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Economic Survey 2022: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पेश किया आर्थिक सर्वे, जीडीपी के 8.5 फीसदी रहने का अनुमान
Mon, 31 Jan 2022 01:12 PM IST
दीपक चतुर्वेदी
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: दीपक चतुर्वेदी
Updated Mon, 31 Jan 2022 01:12 PM IST
सार
FM Tables Economic Survey 2021-22 In Lok Sabha: सोमवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया जो 1 अप्रैल, 2022 से शुरू होने वाले वित्तीय वर्ष के लिए सरकार के बजट से पहले अर्थव्यवस्था की स्थिति का विवरण देता है। यह 2022-23 वित्तीय वर्ष (अप्रैल 2022 से मार्च 2023) में भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए 8 से 8.5 प्रतिशत की विकास दर का अनुमान लगाता है। ये चालू वित्त वर्ष के 9.2 फीसदी ग्रोथ के पूर्व अनुमान से कम है।
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आर्थिक सर्वेक्षण 2022
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मंगलवार 1 फरवरी 2022 को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण देश का आम बजट पेश करेंगी। गौरतलब है कि पूर्णकालिक महिला वित्त मंत्री होने के नाते यह सीतारमण का चौथा बजट होगा, जबकि 2014 में सत्ता पर काबिज होने के बाद से मोदी सरकार का यह 10वां बजट होगा। इससे पहले सोमवार को वित्त मंत्री ने आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया जो 1 अप्रैल, 2022 से शुरू होने वाले वित्तीय वर्ष के लिए सरकार के बजट से पहले अर्थव्यवस्था की स्थिति का विवरण देता है। यह 2022-23 वित्तीय वर्ष (अप्रैल 2022 से मार्च 2023) में भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए 8 से 8.5 प्रतिशत की विकास दर का अनुमान लगाता है।
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एनएसओ ने जताया था 9.2 फीसदी का अनुमान
गौरतलब है कि राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) द्वारा पूर्व में 9.2 प्रतिशत जीडीपी विस्तार का अनुमान जताया गया था। यानी ये एनएसओ के पूर्व अनुमान से कम है। आर्थिक सर्वेक्षण 2021-22, अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों की स्थिति के साथ-साथ विकास में तेजी लाने के लिए किए जाने वाले सुधारों का विवरण देता है। 2020-21 में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 7.3 प्रतिशत की गिरावट आई थी। सर्वेक्षण भारतीय अर्थव्यवस्था के लचीलेपन में सुधार के लिए आपूर्ति-पक्ष के मुद्दों पर केंद्रित है।
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क्या होता है आर्थिक सर्वेक्षण
बजट हर साल 1 फरवरी के दिन पेश किया जाता है। इसके ठीक एक दिन पहले आर्थिक सर्वेक्षण को सामने रखा जाता है, हालांकि पिछले साल इसे 29 जनवरी को पेश किया गया था। आर्थिक सर्वेक्षण बजट का मुख्य आधार होता है और इसमें अर्थव्यवस्था की पूरी तस्वीर पेश की जाती है और पूरा लेखा.जोखा रहता है। दूसरे शब्दों में कहें तो आर्थिक सर्वेक्षण देश की आर्थिक सेहत का लेखा.जोखा होता है। इसके जरिए सरकार देश को अर्थव्यवस्था की हालत के बारे में बताती है। इसमें साल भर में विकास का क्या ट्रेंड रहा, किस क्षेत्र में कितनी पूंजी आई, विभिन्न योजनाएं किस तरह लागू हुईं इत्यादि इन सभी बातों की जानकारी होती है। इसके साथ ही इसमें सरकारी नीतियों की जानकारी होती है।
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1950-51 में पहला आर्थिक सर्वे पेश
जब एक बार दस्तावेज तैयार हो जाता है, तो उसे वित्त मंत्री द्वारा अनुमोदित कर दिया जाता है। पहला आर्थिक सर्वेक्षण 1950-51 में पेश किया गया था। बजट के समय ही इस दस्तावेज को पेश किया जाता है। पिछले कुछ सालों में आर्थिक सर्वेक्षण को दो खंडों में प्रस्तुत किया जाने लगा है। आर्थिक सर्वे रिपोर्ट को बजट का मुख्य आधार माना जाता है। हालांकि इसकी सिफारिशें सरकार लागू ही करे, ऐसा जरूरी नहीं होता है। इसमें सरकारी नीतियों, प्रमुख आर्थिक आंकड़े और क्षेत्रवार आर्थिक रूझानों के बारे में विस्तृत जानकारी होती है। इसे दो हिस्सों में पेश किया जाता है। पहले हिस्से में अर्थव्यवस्था की हालत बताई जाती है और दूसरे हिस्से में प्रमुख आंकड़े प्रदर्शित किए जाते हैं। आर्थिक मामलों के विभाग के आर्थिक प्रभाग द्वारा मुख्य आर्थिक सलाहकार के मार्गदर्शन में इस दस्तावेज को तैयार किया जाता है।