022 से पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतें स्थिर रखी गई थीं, जिसमें केवल राष्ट्रीय चुनावों से ठीक पहले मार्च 2024 में दो रुपये की कटौती की गई थी। विपक्षी दलों का आरोप है कि सरकार ने प्रमुख राज्यों के चुनावों के कारण कीमतों में संशोधन में देरी की। 15 मई को पश्चिम बंगाल सहित तीन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सत्तारूढ़ भाजपा की जीत के बाद यह रोक हटा ली गई और कंपनियों ने दाम बढ़ाने शुरू कर दिए।
सवाल: क्या कीमतें बढ़ने के बावजूद तेल कंपनियों को घाटा हो रहा है?
जवाब: हां, लगातार बढ़ोतरी के बावजूद तेल कंपनियां भारी घाटा सह रही हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, 15 मई की बढ़ोतरी से घाटा कम जरूर हुआ, लेकिन सरकारी तेल कंपनियां अभी भी हर दिन लगभग 750 करोड़ रुपये का नुकसान उठा रही हैं। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल की रिपोर्ट के मुताबिक, हालिया बढ़ोतरी के बाद भी तेल विपणन कंपनियों को पेट्रोल पर 10 रुपये और डीजल पर 13 रुपये प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है।
सवाल: आम आदमी और देश की अर्थव्यवस्था पर इसका क्या असर पड़ेगा?
जवाब: ईंधन महंगा होने से सीधा असर माल ढुलाई और परिवहन लागत पर पड़ता है, जिससे हर जरूरी चीज महंगी हो सकती है। आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 3.48% और थोक महंगाई दर 42 महीने के उच्चतम स्तर 8.3% पर पहुंच गई है, जिसका मुख्य कारण ईंधन और ऊर्जा की लागत बढ़ना ही है। विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम करने और चालू खाता घाटे को बढ़ने से रोकने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागरिकों और सरकारी विभागों से ईंधन बचाने, रिमोट वर्किंग अपनाने और गैर-जरूरी यात्राएं कम करने की अपील की है। कई राज्य सरकारों ने भी अपने विभागों को यात्रा कम करने के निर्देश दिए हैं।
सवाल: ईधन की बढ़ती कीमतों के बारे में पक्ष-विपक्ष का क्या रुख है?
जवाब: एक ओर सरकार पूरे देश में पेट्रोल और डीजल की सप्लाई समान्य होने के दावे कर ही है। हालांकि विपक्ष इस मसले को सरकार को घेरने में कोई कोताही बरतने को तैयार नहीं है। शनिवार को आम आदमी के पार्टी के नेता और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ईधन संकट पर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने अपने एक्स अकाउंट पर आम लोगों से सवाल करते हुए लिखा, "पूरे देश में तेल-गैस के बढ़ते दामों और किल्लत से हाहाकार मचा हुआ है। रूस और ईरान हमें सस्ते दामों पर तेल देने को तैयार हैं। क्या हमें रूस और ईरान से सस्ता गैस और तेल खरीदना चाहिए? आपकी क्या राय है।"