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पांच तरह के होते हैं म्यूचुअल फंड, निवेश करने से पहले जानें कौन सा है आपके लिए सही

Sat, 07 Dec 2019 05:27 PM IST
paliwal पालीवाल बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Published by: paliwal पालीवाल Updated Sat, 07 Dec 2019 05:27 PM IST
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five types of mutual funds are their for investment, know which one is better for you
mutual fund - फोटो : PTI

हम सभी लोग अपनी वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए बचत करते हैं। बचत करने से जहां एक तरफ इमरजेंसी में पैसे का इस्तेमाल हो सकता है, वहीं यह लोन लेने के रास्ते से भी बचाता है। एक आदमी के वित्तीय गोल होते हैं रिटायरमेंट, बच्चों की शादी, छुट्टियां, घर खरीदना, बड़ी कार खरीदना या फिर अपना व्यापार शुरू करना। इनको पूरा करने के लिए पैसा और समय चाहिए होता है। अगर आप इसके लिए पांच से 10 साल का समय देते हैं तो फिर यह आपको फायदा देगा। पीजीआईएम इंडिया म्यूचुअल फंड के सीईओ अजीत मेनन के अनुसार हर तरह का गोल पूरा करने के लिए अलग-अलग म्यूचुअल फंड में निवेश करने की जरूरत पड़ती है। 

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वैसे तो म्यूचुअल फंड सात  प्रकार के होते हैं लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा सिर्फ पांच प्रकार के फंड की होती है। ये फंड है इक्विटी फंड, बैलेंस फंड, इंडेक्स फंड, डेब्ट फंड, मनी मार्केट फंड, गिल्ड फंड और लिक्विड फंड। 

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1. इक्विटी फंड 

इक्विटी फंड, एक म्युचुअल फंड होता है जो स्टॉक में मुख्य रूप से निवेश करता है। यह सक्रिय या निष्क्रिय (इंडेक्स फंड) रूप से प्रबंधित हो सकता है। इक्विटी फंड को स्टॉक फंड के रूप में भी जानते हैं। स्टॉक म्युचुअल फंड, मुख्य रूप से कंपनी के आकार, पोर्टफोलियो और भूगोल में होल्डिंग्स की निवेश शैली के अनुसार वर्गीकृत किए जाते हैं।

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2. डेट फंड 

जहां इक्विटी म्यूचुअल फंड्स पब्लिक लिस्टेड कंपनियों में निवेश करते हैं, वहीं डेट फंड्स सरकारी और कंपनियों की फिक्स-इनकम सिक्योरिटीज में निवेश करते हैं। इनमें कॉर्पोरेट बॉण्ड, सरकारी सिक्योरिटीज, ट्रेजरी बिल, मनी मार्केट इंस्टूमेंट्स और अन्य कई प्रकार की डेट सिक्युरिटीज शामिल हैं। शेयर की तरह किसी कंपनी की इक्विटी में निवेश करना उस कंपनी की ग्रोथ के लिए हिस्सेदारी को खरीदना है। लेकिन जब आप डेट फंड खरीदते हैं तो, आप जारी करने वाली संस्था को लोन देते हैं। सरकार और प्राइवेट कंपनियां अपने विभिन्न कार्यक्रमों को चलाने के लिए लोन पाने के लिए बिल और बॉन्ड जारी करती हैं।

3. बैलेंस अथवा हाइब्रिड फंड 

बैलेंस फंड को हाइब्रिड फंड भी कहते हैं। यह कॉमन स्टॉक, बॉन्ड और अल्पावधि बॉन्ड होता है। इस फंड जोखिम कम होता है और ज्यादातर निवेश की गई पूंजी की सुरक्षा की गारंटी होती है। इस तरह से कह सकते हैं कि यह फंड लाभदायक है। एग्रेसिव बैलेंस फंड, कंजरवेटिव बैलेंस फंड, पेंशन फंड, चाइल्ड प्लान और मासिक आय योजना आदि इसके उदाहरण हैं।

गिल्ट फंड 

यह फंड सबसे ज्यादा सुरक्षित फंड माना जाता है। इसमें कंपनी निवेशकों से लिया हुआ सारा पैसा सरकार, सरकारी योजनाओं में लगा देती है। चूंकि, इसमें सरकार का बैकअप रहता है, इसलिए पैसा डूबने का खतरा नहीं रहता है।

4. मनी मार्केट फंड 

ये फंड अल्पकालिक फिक्स्ड आय प्रतिभूतियों जैसे सरकारी बॉन्ड, ट्रेजरी बिल, बैंकरों की स्वीकृति, वाणिज्यिक पत्र और जमा प्रमाणपत्रों में निवेश करते हैं। ये आम तौर पर एक सुरक्षित निवेश होते हैं, लेकिन इसमें अन्य प्रकार के म्यूचुअल फंड्स की तुलना में थोड़ा कम रिटर्न प्राप्त होता है। यह फंड एक सुरक्षित फंड है, यह उन लोगों के लिए है जो कि तुरंत निवेश का फायदा भी चाहते हैं।

5. लिक्विड फंड 

इन योजनाओं के अंतर्गत पैसा मुख्य रुप से अल्पकालिक साधनों में निवेश किया जाता है। उदाहरण के लिए टी बिलों, सीपी आदि में। यह फंड कम समय के निवेश पर अच्छा रिटर्न देने के लिए जाना जाता है। ग्रोथ फंड, इस फंड की सहायता से अधिकतम फायदा प्राप्त करने का प्रयास किया जाता है। इसके अंतर्गत उन कंपनियों में निवेश किया जाता है जो बाजार में अच्छा ग्रोथ करती हैं लेकिन इस फंड में जोखिम ज्यादा होता है।

आखिर क्यों करना चाहिए म्यूचुअल फंड में निवेश

एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड इंडिया (एएमएफआई) के अनुसार, लोगों को म्यूचुअल फंड में नहीं बल्कि उनके माध्यम से निवेश करना चाहिए। इसे समझने के लिए, हम अपनी जरूरतों के अनुसार विभिन्न निवेश मार्गों में निवेश करते हैं जैसे पूंजी वृद्धि के लिए हम इक्विटी शेयरों में निवेश करते हैं, पूंजी सुरक्षा व नियमित आय के लिए हम नियत आय उत्पादों में निवेश करते हैं।

अधिकांश निवेशकों के लिए चिंता यह होती है कि उनके लिए सबसे अच्छा साधन क्या होगा? किसी व्यक्ति के पास शोध करने के लिए पर्याप्त क्षमताएं, समय या रुचि नहीं भी हो सकती है।

निवेशों के प्रबंधन के लिए, व्यक्ति उन कार्यों के लिए आउटसोर्सिंग कर सकता है जिनको वह नहीं कर पाता है। कोई भी व्यक्ति किसी पेशेवर फर्म-म्यूचुअल फंड कंपनी से 'अपने निवेशों के प्रबंधन' के आउटसोर्स कर सकता है। म्यूचुअल फंड भिन्न-भिन्न उद्देश्यों को पूरा करने के लिए भिन्न-भिन्न मार्गों का प्रस्ताव करते हैं जिनको निवेशक अपनी विशिष्ट परिस्थिति व उद्देश्य के आधार पर चुन सकते हैं।

म्यूचुअल फंड कंपनियां कागजी कार्रवाई सहित सभी प्रशासनिक गतिविधियों का प्रबंधन करती हैं। नेट एसेट वैल्यू (एनएवी) और खाता विवरणों के संयोजने के माध्यम से निवेश पोर्टफोलियो की प्रगति का लेखांकन व रिपोर्टिंग को भी संभव करती हैं।



जिन लोगों को अपने भविष्य की जरूरतों के लिए निवेश की जरूरत है म्यूचुअल फंड उनके लिए बहुत सुविधाजनक है। पेशेवरों की एक टीम धन का प्रबंधन करती है और उनकी दुनिया के कार्यों में शामिल हुए बिना निवेशक उनकी विशेषज्ञता के लाभों का आनंद ले सकते हैं।

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